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भूल जाएं म्यूचुअल फंड ने पहले क्या रिटर्न दिया, निवेश करना है तो इन बातों का रखें ध्यान

Mutual Fund Tips: अब निवेशकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि नए निवेश से पहले एक बार बाजार का आंकलन करें.

August 4, 2020 5:14 PM
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कोरोना महामारी के चलते जिस तरह से बाजार में गिरावट आई, अभी उससे म्यूचुअल फंड बाजार पूरी तरह से उभर नहीं पाया है. इससे न सिर्फ 5 या 6 महीने का रिटर्न खराब हुआ है, बल्कि पिछले 5 साल के रिटर्न पर भी असर पड़ा है. पिछले 5 साल के दौरान 192 इक्विटी म्यूचुअल फंडों में से केवल 6 ने एसआईपी के जरिए दोहरे अंकों में रिटर्न दिए हैं. इसलिए अब निवेशकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि नए निवेश से पहले एक बार बाजार का आंकलन करें. उनके लिए हिस्टोरिक रिटर्न और किस फंड में क्या रिस्क है, इन सब बातों से उपर देखने का समय आ गया है. बल्कि इन बातों की जगह एक्सपेंस रेश्यो, रिस्क एडजेस्टेड रिटर्न और पोर्टफोलियो टर्नओवर पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.

बेंचमार्क से तुलना करने का फायदा नहीं

मौजूदा समय में एक निवेशक को म्यूचुअल फंड योजना के ऐतिहासिक रिटर्न पर विचार करने के बजाय एक्सपेंस रेश्यो, रिस्क एडजेस्टेड रिटर्न और पोर्टफोलियो कारोबार पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. जबकि अधिकांश निवेशक म्यूचुअल फंड रिटर्न की तुलना सेंसेक्स या निफ्टी जैसे बेंचमार्क इंडेक्स से करते हैं, एक बेहतर निवेशक के तौर पर आपको यह देखना चाहिए कि एक्सपेंस रेश्यो का आपके निवेश पर क्या असर होता है. या निवेशकों को यह देखना चाहिए कि रिटर्न देने के लिए उठाए गए जोखिम का क्या प्रभाव हो रहा है.

एक्सपेंस रेश्यो

किसी योजना का नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) उस स्कीम का एक्सपेंस रेश्यो का लेखा करने के बाद बताया जाता है. इसलिए ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो लंबे समय में इक्विटी निवेश से रिटर्न को कम कर देता है. एक्सपेंस रेश्यो वह रकम है जो एसेट मैनेजमेंट कंपनियां आपके पैसे को मैनेज करने के बदले में सालाना आधार पर लेती हैं. इसलिए निवेशकों को मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या एक्टिवली मैनेज्ड फंड हायर एक्सपेंस रेश्यो को सही ठहराता है और वैरियस मार्केट साइकिल में बेंचमार्क को बेहतर बनाता है.

निवेशकों को डायरेक्ट प्लान पर ध्यान देना चाहिए, जिनकी नियमित योजनाओं की तुलना में कुल एक्सपेंस रेश्यो कम है. चूंकि एक डायरेक्ट प्लान की एनएवी एक रेगुलर प्लान की तुलना में अधिक है, इसलिए लंबी अवधि के निवेश में रेगुलर और डायरेक्ट प्लान के बीच रिटर्न में अंतर बढ़ेगा. म्यूचुअल फंड हाउस या रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट को स्विच रिक्वेस्ट फॉर्म सबमिट करके एक रेगुलर से डायरेक्ट प्लान में स्विच किया जा सकता है.

रिस्क एडजेस्टेड रिटर्न

यह रिटर्न कमाने के लिए फंड मैनेजर द्वारा लिए गए जोखिम को दर्शाता है. निवेशकों को इस अनुपात को देखना चाहिए क्योंकि यह म्यूचुअल फंड स्कीम के रिटर्न पर एक साफ तस्वीर पेश करता है. अगर कोई फंड मैनेजर अधिक जोखिम ले रहा है, तो उसे लिए गए जोखिम को सही ठहराने के लिए हाई रिटर्न अर्जित करना चाहिए. ऐसे 5 उपाय हैं जिनका उपयोग जोखिम समायोजित रिटर्न का विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है. मसलन अल्फा, बीटा, आर-स्क्वेर, स्टैंडर्ड डेविएशन और शार्प रेश्यो. शार्प रेश्यो दिखाता है कि एसेट्स ने कैसा प्रदर्शन किया है. इसका कैलकुलेशन वास्तविक रिटर्न से रिस्क-फ्री इंस्ट्रूमेंट पर रिटर्न को घटाकर किया जाता है. फिर पोर्टफोलियो रिटर्न के स्टैंडर्ड डेविएशन द्वारा इसे विभाजित किया जाता है. एक हाई शार्प रेश्यो का अर्थ है कि निवेशक को लिए गए जोखिम के लिए बेहतर रिवार्ड मिला है.

पोर्टफोलियो टर्नओवर

यह म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में चर्न है जो फंड मैनेजर ने बनाया है. एक हाई पोर्टफोलियो टर्नओवर का मतलब निवेशक के लिए हायर कास्ट है और यह लंबे समय में रिटर्न को प्रभावित करेगा. डायनमिक एसेट एलोकेशन वाले फंड्स का खर्च अपेक्षाकृत ज्यादा होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक मंथन हमेशा हाई रिटर्न नहीं देता है, खासकर जब बाजार बहुत अस्थिर होता है. एक हायर चर्न एक संकेत है कि फंड अंडरपरफॉर्म कर रहा है.

एक लो टर्नओवर रेश्यो इंगित करता है कि फंड मैनेजर अपनी स्टॉक खरीद के बारे में आश्वस्त है और लंबी अवधि के लिए इसे होल्ड करता है. इसलिए, इस तरह के फंड में लेनदेन की लागत कम होगी. इंडेक्स फंड में बहुत कम पोर्टफोलियो टर्नओवर होता है क्योंकि फंड मैनेजर एक ही शेयर और एक ही रेश्यो में शेयर बाजार के इंडेक्स में निवेश करता है. चूंकि एएमसी के एक्टिवली मैनेज्ड फंडों की तुलना में इंडेक्स फंडों का एैसपेंस रेश्यो कम (10 से 50 आधार अंक) है, इसलिए रिटर्न लंबे समय में अधिक हो सकता है.

(लेखक: सैकत नियोगी)

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