मुख्य समाचार:

हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद संकट में एविएशन सेक्टर? Jet क्यों डूबी, जानिए एक्सपर्ट की जुबानी

2012 में किंगफिशर एयरलाइंस के बाद अब कुछ दिनों पहले 17 अप्रैल को जेट एयरवेज ने विमानों का परिचालन बंद कर दिया है.

Published: April 21, 2019 9:17 AM
jet airways, indigo, spice jet, airport charges, why jet airways sink, atf, air turbine fuel, aviation expert, why jet crashed, why jet airways crashed, why jet collapsed, why jet airways collapsed, जेट एयरवेज, इंडिगो, स्पाइस जेट, एटीएफ, एविएशन एक्सपर्ट,Jet Airways के फिर से आसमां में होने की संभावना बहुत कम. (Image-Reuters)

पिछले एक दशक में दो बड़ी एयरलाइन की सेवाएं बंद होने के बाद अब यह सवाल एक बार फिर सबकी जुबान पर है कि एयरलाइन सेक्टर में संकट की मुख्य वजह क्या है. यह स्थिति तब है जब यात्रियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है और कम समय में ही मंजिल पर पहुंच जाने की खूबी के कारण हवाई सफर को प्राथमिकता दी जा रही है. 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस के बाद अब कुछ दिनों पहले 17 अप्रैल को Jet Airways ने विमानों का परिचालन बंद कर दिया है. हालांकि उसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को पहले ही 18 अप्रैल तक बंद कर दिया था, अब घरेलू उड़ानें भी बंद हो गईं. फाइनेंशियल एक्सप्रेस ऑनलाइन की यह रिपोर्ट इसी मसले की पड़ताल कर रही है….

यह भी पढ़ें- कभी आसमान में बोलती थी जेट एयरवेज की तूती

 

महंगे ATF से बढ़ती परिचालन लागत

एविएशन एक्सपर्ट हर्षवर्धन ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण विमानन कंपनियों को जबरदस्त फायदा होना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लागत में खर्च हो जाता है. करीब 2.5 साल पहले एक किलोलीटर एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) की कीमत 45 हजार रुपये के करीब थी जोकि अब बढ़कर 72 हजार रुपये पहुंच गई.

एटीएफ विमानों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन है. विमान कंपनियों की लागत का करीब 40 फीसदी हिस्सा एटीएफ का होता है. इससे समझा जा सकता है कि एटीएफ की कीमत बढ़ाने से विमानन कंपनियों पर कितना भार पड़ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि 1 किलोलीटर एटीएफ सरकार को करीब 20 हजार रुपये में पड़ता है जो विमानन कंपनियों को करीब 2.5 गुना अधिक महंगा खरीदना होता है. हर्षवर्धन ने तीखे शब्दों में कहा कि अब या तो सरकार कमा ले या विमान कंपनियां.  जेट एयरवेज के कर्मियों के घर छोड़ने तक की आई नौबत

विदेशों से सस्ता ATF लेने का भी खास फायदा नहीं

भारत में एटीएफ महंगा होने के कारण कुछ विमान कंपनियां विदेशों से एटीएफ भरवाने लगीं. इससे उन्हें लागत में कमी आने का अनुमान था. हालांकि एक्सपर्ट हर्षवर्धन का कहना है कि रुपये में गिरावट के कारण इसका कुछ खास फायदा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि जितना कंपनियां विदेशों में सस्ते एटीएफ से बचाती हैं, वह कमजोर रुपये के कारण करीब-करीब खर्च हो जाता है क्योंकि विदेशों में उन्हें एटीएफ के लिए भारतीय रुपये की बजाय विदेशी मुद्रा में भुगतान करना होता है.

यह भी पढ़ें- जेट एयरवेज के 500 से अधिक कर्मियों को स्पाइस जेट में नौकरी

एयरपोर्ट चार्जेज और भारी टैक्स से भी बढ़ता बोझ

एटीएफ के अलावा जीएसटी, सर्विस, टैक्स सेस और एयरपोर्ट चार्जेज की वजह से भी कंपनियों पर भारी पड़ता है. एयरपोर्ट चार्जेज में यूजर डेवलपमेंट फी, पार्किंग चार्जेज और लैंडिंग चार्जेज जैसे शुल्क को शामिल किया जाता है. आमतौर पर धारणा है कि जब यूजर्स या यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो किसी भी प्रॉडक्ट का मूल्य कम किया जाता है लेकिन एयरपोर्ट के मामले में ऐसा नहीं है. राजधानी दिल्ली का एयरपोर्ट दुनिया के व्यस्ततम एयरपोर्ट में एक है लेकिन यहां भी शुल्क बहुत अधिक है. इसकी वजह से एयरलाइन कंपनियों की लागत बढ़ती है. हर्षवर्धन के मुताबिक पिछले पांच साल में इन शुल्कों में करीब 300 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

बाजार पर कब्जे की होड़ में प्राइस करेक्शन नहीं हो पाया

हर्षवर्धन का मानना है कि भारत में एयरलाइन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण प्राइस करेक्शन का समय नहीं मिल पाया. विमान कंपनियों ने बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अपनी लागत बढ़ाई. इसमें कंपनी के प्रसार ने और इजाफा किया. कंपनियों ने नए रूट्स पर उड़ाने शुरू कीं और कुछ कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू कीं. इसका फायदा उन्हें ट्रैफिक के रूप में मिला लेकिन उनका लागत भी बढ़ गया.

यह भी पढ़ें- एयर इंडिया प्रमुख की एसबीआई चेयरमैन से मुलाकात

जेट एयरवेज ही क्यों डूबी?

हर्षवर्धन से जब पूछा गया कि जेट एयरवेज ही क्यों डूबी जबकि अधिक लागत का इशू सभी विमान कंपनियों के साथ है तो उन्होंने इसके लिए एयर सहारा के अधिग्रहण को जिम्मेदार ठहराया. जेट एयरवेज ने जनवरी 2016 में एयर सहारा का 2200 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया और जेट एयरवेज ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू कीं. 2007 में इसे जेटलाइट के नाम से शुरू किया गया. हर्षवर्धन के मुताबिक एयर सहारा के अधिग्रहण के बाद से ही जेट एयरवेज की वित्तीय बदहाली की स्क्रिप्ट तैयार हो गई थी. 2012 में जेट एयरवेज डोमेस्टिक मार्केट शेयर के मामले में इंडिगो से पिछड़ गई और फिर पिछड़ती चली गई.

Jet के दोबारा उड़ान भरने की संभावना कम

हर्षवर्धन ने कहा कि उन्हें जेट एयरवेज के दोबारा आसमान में दिखने की संभावना बहुत कम दिख रही है. सबसे बड़ी समस्या तो जेट एयरवेज के कर्ज को लेकर है क्योंकि कोई भी जेट के कर्ज को भरने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. एक दिन पहले बैंकों के यूनियन ने पीएम मोदी से जेट एयरवेज के अधिग्रहण की सिफारिश की थी.

इस संभावना पर हर्षवर्धन ने कहा कि इसकी संभावना बहुत कम है क्योंकि सरकार ऐसा कर सकती तो वह किंगफिशर के मामले में भी ऐसा कर लेती. सरकार के पास पहले से ही एयर इंडिया का बोझ है. एयर इंडिया को पिछले पांच साल में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का लॉस हुआ है. उन्होंने कहा कि फिलहाल 10 मई तक का इंतजार कर लेना सही है. 10 मई तक एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के समूह ने जेट एयरवेज के बोली आमंत्रित की है.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद संकट में एविएशन सेक्टर? Jet क्यों डूबी, जानिए एक्सपर्ट की जुबानी

Go to Top