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IPO Investment: आईपीओ में निवेश से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान, नहीं होगा नुकसान

IPO Strategy: आईपीओ में निवेश का फैसला आसान नहीं हैं. कोई आईपीओ जितना आकर्षक हो सकता है, उससे जुड़ा रिस्क फैक्टर भी कुछ ऐसा है जिससे निवेशकों को सावधान रहना चाहिए.

Updated: Mar 12, 2021 12:47 PM
IPO Strategy how to select good ipo to subscribe know here the key factors to evaluate ipoपिछले साल 2020 में 15 बड़े आईपीओ में से 14 स्टॉक अभी अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं. कुछ स्टॉक्स ने 200-400 फीसदी का रिटर्न दिया है.

IPO Investment Strategy in India: पिछले साल 2020 में 15 बड़े आईपीओ में से 14 स्टॉक अभी अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं. कुछ स्टॉक्स ने तो 200-400 फीसदी का रिटर्न दिया है. इसके अलावा इनमें से 11 शेयरों ने अपने लिस्टिंग के दिन से ही निवेशकों को प्रॉफिट दे रहे हैं और 6 स्टॉक ने पहले दिन 70% से अधिक का रिटर्न दिया. इन सबके बावजूद आईपीओ में निवेश का फैसला आसान नहीं हैं. कोई आईपीओ जितना आकर्षक हो सकता है, उससे जुड़ा रिस्क फैक्टर भी कुछ ऐसा है जिससे निवेशकों को सावधान रहना चाहिए. बेहतर रिसर्च और क्यूआईबी की भागीदारी की मॉनिटरिंग जैसे प्रमुख कारकों के आधार पर IPO में निवेश का फैसला लिया जाना चाहिए ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके.

IPO में निवेश से पहले महत्वपूर्ण बातें

  • डिटेल्ड रिसर्च: आईपीओ तब जारी होता है जब कोई कंपनी पहली बार एक्सचेंज में लिस्टिंग की जाती है और इसके बाद ही कंपनियों को हर तिमाही अपने प्रमुख वित्तीय आंकड़ों की रिपोर्ट पेश करनी होती है. लिस्टिंग से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती है. आईपीओ के लिए कंपनी जो आंकड़े ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में देती है, उसे कंपनियां खुद ही फंड जुटाने के उद्देश्य से बनाती हैं. इस ड्राफ्ट को कोई निष्पक्ष बाजार इकाई नहीं तैयार करती है. ऐसे में कंपनी, उसके प्रमोटरों, उनके आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो), फाइनेंसिंग, प्रतियोगियों, मीडिया कवरेज और इसकी औद्योगिक गतिविधियों के बारे में अधिकतम जानकारी जुटाई जानी चाहिए.
  • वैल्यूशंस पर फोकस: एलॉटमेंट पाने के लिए अधिकतर निवेशक किसी कंपनी या उसके फंडामेंटल एनालिसिस के वैल्यूशन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. निवेशकों के पास डीएचआरपी के अलावा कंपनी के बारे में एनालिसिस करने के लिए कोई खास डेटा नहीं होता है. हालांकि इसके बावजूद जिस सेक्टर की कंपनी है, उस सेक्टक की अन्य कंपनियों के बारे में स्टडी कर वैल्यूशंस को लेकर एनालिसिस कर सकते हैं. इसमें सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब आईपीओ लाने वाली कंपनी अपनी तरह की पहली है तो कांपटीटिव एनालिसिस करना कठिन हो जाता है.
  • QIB भागीदारी की मॉनिटरिंग: आईपीओ लाने वाली कंपनी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) विशेष पिच बनाती है. क्यूआईबी सेबी-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, बैंक, म्यूचुअल फंड और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) होते हैं जो आमतौर पर दूसरों की ओर से धन का निवेश करते हैं. क्यूआईबी के निवेश से स्टॉक के भविष्य प्रदर्शन को आंका जाता है यानी कि क्यूआईबी ने कितना सब्सक्राइब किया है उससे अंदाजा लगाया जाता है कि स्टॉक्स निवेश के लिए कितना बेहतर है. हालांकि इस आंकड़े पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि क्यूआईबी का भी इसमें अपना नफा-नुकसान हो सकता है. पिछले साल 2020 में लिस्टेड कंपनियों में से एकमात्र शेयर जो इस समय अपने इश्यू प्राइज से नीचे कारोबार कर रहा है, क्यूआईबी की ओर से लगभग 10 गुना ओवरसब्स्क्राइब हुआ है.
  • DRHP की बेहतरीन स्टडी: आईपीओ लाने वाली सभी कंपनियों को डीआरचपी में अपने बिजनेस ऑपरेशंस, रेवेन्यूज, संपत्ति, लाइबिलिटीज, मार्केट लैंडस्केप के साथ-साथ निवेशकों से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह बताना होता है. निवेशकों को हर चीज के बारे में जानकारी देनी होती है ताकि वे सही फैसले ले सकें. डीआरएचपी की बेहतरीन स्टडी कर निवेश के फैसले लेने में मदद मिलेगी. कंपनी के पूर्व प्रदर्शन के साथ-साथ कंपनी अपने फंड का इस्तेमाल किस तरह करेगी, इस पर विशेष रूप से ध्यान दें. अगर कंपनी ने आरएंडडी या कारोबारी विस्तार का लक्ष्य रखा है तो यह एक अच्छा संकेत है क्योंकि इससे भविष्य में विकास संभव है. इसके विपरीत अगर कंपनी ने फंड के जरिए देनदारियों के भुगतान का लक्ष्य रखा है तो कंपनी की बैलेंस शीट और इसमें इसकी हिस्सेदारी का अधिक डिटेल्ड में स्टडी करना चाहिए.
  • तकनीक का फायदा: आईपीओ और इन-डेप्थ एनालिसिस में किसी भी गलती की आशंका को कम करने के लिए तकनीक का फायदा उठाए. भारत में ऐसे इंवेस्टमेंट रिकमंडेशेन इंजन्स हैं जो 100 करोड़ से अधिक डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करके बेंचमार्क नतीजों को सामने रखते हैं. ये आईपीओ से संबंधित सलाह भी देते हैं. इनसे यह मदद मिल सकती है कि किस आईपीओ में हिस्सा लेना चाहिए और किसमें नहीं.

 

Article By: Jyoti Roy, DVP-Equity Strategist, Angel Broking

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