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म्युचुअल फंड निवेशकों को रिस्क फ्री रिटर्न की तलाश, 70% निवेश सिर्फ लिक्विड फंड में किया

बीते 3 महीने के दौरान ज्यादा लालच से बचते हुए निवेशकों का फोकस शॉर्ट टर्म निवेश योजनाओं के साथ स्टेबल रिटर्न देने वाली स्कीम पर रहा है.

Published: July 27, 2020 4:33 PM
Mutual Fund, Debt Fund, investors keep focused on risk free return, Covid-19 crisis, liquid schemes witnessed inflows amounting to Rs 86,493 crore, equity oriented scheme, AMFI, mutual fund investors, invest in mutual fund, risk free scheme, credit riskजून तिमाही में डेट म्यूचुअल फंडों में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला है.

कोरोना संकट में अब निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. बीते 3 महीने के दौरान ज्यादा लालच से बचते हुए निवेशकों का फोकस शॉर्ट टर्म निवेश योजनाओं के साथ स्टेबल रिटर्न देने वाली स्कीम पर रहा है. इसी वजह से जून तिमाही में डेट म्यूचुअल फंडों में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला है. इससे पहले की तिमाही में जबर्दस्‍त निकासी देखने को मिली थी. फिलहाल जून तिमाही के दौरान बैंकिंग एंड पीएसयू फंडों समेत तमाम लिक्विड स्कीमों में निवेश के दम पर तमाम म्यूचुअल फंड स्कीम में 1.24 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है. ये आंकड़े एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड आफ इंडिया (Amfi) द्वारा दिए गए हैं.

कुल 1.24 लाख करोड़ निवेश

जून तिमाही में डेट स्कीम में 1.1 लाख करोड़ रुपये निवेश आया है. जबकि 20930 करोड़ रुपये आर्बिट्रॉज फंड और 11,730 करोड़ इक्विटी ओरिएंटेड स्कीम के जरिए निवेश आया है. इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंडों में मार्च तिमाही में 30,703 करोड़ रुपये का निवेश था. बाजार में अस्थिरता और नरम आर्थिक हालातों की वजह से निवेश कम हुआ है.

डेट फंड के हर सेग्मेंट में निवेश

डेट फंडों या नियमित आय की सिक्योरिटीज में निवेश करने वाली ज्यादातर श्रेणियों में शुद्ध रूप से निवेश देखने को मिला. हालांकि, क्रेडिट रिस्क, ओवरनाइट, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन, मीडियम ड्यूरेशन और डायनेमिक बॉन्ड फंडों से निकासी देखने को मिली. म्‍यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, डेट म्यूचुअल फंडों का एसेट्स बेस जून अंत 11.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च तिमाही के अंत में 11.5 लाख करोड़ रुपये था.

लिक्विड फंड पर बढ़ा फोकस

आंकड़ों के अनुसार, जून को खत्म तिमाही के दौरान डेट म्यूचुअल फंडों में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. इस दौरान नियमित आय वाले कुल निवेश का 80 फीसदी निवेश लिक्विड फंडों में किया गया. जून तिमाही में इन फंडों में 86,493 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला, जबकि मार्च तिमाही में इने 94,180 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.

बैंकिंग व पीएसयू

जून 2020 तिमाही में बैंकिंग एंड पीएसयू की श्रेणी को 20,912 करोड़ रुपये का निवेश मिला, जबकि इससे पहले के तीन महीनों में इनसे 66 करोड़ रुपये निकाले गए थे. इस श्रेणी को निवेश का सुरक्षित विकल्प माना जाता है. इन फंडों को अपने एसेट का कम से कम 80 फीसदी निवेश बैंकों, सरकारी सेक्टर के उद्यमों या सरकारी वित्तीय संस्थानों में लगाना होता. दूसरी तरफ, कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेशकों ने 18,738 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

क्रेडिट रिस्क फंडों से 25,905 करोड़ रुपये की निकास हुई. ये फंड AA-से कम रेटिंग वाले बांड में निवेश करते हैं. अप्रैल में इन फंडों से 19,239 करोड़ रुपये, मई में 5,173 करोड़ रुपये और जून में 1,494 करोड़ रुपये निकाले गए.

रिस्क नहीं लेना चाह रहे हैं निवेशक

मॉर्निंगस्टार इंडिया के सहायक निदेशक-प्रबंधन शोध, हिमांशु श्रीवास्त के अनुसार हालिया कर्ज संकट ने बाजार पर असर डाला है. इसलिए निवेशक अब सतर्क दिख रहे हैं. इसी वजह से क्रेडिट रिस्क फंडों से निकासी देखने को मिली है. जबकि जो फंड क्रेडिट रिस्क की तरफ नहीं जाते, उनमें निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है. इनमें मनी मार्केट, शॉर्ट ड्यूरेशन, कॉर्पोरेट बॉन्ड और बैंकिंग एंड पीएसयू बॉन्ड शामिल हैं.

Groww के को फाउंडर और COO हर्ष जैन ने कहा कि कई निवेशक अपना पैसा इस उतार-चढ़ाव में सोने में लगा रहे हैं. हालांकि, एए-रेटेड पेपर की तुलना में कम जोखिम वाले निवेश कोष में से 65 फीसदी निवेश करने वाले क्रेडिट रिस्क फंड में 25,905 करोड़ रुपये का प्रवाह देखा गया. इस तरह के फंडों ने अप्रैल में 19,239 करोड़ रुपये, मई में 5,173 करोड़ रुपये और जून में 1,494 करोड़ रुपये निकाले थे.

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