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रिस्क फ्री रिटर्न का ठिकाना बना लिक्विड फंड; फायदे, रिटर्न, ​जोखिम से टैक्स तक, जानें सब कुछ

Risk Free Return: जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

Published: July 29, 2020 8:27 AM
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कोरोना वायरस महामारी के दौर में म्यूचुअल फंड निवेशकों का रिटर्न भी बिगड़ा है. इक्विटी सेग्मेंट की ज्यादातर कटेगिरी में 1 से 3 साल के रिटर्न पर असर पड़ा है. कहां रिटर्न घट गया तो कहीं निगेटिव में चला गया. ऐसे में इस दौर में निवेशकों ने ज्यादा रिटर्न की लालच करने की बजाए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया है. उनका ज्यादातर निवेश अब फिक्स्ड इनकम सिक्युरिटीज में पैसा लगाने वाले डेट फंड में लग रहा है. इनमें भी निवेशकों की पहली पसंद लिक्विड फंड रहा है. जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

लिक्विड फंड में 86,493 करोड़ रुपये का निवेश

जून तिमाही की बात करें तो डेट फंड के हर सेग्मेंट में निवेश देखने को मिला है. म्‍यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, डेट म्यूचुअल फंडों का एसेट्स बेस जून अंत 11.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च तिमाही में 11.5 लाख करोड़ रुपये था. जून को खत्म तिमाही के दौरान डेट म्यूचुअल फंडों में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. इस दौरान नियमित आय वाले कुल निवेश का 80 फीसदी निवेश लिक्विड फंडों में किया गया. जून तिमाही में लिक्विड फंडों में कुल 86,493 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला, जबकि मार्च तिमाही में इने 94,180 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.

लिक्विड फंड्स क्या हैं?

लिक्विड फंड, डेट फंड का ही सबसेट है. लिक्विड फंड फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, जिसकी मेच्योरिटी अवधि बहुत कम होती है. इन सिक्योरिटीज की मेच्योरिटी 91 दिनों से कम या उसके बराबर होती है. ये गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, ट्रेजरी बिल्स, कमर्शियल पेपर्स और दूसरे डेट इंस्टू्मेंट्स में निवेश करते हैं. इनमें डेट फंड की दूसरी कटेगिरी की तुलना में जोखिम कम होता है, वहीं लिक्विडिटी अधिक. लिक्विड फंड का दूसरा नाम है कैश फंड और इसका मकसद ज्यादा लिक्विडिटी, कम जोखिम और स्थिर रिटर्न है.

रिटर्न

लिक्विड फंड बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग अकाउंट में निवेश की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता के कारण रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं. वहीं, इनकी अधिक लिक्विडिट उन्हें सेविंग अकाउंट का बेहतर विकल्प बनाती है. पिछले कुछ साल का औसत रिटर्न देखें तो लिक्विड फंड ने 7 फीसदी के आस पास रिटर्न दिया है, जो कि सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज 4 फीसदी और एफडी पर मिलने वाले ब्याज 6 से 6.5 फीसदी से अधिक है.

लिक्विड फंडों के लाभ

लिक्विड फंडों की मेच्योरिटी 91 दिनों की होती है.
निवेशकों को इनमें बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट के जैसा ब्याज मिलता है.
इन स्कीम में निवेश के अगले दिन पैसा निकाला जा सकता है, यानी यह सेविंग्स अकाउंट की तरह भी काम करता है.
इनमें लिक्विडिटी की समस्या नहीं है.
लिक्विड फंड सेफ माने जाते हैं क्योंकि ये शॉर्ट टर्म के लिए बॉन्डों में निवेश करते हैं.
लिक्विड फंडों पर ब्‍याज दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम सबसे कम होता है, क्‍योंकि प्राथमिक रूप से ये अल्‍पावधि की मेच्‍योरिटी वाले फिक्‍स्‍ड इनकम सिक्‍युरिटीज में निवेश करते हैं.

कैसे लगता है टैक्स?

एक प्रकार का डेट फंड होने की वजह से, लिक्विड फंड पर कैपिटल गेन के अनुसार टैक्स लगता है. टैक्स की दर होल्डिंग अवधि पर निर्भर करती है, यानी वह अवधि जिसके लिए निवेशक ने अपने पैसे को फंड में निवेश किया है.

अगर आप 3 साल के निवेश से पहले राशि निकाल लेते हैं, तो निवेशक पर आयकर स्लैब के अनुसार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लगेगा. उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक इससे 30,000 रुपये प्राप्त करता है, तो लिक्विड फंड में निवेश के माध्यम से 30,000 रुपये निवेशक के आयकर स्लैब में जोड़ दिए जाते हैं. उसी के अनुसार टैक्स लगाया जाता है. अगर कोई निवेशक 3 साल के कैपिटल गेन समेत निवेश वापस लेता है, तो इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगाया जाता है.

निवेश के रिस्क

लिक्विड फंड के मामले में रिस्क फैक्टर कम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये जिन सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, उनकी मेच्योरिटी बहुत कम होती है. इन फंड में स्थिर रिटर्न मिलता है, जबकि अन्य डेट फंड में ब्याज दर आउटलुक के हिसाब से उतार चढ़ाव रहता है. हालांकि उेसा नहीं है कि ये पूरी तरह से रिस्क फ्री हैं. अंतिम पेमेंट पर डिफाल्ट रूप से डेट सिक्योरिटी जारी करने की संभावना हमेशा बनी रहती है.

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