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Infosys: इंफोसिस 14 अप्रैल को करेगी शेयर बॉयबैक पर विचार, इसी दिन आएंगे तिमाही नतीजे

Infosys Share Buyback: देश की आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी इन्फोसिस 14 अप्रैल को होने वाली अपनी मीटिंग में फुली पेड-अप इक्विटी शेयरों के बॉयबैक पर विचार करेगी.

April 12, 2021 9:06 AM
Infosys Share BuybackInfosys Share Buyback: देश की आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी इन्फोसिस 14 अप्रैल को होने वाली अपनी मीटिंग में फुली पेड-अप इक्विटी शेयरों के बॉयबैक पर विचार करेगी.

Infosys Share Buyback: देश की आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी इन्फोसिस 14 अप्रैल को होने वाली अपनी मीटिंग में फुली पेड-अप इक्विटी शेयरों के बॉयबैक पर विचार करेगी. कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गई है. बॉयबैक का यह प्रस्ताव मार्केट रेगुलेटर सेबी के बॉय बैक ऑफ सिक्योरिटीज रेगुलेशन 2018 के तहत लाया जा रहा है. बता दें कि इन्फोसिस के मार्च तिमाही के नतीजे 14 अप्रैल को आने वाले हैं.

पिछली बार 8260 करोड़ का बायबैक

बेंगलुरु बेस्ड कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 13-14 अप्रैल, 2021 को होने वाली है. इसमें 31 मार्च, 2021 को समाप्त तिमाही और वित्त वर्ष में कंपनी और उसकी अनुषंगी इकाइयों के वित्तीय परिणाम को मंजूरी और उसे रेकॉर्ड में लिया जाएगा. इससे पहले, इन्फोसिस ने अगस्त 2019 में 8260 करोड़ रुपये मूल्य के 11.05 करोड़ शेयर का बायबैक किया था. कंपनी का पहला शेयर बायबैक दिसंबर 2017 में 13,000 करोड़ रुपये का मूल्य का था.

6 लाख मार्केट कैप वाली कंपनी

पिछले हफ्ते इंफोसिस का मार्केट कैप 23,625.36 करोड़ रुपये बढ़कर 6,13,854.71 करोड़ रुपये पर आ गया. 9 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में इंफोसिस ऐसी चौथी भारतीय कंपनी बनी थी, जिसने मार्केट कैप के लिहाज से 6 लाख करोड़ रुपये का अंतर पार किया था. इंफोसिस के शेयरों में पिछले एक साल में 141 फीसदी की ग्रोथ रही है. जबकि 2021 में यानी इस साल अब तक इस शेयर में 12 फीसदी की ग्रोथ रही है.

क्या होता है शेयर बायबैक

कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. आप इसे आईपीओ का उलट भी मान सकते हैं. बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है. बायबैक के लिए मुख्यत: दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का इस्तेमाल किया जाता है.

कंपनियां क्यों करती हैं बायबैक

इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नकदी का होना है. कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता है. इससे यह माना जाता है कि कंपनी अपने नकदी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. शेयर बायबैक के जरिए कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है. कई बार कंपनी को यह लगता है कि उसके शेयर की कीमत कम है (अंडरवैल्यूड) तो वह बायबैक के जरिए उसे बढ़ाने की कोशिश करती है.

क्या है प्रक्रिया

सबसे पहले कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी देता है. इसके बाद कंपनी बायबैक के लिए कार्यक्रम का एलान करती है. इसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि का जिक्र होता है. रिकॉर्ड डेट का मतलब यह है कि उस दिन तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे.

बायबैक का शेयर पर असर

बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. इससे कंपनी के कारोबार में कोई बदलाव नहीं आता है.

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