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इंफोसिस: हर स्टॉक पर 25% रिटर्न पाने का मौका, क्या 9200 करोड़ के शेयर बायबैक में लेना चाहिए हिस्सा?

Infosys Share Buyback: देश की दूसरी सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी इंफोसिस के शेयर बॉय बैक की डिटेल आ गई है.

Updated: Apr 15, 2021 8:20 AM
Infosys Share BuybackInfosys Share Buyback : इंफोसिस के 9200 करोड़ का शेयर बॉयबैक आफर को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है.

Infosys Share Buyback: देश की दूसरी सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी इंफोसिस के शेयर बॉय बैक की डिटेल आ गई है. इंफोसिस के 9200 करोड़ का शेयर बॉयबैक आफर को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है. इंफोसिस शेयर बायबैक प्रोग्राम के तहत 5,25,71,428 इक्विटी शेयर 1750 रुपये के भाव पर खरीदेगी. शेयर का करंट प्राइस करीब 1400 रुपये है. इस लिहाज से मौजूदा भाव पर शेयर बायबैक में हिस्सा लेने पर निवेशकों को 25 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है. 14 अप्रैल को तिमाही नतीजों के एलान के दौरान कंपनी ने शेयर बॉयबैक के बारे में भी एलान किया है.

इंफोसिस का तीसरा बॉयबैक

ये तीसरी बार है जब इंफोसिस अपने शेयर बायबैक कर रही है. इससे पहले, इंफोसिस ने अगस्त 2019 में 8,260 करोड़ रुपये मूल्य के 11.05 करोड़ शेयर की पुनर्खरीद की थी. कंपनी का पहला शेयर बायबैक दिसंबर 2017 में 13,000 करोड़ रुपये का मूल्य का था. इसमें कंपनी ने 1,150 रुपये प्रति इक्विटी के भाव पर 11.3 करोड़ शेयर बायबैक किया था.

शेयर धारक क्या करें

एक्सपर्ट का मानना है कि जिन निवेशकों का इंफोसिस में निवेश का लक्ष्य छोटी अवधि का है, उनके लिए शेयर बायबैक आफर रिटर्न कमाने का अच्छा मौका है. वैसे भी बीते 1 साल में इंफोसिस के शेयरों में 118 फीसदी के करीब तेजी आ चुकी है. ऐसे में अभी शेयर में बहुत ज्यादा बढ़त की गुंजाइश कम है. वैसे भी नतीजों के बाद ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि आगे कुछ दिनों तक शेयर में लिमिटेड तेजी देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने शेयर में 1600 रुपये का लक्ष्य दिया है तो एमके ग्लोबल ने न्यूट्रल रेटिंग दी है. हालांकि अगर निवेश का लक्ष्य लंबी अवधि का है तो उनमें निवेश बनाए रखें. लंबी अवधि में शेयर और बेहतर रिटर्न दे सकता है.

क्या होता है शेयर बायबैक

कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. आप इसे आईपीओ का उलट भी मान सकते हैं. बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है. बायबैक के लिए मुख्यत: दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का इस्तेमाल किया जाता है.

बायबैक का शेयर पर असर

बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. इससे कंपनी के कारोबार में कोई बदलाव नहीं आता है.

कंपनियां क्यों करती हैं बायबैक

इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नकदी का होना है. कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता है. इससे यह माना जाता है कि कंपनी अपने नकदी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. शेयर बायबैक के जरिए कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है. कई बार कंपनी को यह लगता है कि उसके शेयर की कीमत कम है (अंडरवैल्यूड) तो वह बायबैक के जरिए उसे बढ़ाने की कोशिश करती है.

क्या है प्रक्रिया

सबसे पहले कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी देता है. इसके बाद कंपनी बायबैक के लिए कार्यक्रम का एलान करती है. इसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि का जिक्र होता है. रिकॉर्ड डेट का मतलब यह है कि उस दिन तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे. बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. इससे कंपनी के कारोबार में कोई बदलाव नहीं आता है.

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