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जुलाई में सर्विस सेक्टर में लगातार 5वें महीने गिरावट, रोजगार के अवसर घटे: सर्वे

PMI का 50 अंक से ऊपर रहना सेक्टर में विस्तार को बताता है जबकि 50 अंक से नीचे रहने पर यह गिरावट को दर्शाता है.

August 5, 2020 4:14 PM
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देश की अर्थव्यवस्था में करीब 60 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले सर्विस सेक्टर की सुस्ती बरकरार है. कोरोनावायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में जुलाई माह में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई. बुधवार को जारी एक सर्वेक्षण में यह कहा गया है. आईएचएस मार्किट इंडिया सर्विसिज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जुलाई माह में 34.2 अंक पर रहा. हालांकि, जून के 33.7 अंक के मुकाबले यह मामूली सुधार में रहा.

कोरोनावायरस के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में लगने वाले लॉकडाउन ने कंपनियों को आपरेशंस में कमी लाने और कर्मचारियों की संख्या में कटौती रखने को मजबूर किया जिससे सर्विस सेक्टर में गिरावट बनी रही. आईएचएस मार्किट इंडिया के सर्विस सेक्टर पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के मुताबिक जुलाई में सूचकांक में मामूली वृद्धि होने के बावजूद सर्विस सेक्टर में लगातार पांचवें माह संकुचन रहा. पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना सेक्टर में विस्तार को बताता है जबकि 50 अंक से नीचे रहने पर यह गिरावट को दर्शाता है.

आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री लेविस कूपर ने कहा, ‘‘इतने लंबे समय तक ऐसी बड़ी गिरावट में किसी तरह का व्यापक सुधार आने में सालों नहीं पर कई महीने लग सकते हैं. आईएचएस मार्किट के अनुमान को देखते हुए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मार्च 2021 में समाप्त होने वाले वर्ष में 6 फीसदी से अधिक की गिरावट का संकेत मिलता है. सर्वेक्षण में भाग लेने वालों ने कोविड- 19 महामारी के कारण समय समय पर लगने वाले लॉकडाउन संबंधी उपायों, कमजोर मांग की स्थिति और कंपनियों में कामकाज का अस्थाई तौर पर निलंबन को सर्विस सेक्टर की गतिविधियों और आर्डर बुक दोनों में आई गिरावट से जोड़ा है.

रोजगार के अवसर घटे

कुल मिलाकर सकल मांग की स्थिति काफी दबी हुई है, इससे सर्विस प्रोवाइडर्स ने जुलाई में रोजगारों में और कटौती की है. रोजगार में कमी की रफ्तार तेज रही है. भागीदारों ने यूजर्स की ओर से कमजोर मांग और व्यवसायों के अस्थाई तौर पर बंद होने को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.

सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दोनों का संयोजित पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जून के 37.8 से घटकर जुलाई में 37.2 अंक पर आ गया. इससे जुलाई माह के दौरान निजी क्षेत्र के कारोबार और गतिविधियों में और तेज संकुचन की तरफ इशारा मिलता है. इस बीच रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक मंगलवार को शुरू हो गई. छह सदस्यों वाली यह समिति 6 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी.

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