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लॉकडाउन: 40 दिन में रिटेल कारोबार को लगा 5.50 लाख करोड़ का झटका, 20% ट्रेडर्स बंद कर सकते हैं बिजनेस

यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कही है.

May 5, 2020 7:18 PM
Indian retail has lost a whopping 5.50 Lakh Crore rupee in the last 40 days of coronavirus lockdown, at least 20 pc of Indian retailers likely to wind up their businesses: CAITImage: PTI

24 मार्च को देश में लॉकडाउन लागू करने से लेकर 30 अप्रैल 2020 तक भारतीय खुदरा व्यापार को लगभग 5.50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. व्यापार न होने से कम से कम 20 फीसदी व्यापारियों और उन पर निर्भर लगभग 10 फीसदी अन्य व्यापारियों के अपना व्यापार बंद करने की संभावना है. यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कही है.

लॉकडाउन ने भारतीय खुदरा विक्रेताओं के अगले कुछ महीनों के कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. इसी के कारण कैट ने 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से आग्रह किया कि सरकार देश के व्यापारिक समुदाय को संभालने और व्यापारियों को उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पैकेज दे, जिससे देश के व्यापार को इस कठिन समय से उबारा जा सके.

15,000 करोड़ रु रोज का कारोबार करते हैं रिटेलर्स

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि करोना ने भारतीय खुदरा व्यापार में बहुत बड़ी अपूरणीय सेंध लगाई है. इसका पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भारतीय रिटेलर्स लगभग 15,000 करोड़ का दैनिक कारोबार करते हैं और देश में 40 दिनों से अधिक समय से तालाबंदी चल रही है. इसका मतलब है कि देश के 7 करोड़ व्यापारियो के कारोबार को 5.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान हुआ है. इन 7 करोड़ व्यापारियों में से लगभग 1.5 करोड़ व्यापारियों को कुछ महीनों में ही अपने व्यापार को स्थायी रूप से बंद करना होगा. लगभग 75 लाख ऐसे व्यापारी जो इन 1.5 करोड़ व्यापारियों पर निर्भर हैं, उन्हें भी अपना व्यापार बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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2.5 करोड़ व्यापारी बेहद छोटे लेवल के

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि भारत में कम से कम 2.5 करोड़ व्यापारी बेहद सूक्ष्म और छोटे हैं, जिनके पास इस गंभीर आर्थिक तबाही से बचने का कोई रास्ता नहीं है. उनके पास ऐसे परिदृश्य में अपने व्यापार के संचालन हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं है. एक तरफ उन्हें वेतन, किराया, अन्य मासिक खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है और दूसरी ओर उन्हें उपभोक्ताओं की डिस्पोजेबल आय में तेज गिरावट का सामना करने के साथ-साथ सख्त सामाजिक दूरता मानदंडों के साथ व्यवहार करना होगा. ये व्यापार को सामान्य स्थिति में नहीं आने देंगे और ऐसा कम से कम आगामी 6-9 महीने तक चलेगा. भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रही थी और पूरे क्षेत्र में मांग में भारी गिरावट आई थी, लेकिन इस घातक बीमारी ने भारत के रिटेल व्यापार को पूरी तरह तबाह कर दिया है.

दिशानिर्देशों के पालन में राज्य बरत रहे कोताही

कैट ने केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की और कहा कि सरकारों ने गैर-कॉर्पोरेट क्षेत्र को नहीं संभाला है. यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 40% से अधिक का योगदान देता है और राष्ट्र के कुल कार्यबल का लगभग एक तिहाई है. इसके बजाय सरकार ने आदेश दिया है कि सभी व्यवसायों को अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करना होगा, बैंक ब्याज वसूलते रहेंगे और मकान मालिक किराया मांगते रहेंगे. यह पूरी तरह से एकतरफा है, जहां सरकार केवल व्यापारियों से उम्मीद करती है लेकिन आज तक व्यापारियों के व्यापार की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इसके कारण देशभर के व्यापारी बेहद हताश और निराश हैं.

बयान में आगे कहा गया कि गृह मंत्रालय द्वारा विभिन्न अधिसूचनाओं का जमीनी स्तर पर ठीक तरह से पालन नहीं हुआ है. दिशानिर्देशों को लागू करने में राज्यों ने कोताही बरती है. जिला स्तर पर राज्य सरकारें और अधिकारी अपनी-अपनी धुन गा रहे हैं. दिशानिर्देशों में इस अस्पष्टता ने भारतीय खुदरा विक्रेताओं के संकट को और बढ़ा दिया है. भारतीय खुदरा क्षेत्र वस्तुतः वेंटीलेटर पर है और सरकार के तत्काल हस्तक्षेप न करने से इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा.

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