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अब जबरदस्ती देसी तंदूर में भुनेगा अमेरिकी चिकन, जानिए क्यों

आपको शायद हैरानी हो मगर भारत और अमेरिका के बीच जंग छिड़ी हुई थी और वो जंग थी चिकन लेगपीस को लेकर। हैरान मत होइए, ये हकीकत है, भारत औऱ अमेरिका के बीच लेगपीस को लेकर एक जंग चल रही थी।

Updated: Apr 12, 2018 3:27 PM
वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन, डब्लूटीओ, भारत, अमेरिकाAPEDA के मुताबिक 2016-17 में भारत में 3.1 टन का मीट उत्पादन हुआ।

आपको शायद हैरानी हो मगर भारत और अमेरिका के बीच जंग  छिड़ी हुई थी और वो जंग थी चिकन लेगपीस को लेकर। हैरान मत होइए, ये हकीकत है, भारत औऱ अमेरिका के बीच लेगपीस को लेकर एक जंग चल रही थी। जिसमें अमेरिका को जीत हासिल हुई, और भारत को हार का सामना करना पड़ा है। इस चिकन वॉर की कहानी को समझने के लिए आपको थोड़ा सा फ्लैशबैक में जाना पड़ेगा।

क्या है जंग ए चिकन 

अमेरिका ने डब्लूटीओ यानी वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में जाकर भारत के खिलाफ शिकायत की, कि वो अमेरिकी चिकन को भारत में इम्पोर्ट नहीं करता है। यही नहीं अमेरिका ने डब्लूटीओ से ये कहते हुए भारत पर कड़ी कार्यवाई की मांग कर डाली की भारत डब्लूटीओ की नियमावली का पालन नहीं कर रहा है। जिसके बाद भारत ने जवाब में डब्लूटीओ में अपनी बात रखी, इसके  बाद मामला डीएसबी में गया, मगर अंत में फैसला अमेरिका के हक में सुनाया गया। अब सवाल ये उठता है कि अमेरिका भारत को अपना चिकन खिलाने पर क्यों आमदा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आगे पढ़े।

भारत को जबरदस्ती अपने चिकन लेगपीस क्यों खिलाना चाहता है अमेरिका?

दरअसल अमेरिका में भारत से उलट चिन लेग नहीं चिकन ब्रेस्ट ज्यादा खाना पसंद करते हैं। ऐसे में वहां के चिकनलेग पीस वहां पर वेस्ट होते हैं। चूंकी भारत में लोग लेगपीस के शौकीन है और यहां लेगपीस की खपत ज्यादा है, ये देखते हुए अमेरिका अपना वेस्ट चिकन लेगपीस भारत में बेंचना चाहता था। अब सवाल ये है कि आखिर भारी खपत के बावजूद भारत अमेरिका से चिकन लेगपीस क्यूं नहीं खरीदना चाहता? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको आगे पढ़ना होगा।

इसलिए अमेरिकी चिकन लेगपीस नहीं खरीदना चाहता है भारत?

इसी साल फरवरी में ऑल इंडिया ब्रॉइलर कॉर्डिनेशन कमेटी के संयोजक वसंत कुमार ने कहा था कि अमेरिका से चिकन लेग पीस इम्पोर्ट करने पर इस सेगमेंट में भारतीय लोकल मार्केट पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। भारतीय लोकल मार्केट इस इम्पोर्ट के चलते 25 फीसदी तक प्रभावित होगा। यही  नहीं इसके चलते भुट्टे और सोयाबीन मार्केट पर भी 40 फीसदी का प्रभाव पड़ेगा क्योंकि मुर्गी पालन में इन दोनों चीजों की खपत बहुत ज्यादा है।

हर साल इतना चिकन मीट उ्पादन करता है भारत

APEDA के मुताबिक 2016-17 में भारत में 3.1 टन का मीट उत्पादन हुआ। 2017-18 में भारत में 2.9 टन मीट उत्पादन हुआ। वहीं 2011-12 में भारत में 2.3 टन चिकन मीट का उत्पादन हुआ। भारत में सबसे ज्यादा चिकन मीट का उत्पादन महाराष्ट्र, तमिल नाडू, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश में होता है। ये राज्य मिलकर 60 फीसदी उत्पादन करते हैं।

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