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Gold Hallmarking: गोल्ड हॉलमार्किंग के चलते त्योहारों पर नहीं खरीद पाएंगे सोने के गहने? ज्वैलर्स के मुताबिक ये दिक्कतें आ रही हैं सामने

Gold Hallmarking: हॉलमार्किंग के चलते अधिकतर ज्वैलर्स का मानना है कि फेस्टिव सीजन में इन नियमों के चलते मांग के मुताबिक आपूर्ति होना संभव नहीं है. इसके अलावा छोटे ज्वैलर्स की चिंता यह है कि इससे उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

Updated: Aug 18, 2021 2:15 PM
India Gold Supply for Festivals May Stumble on New Purity Rule gold hallmarking may affect supply over demand22 कैरेट का हॉलमार्किंग नंबर 22k916 है. (Image- PTI)

Gold Hallmarking: गोल्ड ज्वैलरी और कलात्मक चीजों में धोखाधड़ी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने हॉलमार्किंग को 16 जून से ही अनिवार्य कर दिया है. हालांकि अगले महीने सितंबर से बिना हॉलमार्किंग वाले गहनों की बिक्री पर ज्वैलर्स को जुर्माना चुकाना पड़ सकता है. हॉलमार्किंग के चलते अधिकतर ज्वैलर्स का मानना है कि फेस्टिव सीजन में इन नियमों के चलते मांग के मुताबिक आपूर्ति होना संभव नहीं है. इसके अलावा छोटे ज्वैलर्स की चिंता यह है कि इससे उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक सोने की खपत भारत में होती है. भारत में शादी-विवाह के अतिरिक्त फेस्टिव सीजन में भी सोना खरीदने की परंपरा रही है. हालांकि इस सीजन में अब ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग के नियमों के मुताबिक डिमांड के मुताबिक सप्लाई न पूरा कर पाने का डर सता रहा है. गोल्ड हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का प्रमाणपत्र है और अब तक यह अनिवार्य नहीं था.

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2016 की धारा 29 के तहत हॉलमार्किंग नियमों का उल्लंघन करने पर एक साल की जेल की सजा हो सकती है या न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. जुर्माने की रकम बेचे गए गहनों की कीमत की पांच गुना से कम नहीं होनी चाहिए. हालांकि इस महीने अगस्त के अंत तक कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी . यह समय गोल्ड ज्वैलरी निर्माताओं, वितरकों और डीलरों के लिए हॉलमार्किंग की पुख्ता तैयारी के लिए दिया गया है.

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15 दिनों में स्थिति न सुधरी तो दिवाली-दशहरा में सप्लाई प्रभावित

अगले महीने से बिना हॉलमार्किंग के गहने बेचने पर ज्वैलर्स को जुर्माना भरना पड़ सकता है और हॉलमार्किंग में देरी हो रही है. ऐसे में अगले महीने शुरू हो रहे पीक फेस्टिवल सीजन के दौरान मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो पाएगी. ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के प्रमुख आशीष पेथे के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती हॉलमार्किंग सेंटर्स की कमी को लेकर है. देश में पर्याप्त संख्या में हॉलमार्किंग सेंटर्स नहीं हैं और फेस्टिव सीजन में भारी डिमांड के चलते इसमें लंबा समय लग जा रहा है. पेथे के मुताबिक कई केंद्र तो बाद में आने को कह रहे हैं क्योंकि उनके पास पहले से ही बहुत ऑर्डर पेंडिंग में हैं. ऐसे में अगर अगले पंद्रह दिनों में स्थिति में सुधार नहीं होता है तो त्यौहारों के वक्त मांग के मुताबिक सप्लाई में दिक्कत आएगी.

छोटे दुकानदारों को अधिक दिक्कतें

चांदनी चौक स्थित रतन चंद ज्वाला नाथ ज्वैलर्स के मुताबिक हॉलमार्किंग के नए नियमों से सबसे अधिक दिक्कत छोटे दुकानदारों को होगी क्योंकि हॉलमार्किंग के लिए कम से कम 40 पीसेज ले जाने हैं और छोटे दुकानदार के पास एक साथ इतने ऑर्डर होने जरूरी नहीं हैं. इसके अलावा छोटे शहरों में हॉलमार्किंग सेंटर्स नहीं है तो दूसरे शहर में ज्वैलर्स को जाना पड़ेगा जिससे उनका कारोबार प्रभावित होगा. रतन चंद ज्वाला नाथ ज्वैलर्स के मुताबिक इस समय करीब 6 लाख पीस हॉलमार्किंग के लिए पेंडिंग हैं तो ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि फेस्टिव डिमांड को पूरा करने में कितनी दिक्कतें आएंगी. उन्होंने सिक्योरिटी का भी मसला उठाया और ऑनलाइन प्रॉसेस पर भी सवाल उठाए. ऑनलाइन प्रॉसेस होने के चलते जहां इंटरनेट की बेहतर सुविधा नहीं है, वहां के ज्वैलर्स को दिक्कतें होंगी और ऑनलाइन अपने पास मौजूद सभी ज्वैलरी की पूरी डिटेल्स डालना ज्वैलर्स के लिए असुरक्षित है. रतन चंद ज्वाला नाथ ज्वैलर्स के मुताबिक सरकार को इन नियमों को अनिवार्य किए जाने की बजाय इसमें थोड़ी राहत दी जानी चाहिए.

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इस तरह देखें हॉलमार्किंग

जब भी किसी ज्वैलर्स के पास जाएं तो यह देखें कि उसका BIS (Bureau of Indian Standards) रजिस्ट्रेशन है या नहीं. अलग-अलग कैरेट के हिसाब से हॉलमार्किंग का नंबर अलग-अलग होता है. जैसे 22 कैरेट का हॉलमार्किंग नंबर 22k916 है. ज्वैलर से बिल जरूर लें. BIS गाइडलाइंस के मुताबिक अगर ज्वैलर्स जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करता है तो उसे शुद्धता की कमी के बराबर कीमत की दोगुनी कीमत और टेस्टिंग चार्ज देना होगा. गोल्ड मैनेजमेंट कंपनी Augmont के डायरेक्टर केतन कोठारी के मुताबिक ज्वैलर्स के लिए यह अनिवार्य है कि वह हर गोल्ड आइटम पर हॉलमार्किंग और कैरेट की स्टैंपिंग करे. अगर ज्वैलरी पर यह नहीं दिख रही है तो ज्वैलर्स को मैग्नीफाइंग लेंस की पावर दस गुना बढ़ा कर इसे स्पष्ट करने के लिए कहें. 14,18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट पर हॉलमार्किंग की जा रही है.

सोने के इन सामानों पर हॉलमार्किंग जरूरी नहीं

  • जिन जौहरियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये तक का है, उन्हें अनिवार्य हॉलमार्किंग से जुड़े प्रावधान से छूट दी गई है.
  • सरकार की व्यापारिक नीति के मुताबिक सरकार द्वारा मंजूर की हुई बी2बी डोमेस्टिक एग्जिबिशंस और इंटरनेशनल एग्जिबिशंस के लिए ज्वैलरी के निर्यात और री-इंपोर्ट पर हॉलमार्किंग से जुड़ा प्रावधान नहीं लागू होगा.
  • सोने की घड़ियों, फाउंटेन पेन्स और कुंदन, पोल्की व जड़ाऊ जैसे गोल्ड आइटम्स के लिए हॉलमार्किंग का प्रावधान नहीं लागू होगा.
  • ज्वैलर्स बिना हॉलमार्क वाले सोने के पुराने गहने खरीद सकेंगे और अगर संभव हो सका तो उसे गलाकर नया गहना बनाने के बाद उसकी हॉलमार्किंग कर सकेंगे.

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