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Independence Day 2020: चीन को 500 करोड़ का झटका! इस साल नहीं हुआ चीनी मांझे का आयात

Independence Day 2020: इस बार भारत और चीन के बीच तनाव को दिल्ली समेत देशभर के व्यापारी चीनी मांझे का बहिष्कार कर रहे हैं.

Updated: Aug 13, 2020 10:44 AM
Independence Day 2020 sellers to bycott chinese manjha this year business of kites down due to coronavirus pandemicIndependence Day 2020: इस बार भारत और चीन के बीच तनाव को दिल्ली समेत देशभर के व्यापारी चीनी मांझे का बहिष्कार कर रहे हैं. (File Pic)

Independence Day 2020: 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में पतंगबाजी का प्रचलन है. इसके चलते देश में पतंग और मांझे का करोड़ों में सालाना कारोबार होता है. इस बार भारत और चीन के बीच तनाव को दिल्ली समेत देशभर के व्यापारी चीनी मांझे का बहिष्कार कर रहे हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक इस बाच चीनी मांझा पूरे भारत में नहीं बिकेगा. हालांकि, दिल्ली में चीनी मांझा साल 2017 से बैन है. इस बार बाजार में चीनी मांझे पर दिल्ली पुलिस भी अपनी कड़ी नजर रखे हुए है. वहीं, कोरोना महामारी की वजह से इस बार पतंगें बेचने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनकी बिक्री में गिरावट हुई है. इस साल दिल्ली और देश के व्यापारियों ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के CAIT के अभियान के तहत भारतीय सामान अपनाने पर तेजी से अमल करना शुरू कर दिया है. उनके मुताबिक देश में चीन से लगभग 500 करोड़ रुपये का मांझा हर साल आता है जो इस बार आयात नहीं हुआ.

इस साल बाजार में चीनी मांझा नहीं मौजूद

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस बार देश के व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए दिल्ली के व्यापारी भी पतंगबाजी के लिए चीनी मांझा नहीं बेचेंगे और उसकी जगह भारतीय मांझा और सद्दी ही बेची जाएगी. उनके मुताबिक देश में बरेली, मुरादाबाद का मांझा चीन के मांझे के मुकाबले ज्यादा बेहतर है और इस साल से हर बार देश में बना मांझा ही इस्तेमाल होगा. उन्होंने कहा कि एक मोटे अनुमान के अनुसार दिल्ली में प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये के मांझे की बिक्री 15 अगस्त और रक्षा बंधन के आस पास होती है जिसमें से लगभग 80 करोड़ रुपये का मांझा पिछले सालों में चीन से दिल्ली आता था जिसकी उत्तर भारत के राज्यों में बिक्री होती थी लेकिन इस बार चीनी मांझा बाजार में नहीं है.

खंडेलवाल के मुताबिक वास्तव में पतंगबाजी भारत में सदियों से चली आ रही है और यह एक तरह से भारत का ही खेल है. उन्होंने कहा कि चीन भारत के हर त्योहार पर इस्तेमाल होने वाले हर सामान पर अपना कब्जा कर भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनाने की नीति पर एक लंबे समय से काम कर रहा है, उसी सिलसिले में मांझे पर भी उसने पिछले सालों से अपना एकाधिकार बनाने की कोशिश की थी.

चीनी मांझा बेचने वालों पर एक्शन

दिल्ली में पुलिस भी चीनी मांझा बेचने वालों पर कार्रवाई कर रही रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने राजधानी के चांद मोहल्ला में 10 से ज्यादा दुकानों पर छापेमारी की है जो चीनी और बरेली के मांझे को बेच रहे थे. बता दें कि दिल्ली सरकार ने 2017 में राजधानी में कई हादसों के बाद एक नोटिफिकेशन जारी करके चीनी और बरेली के मांझे पर बैन लगा दिया था. पिछले साल छह लोग जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं, वह मांझे की वजह से शिकार होकर मौत हो गई है.

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पतंग बेचने वाले दुकानदारों को मुश्किल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से पता चलता है कि पतंग बेचने वाले दुकानदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 31 साल की उम्र के अश्विनी राजपूत एक दशक से पतंगें बेच रहे हैं. लेकिन इस साल वे केवल 5 से 10 पतंग प्रति दिन ही बेच पा रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि पतंग के लिए ज्यादातर कच्चा माल यूपी और हरियाणा से आता है. लॉकडाउन की वजह से फैक्ट्रियां बंद थीं और पुलिस ने माल के परिवहन को इजाजत नहीं दी.

उन्होंने बताया कि अब उन्होंने लाल कुआं के पास एक छोटा स्टॉल खोला है क्योंकि वे दुकान के किराये को नहीं जुटा सकेंगे. वे पिछले साल रोजाना 500 पतंगें बेचते थे. लेकिन अब लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे, तो वे पतंगें कैसे बेचेंगे.

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