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आर्सेलर मित्तल की होगी एस्सार स्टील! SC ने NCLAT का आदेश किया खारिज, फैसले से बैंकों की लगी ‘लॉटरी’

Essar Steel Insolvency: एस्सार स्टील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बैकों को बड़ी राहत दी है.

November 15, 2019 1:01 PM
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Essar Steel Insolvency: एस्सार स्टील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बैकों को बड़ी राहत दी है. कर्ज में डूबी एस्सार स्टील के अधिग्रहण के लिये आर्सेलर मित्तल की 42,000 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी देने के राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का आदेश शुक्रवार को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (COC) के फैसले को सही ठहराया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) से मिलने वाली 42,000 करोड़ रुपये की रकम COC के आदेश के मुताबिक ही बंटेगी. इस फैसले से जहां आर्सेलर मित्तल के लिए एस्सार स्टील के अधिग्रहण का रास्ता साफ हुआ, वहीं बैंकों के कर्ज की वसूली भी हो पाएगी.

फिलहाल आर्सेलर मित्तल ने देश के शीर्ष न्यायालय से एस्सार स्टील के 580 करोड़ डॉलर की बोली गलाने की मंजूरी जीत ली है. इसी के साथ ही कोर्ट ने लक्ष्मी मित्तल के लिए दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील मार्केट में एंट्री का रास्ता भी साफ कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आर्सेलर को एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड के लिए भुगतान करने की अनुमति दे दी है.

बैंकों के 90% कर्ज की वसूली

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एस्सार स्टील के टेकओवर का रास्ता साफ हो गया है. एस्सार स्टील इस फैसले के बाद आर्सेलर मित्तल की हो जाएगी. वहीं, इस फैसले से बैंकों को बड़ी राहत मिलेगी और बैंकों की 90 फीसदी तक कर्ज वसूली हो पाएगी.

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने NCLAT का आदेश रद्द किया. इस आदेश के तहत न्यायाधिकरण ने आर्सेलर मित्तल की बोली की रकम के बंटवारे में वित्तीय कर्जदाताओं और परिचालन कर्जदाताओं को समान दर्जा प्रदान किया था. यानी बराबर-बराबर बांटने के निर्देश दिए थे. शीर्ष अदालत ने समाधान खोजने के लिये इन्सॉल्वेंसी के तहत निर्धारित 330 दिन की समयसीमा में भी ढील दी है. पीठ ने साफ किया कि वित्तीय देनदारों को प्राथमिकता होती है और कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा स्वीकृत फैसले में न्याय करने वाला न्यायाधिकरण हस्तक्षेप नही कर सकता.

कोर्ट का कहना है कि सुरक्षित और असुरक्षित क्रेडिटर्स में तुलना नहीं की जा सकती. इसलिए फंड का बंटवारा कमेटी ही करेगी. अगर IBC के तहत 330 दिन में कार्यवाई पूरी नहीं होगी तो NCLAT जरुरत के मुताबिक समयसीमा बढ़ा सकता है.

किस बैंक को कितना मिलेगा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद SBI को 10,239 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि IDBI Bank को 4712 करोड़ रुपये मिलेंगे. वहीं केनरा को 3639 करोड़ रुपये, PNB को 2860 करोड़ रुपये, ICICI बैंक को 2347 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक को 2085 करोड़ रुपये और बैंक आफ इंडिया को 1905 करोड़ रुपये मिलेंगे.

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