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IL&FS मामला: ईडी ने दायर की चार्ज शीट, कुर्क की 570 करोड़ रुपये की संपत्तियां

ईडी ने चार्ज शीट में कहा कि आईएलएंडएफएस का वरिष्ठ प्रबंधक/अधिकारी कमिशनखोरी जैसे गैरकानूनी कामों में शामिल था और उसने कंपनी की लागत पर निजी फायदा कमाया.

August 17, 2019 6:05 PM
IL&FS crisis ED files first charge sheet attaches Rs 570 cr assetsPMLA के प्रावधानों के तहत मुंबई में एक विशेष अदालत के सामने शुक्रवार को यह चार्ज शीट दायर की गई है.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएलएंडएफएस के कर्ज भुगतान में चूक करने के मामले में पहली चार्ज शीट दायर की है. ईडी पहले ही इस मामले में करीब 570 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की कर चुका है. अधिकारियों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत मुंबई में एक विशेष अदालत के सामने शुक्रवार को यह चार्ज शीट दायर की गई है. ईडी इसी अधिनियम के तहत कई संपत्तियों, बैंक खातों तथा दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और ब्रुसेल्स में स्थित कई अचल संपत्तियों को भी कुर्क करने के प्राथमिक आदेश जारी कर चुका है. ये अचल संपत्तियां कमर्शियल और रेजिडेंशियल हैं और आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के निदेशकों रवि पार्थसारथी, रमेश बावा, हरि शंकरन, अरुण साहा और रामचंद करुणाकरन के पास हैं. एजेंसी साहा और करुणाकरन को जून में गिरफ्तार कर चुकी है.

कर्ज में फंसी कंपनियों को बड़े कर्ज देने के आरोप

अधिकारियों ने कहा कि एयरसेल के संस्थापक सी. शिवशंकरन द्वारा अपने परिजनों तथा समूह की कंपनियों के नाम पर इन्डायरेक्ट तौर पर रखी गई कुछ संपत्तियों को भी कुर्क किया गया है. कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 570 करोड़ रुपये है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दायर प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस साल फरवरी में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दायर किया था. ईडी ने चार्ज शीट में कहा कि आईएलएंडएफएस का वरिष्ठ प्रबंधक/अधिकारी कमिशनखोरी जैसे गैरकानूनी कामों में शामिल था और उसने कंपनी की लागत पर निजी फायदा कमाया. उसने कहा, ‘‘आपस में तथा विभिन्न निजी निकायों के प्रोमोटर्स के साथ आपराधिक सांठगांठ के जरिये वे स्थापित नियमों के उल्लंघन में लिप्त रहे तथा पहले से कर्ज में फंसी कंपनियों को उन्होंने बड़े कर्ज दिये. ये कर्ज ऐसी कंपनियों को भी दिए गए जो पहले ही आईएफआईएन से लिये कर्ज के भुगतान में चूक कर चुकी थीं.’’

कई और मुकदमे दायर किए जा सकते हैं

एजेंसी ने कहा, ‘‘उन्होंने यही आपराधिक तरीका अपनाते हुए शिवशंकरन के साथ साजिश की और शिवा ग्रुप की कंपनियों को कथित तौर पर गलत तरीके से दिए गए कर्जों में से अभी 494 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो सकी है.’’ ईडी ने कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान आईएफआईएन का प्रदर्शन नकारात्मक रहा लेकिन इसके बाद भी प्रबंधन के वरिष्ठ लोगों को कंपनी के कार्यप्रर्दशन पर आधारित भुगतान, डेप्यूटेशन खर्च और कमीशन में भारी वृद्धि की गई. आने वाले समय में एजेंसी (ईडी) इस मामले में और चार्ज शीट दायर कर सकती है.

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