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Internet IPOs: Paytmजैसी इंटरनेट कंपनियों के आईपीओ में निवेश से पहले रखें ध्यान, इन पांच प्वाइंट के आधार पर लें सब्सक्रिप्शन का फैसला

Internet IPOs: ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो की बंपर लिस्टिंग के बाद कई और इंटरनेट कंपनियां स्टॉक मार्केट में एंट्री की योजना बना रही हैं. हालांकि इनके वैल्यूएशन को लेकर निवेशक उलझन में हैं.

Updated: Aug 04, 2021 2:21 PM
How to value upcoming internet IPOs ICICI Securities shares framework to filter quality internet companiesइंटरनेट कंपनियों के आईपीओ के मामले में निवेशकों को ऐप यूजेज की फ्रीक्वेंसी, उपलब्ध मार्केट, डेटा मोनेटिजेबिलिटी, बैक-एंड ऑपरेशन मसल और यूनिट इकोनॉमिक्स पर फोकस करना चाहिए.

Internet IPOs: ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato की बंपर लिस्टिंग के बाद कई और इंटरनेट कंपनियां स्टॉक मार्केट में एंट्री की योजना बना रही हैं. इसके चलते निवेशकों के दिमाग में कई ऐसे सवाल घूम रहे हैं कि कौन-से मॉडल, किस वर्टिकल या किस कंपनी में निवेश करना बेहतर होगा. चालू वित्त वर्ष 2021-22 में Paytm भी प्राइमरी मार्केट में प्रवेश करने वाली है और न्याका का भी आईपीओ जल्द आने वाला है. ऐसे में निवेशकों की उलझन को दूर करने के लिए ब्रोकरेज एंड रिसर्च फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने इंटरनेट कंपनियों में निवेश से पहले पांच कसौटियां सुझाए हैं.

एनालिस्ट्स के मुताबिक वैल्यूएशन के लिए जीएमवी (ग्रास मर्चेंडाइज वैल्यू), निअर टर्म लॉसेस/वैल्यूएशंस अब खास प्रभावी नहीं रहे और लांग टर्म स्केबिलिटी, सस्टेनबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को कभी-कभी बढ़ा-चढ़ाकर देखा जाता है. ऐसे में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक इंटरनेट कंपनियों के आईपीओ के मामले में निवेशकों को ऐप यूजेज की फ्रीक्वेंसी, उपलब्ध मार्केट, डेटा मोनेटिजेबिलिटी, बैक-एंड ऑपरेशन मसल और यूनिट इकोनॉमिक्स पर फोकस करना चाहिए.

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App usage frequency

एनालिस्ट्स के मुताबिक अगर किसी इंटरनेट कंपनी का ऐप अधिक फ्रीक्वेंसी में यूज रहा है तो इसका मतलब हुआ कि इसका कस्टमर एंगेजमेंट औऱ स्केलेबिलिटी अधिक है. अधिकतर यूजर्स मेमोरी इशू के चलते सीमित ऐप्स ही रखते हैं. ऐसे में इंटरनेट कंपनियों के मामले में कस्टमर एंगेजमेंट, बिहैवियरल डेटा, ब्रांड लॉयल्टी, नेटवर्क साइज और स्केलिबिलिटी पर फोकस देना चाहिए.

Total available market (TAM)

स्थापित हो चुकी इंटरनेट बिजनेस से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इंडस्ट्री में अधिक मुनाफा कमाने के लिए या तो मोनोपॉली होनी चाहिए या डुओपॉली. ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक टोटल अवेलिबिलिटी मार्केट (टीएएम) जितना कम होगा, इंडस्ट्री में कंपटीशन अधिक होगा और मुनाफा कम होगा, वहीं इसके विपरीत अधित प्रति प्लेयर अधिक टीएम होने पर निवेशकों के लिए बेहतर रिस्क-रिवार्ड पेःऑप की स्थिति बनती है यानी कि उन्हें रिस्क पर बेहतर मुनाफा मिलता है.

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Data Monetisability

डिजिटल एरा में डेटा ईंधन के समान है और इंटरनेट कंपनियों के पास यूजर्स के बहुत अधिक डेटा हैं. ऐसे में इस डेटा का इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक निवेशकों को अधिक डेटा मोनेटाइजेशन के मॉडल की पहचान करनी चाहिए. इसका मतलब हुआ कि यह पता करना चाहिए कि जिस इंटरनेट कंपनी में वह निवेश का विचार कर रहे हैं, वह डेटा को किस हद तक मोनेटाइज कर सकती है, इसका आकलन जरूर करना चाहिए.

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Back-End Operational Muscle

ग्राहकों को बनाए रखने के लिए इंटरनेट कंपनियों का ऑपरेशन मॉडल प्रभावी होना चाहिए. अगर कोई ग्राहक किसी इंटरनेट कंपनी के प्लेटफॉर्म पर है तो यह बैक-एंड ऑपरेशन होता है जो उसे अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने में मदद करता है. संतुष्ट ग्राहकों से कंपनी के अधिक समय तक बने रहने की संभावना बढ़ती है. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक टिनी आउल और डोरमिंट जैसी कंपनियां अपने ऑपरेशनल कमजोरी के चलते गायब हो गई.

Unit economics

यह किसी भी इंटरनेट कंपनी का बहुत अहम हिस्सा है और कंपनी कितने समय तक मार्केट में बनी रहने वाली है और उसका मुनाफा कैसा है, इसका आकलन बहुत जरूरी है. अधिकतर बेहतर इंटरनेट कंपनियां मुनाफे में नहीं हैं जैसे कि जोमैटो. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ऐसी कंपनियां मार्केटिंग, विज्ञापन व प्रमोशन, डिस्काउंट्स, कैशबैक पर बहुत खर्च करती हैं. ये खर्च अधिक से अधिक ग्राहकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने और अपनी ब्रांडिंग के लिए किए जाते हैं. इन खर्चों (फ्रंट-एंडेड इंवेस्टमेंट्स) के चलते बैक-एंडेड बेनेफिट्स मिलता है. निवेशकों को मार्केटिंग ओवरहेड्स से पहले बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स या कांट्रिब्यूशन मार्जिन वाले कारोबार की पहचान करनी चाहिए. कांट्रिब्यूशन मार्जिन का मतलब प्रति यूनिट की बिक्री से होने वाला प्रॉफिट है.
(Article: Kshitij Bhargava)

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