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4 बहनें चला रही हैं 200 करोड़ डॉलर का हेल्थ एंपायर, डूबते कारोबार को दी नई बुलंदी

करीब एक दशक पहले रेड्डी बहनों ने अपने पिता प्रताप रेड्डी का कारोबार संभाला था. जब रेड्डी बहनों ने काम-काज संभाला था तब अपोलो हॉस्पिटल के हालात बहुत बेहतर नहीं थे.

November 22, 2018 1:46 PM
apollo pharmacy, apollo hospitals, latest news, important news, news nowचेन्नई के रेड्डी बहनें करीब 200 करोड़ रुपये डॉलर के हेल्थ एंपायर की मालकिन बन चुकी हैं. (Bloomberg)

आज कारोबार के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. किरण मजूमदार से लेकर इंद्रा नूई तक कई बड़े नाम इसमें शामिल हैं. इसी क्रम में कम चर्चा में रहने वाली 4 रेड्डी बहनें भी हैं. चेन्नई के रेड्डी बहनें आज भारत के सबसे बड़े हॉस्पिटल ग्रुप में से एक अपोलो हॉस्पिटल की मालकिन हैं. इन बहनों ने बेहद ही मुश्किल दौर से गुजर रहे अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप को आज एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है. आज ये बहनें 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 200 करोड़ रुपये डॉलर के हेल्थ एंपायर की मालकिन बन चुकी हैं.

मुश्किलों के दौर में संभाला था कारोबार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्अ के मुतााबिक करीब एक दशक पहले रेड्डी बहनों ने अपने पिता प्रताप रेड्डी का कारोबार संभाला था. जब रेड्डी बहनों ने काम-काज संभाला था तब अपोलो हॉस्पिटल के हालात बहुत बेहतर नहीं थे. उस दौरान कारोबार मुश्किलों के दौर से गुजर रहा था. लेकिन रेड्डी बहनों की सही रणनीति काम आई और आज उनका कारोबार नए स्तर पर पहुंच गया है. 86 साल के प्रताप रेड्डी आज भी अपोलो के चेयरमैन हैं. उनकी दो बेटियां प्रीता रेड्डी और शोभना कमिनेनी वाइस चेयरमैन और संगीता व सुनीता रेड्डी कार्यकारी निदेशक हैं.

क्या थी इनकी रणनीति

59 साल की अपोलो की को-मैनेजिंग डायरेक्टर सुनीता रेड्डी का कहना है कि जब उन्होंने पिता से कारोबार संभाला तो सबसे पहले हेल्थ के क्षेत्र में डिमांड और सप्लाई के बारे में स्टडी की. उन्होंने देखा कि छोटे शहरों में भी लोग इलाज पर पैसे खर्च करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाता है. इस वजह से इन बहनों ने छोअे शहरों पर फोकस करना शुरू किया. उन्हें उम्मीद थी कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के साथ छोटे शहरों के लोगों के स्पेंडिंग कैपेसिटी बढ़ेगी. उनकी यह रणनीति आज काम आई और 2015 के बाद पहली बार ग्रुप ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है.

ग्रुप के नए अस्पतालों का बढ़ेगा मार्जिन!

उनका कहना है कि अपोलो ने इस बात को महसूस किया कि प्रीमियम सेवाओं के लिए छोटे शहरों के लोग भी पैसे खर्च करने को तैयार हैं. बढ़ते हए अस्पतालों के साथ हेलथ केयर सेक्टर में भी प्रतियोगिता बढ़ रही है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उनके नए अस्पतालों में 70 फीसदी फुटफाल बढ़ेगा, जिससे नए अस्पतालों की प्रॉफिट मार्जिन 6 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच जाएगी.

अपोलो हॉस्पिटल के शेयरों में तेजी

अपोलो हॉस्पिटल के शेयर जून 2018 में पिछले चार साल के लो लेवल पर चले गए थे. लेकिन उसके बाद से शेयर में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई है. एनालिसट मान रहे हें कि कंपनी के शेयर में और ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद है. रेड्डी बहनों के पिता, प्रताप रेड्डी ने 1983 में अपोलो की शुरुआत इसलिए कि थी उस वक्त भारत में कटिंग-एज ट्रीटमेंट नहीं थी. इस बीमारी से एक मरीज की मौत हो गई थी. मौजूदा वक्त में अपोलो की मार्केट वैल्यू करीब 2 बिलियन डॉलर है और कंपनी का सालाना रेवेन्यू 1 बिलियन डॉलर रहा है.

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