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इस धनतेरस फीकी पड़ सकती है सोने की चमक, उद्योग को 5-10% कम बिक्री का अंदेशा

उच्च कीमतें, नकदी संकट और निवेश के अन्य बेहतर विकल्प बन सकते हैं वजह

October 28, 2018 5:36 PM
high prices, cash crunch take sheen off gold this dhanteras यदि कमजोर धारणा कायम रहती है तो यह लगातार दूसरा साल होगा, जब सोने की बिक्री उम्मीद के अनुरूप नहीं रहेगी. (Reuters)

बढ़ती कीमतों के बीच नकदी संकट और अन्य निवेश विकल्पों की वजह से इस ‘धनतेरस’ सोना अपनी चमक गंवा सकता है. यह राय बाजार विशेषज्ञों और उद्योग ने जताई है. यदि कमजोर धारणा कायम रहती है तो यह लगातार दूसरा साल होगा, जब सोने की बिक्री उम्मीद के अनुरूप नहीं रहेगी. वर्ष 2017 में धनतेरस पर सोने की बिक्री उससे पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी कम रही थी. 2016 में सोने की बिक्री अच्छी रही थी क्योंकि नोटबंदी की घोषणा दिवाली के बाद हुई थी.

पिछला साल उद्योग के लिए सबसे खराब रहा था. नोटबंदी और उसके बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन, साथ ही ऊंचे दाम वाली खरीद के लिए केवाईसी नियम कड़े करने की वजह से पिछले साल सोने की बिक्री में जोरदार गिरावट आई थी.

 इस साल 5-10% कम रह सकती है बिक्री: GJC

आॅल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डॉमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल का कहना है, ‘इस धनतेरस मुझे अच्छे कारोबार की उम्मीद नहीं है, क्योंकि बाजार में नकदी की कमी की वजह से कारोबारी धारणा अच्छी नहीं है. इस साल मैं बिक्री में पांच से दस फीसदी गिरावट की उम्मीद कर रहा हूं. अच्छी स्थिति होगी तो भी बिक्री ज्यादा से ज्यादा पिछले साल के स्तर पर ही पहुंच सकेगी.’

खंडेलवाल ने कहा कि हाल के दिनों में सोने की कीमतों में तेजी आई है. इस वजह से भी लोग खरीद में हिचकिचाहट दिखा रहे हैं. बता दें कि धनतेरस पर सोने, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीद को शुभ माना जाता है. पिछले साल धनतेरस के मौके पर सोना 30,000 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर चल रहा था.

शनिवार को घरेलू स्तर पर सोना 32,550 रुपये प्रति दस ग्राम पर था. वैश्विक स्तर पर शुक्रवार को न्यूयॉर्क में सोना 1,233.80 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था.

म्यूचुअल फंड्स जैसे विकल्प भी कम बिक्री की वजह

खंडेलवाल की बात का समर्थन करते हुए जीजेसी के पूर्व चेयरमैन मनीष जैन ने कहा कि दशहरा त्योहार पर कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ. धनतेरस और दिवाली पर भी यही स्थिति रहने का अंदेशा है. उन्होंने कहा, ‘‘हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि उद्योग पिछले साल के बिक्री के आंकड़े के बराबर पहुंच जाए. हालांकि, मौजूदा धारणा को देखकर लग रहा है कि इस साल बिक्री पिछले साल से कुछ कम ही रहेगी.’’ आगे कहा कि म्यूचुअल फंड्स जैसे बेहतर निवेश विकल्पों की वजह से भी लोग इस त्योहारी सीजन पर सोने की खरीद से बच रहे हैं.

हालांकि, जैन ने कहा कि संगठित क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन पिछले साल से बेहतर रहने की उम्मीद है. उद्योग में 70 फीसदी हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है. नकदी संकट की वजह से असंगठित क्षेत्र ही सबसे ज्यादा प्रभावित होगा.

दिवाली पर अच्छी डिमांड रहने की उम्मीद: तनिष्क

इस बीच, टाइटन की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग आभूषण विभाग) दीपिका अग्रवाल ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी का सभी उद्योगों विशेष रूप से आभूषण क्षेत्र पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ा है. पिछले एक साल के दौरान बाजार स्थिर हुआ है और यह सतत वृद्धि दर्ज कर रहा है. अग्रवाल ने कहा कि तनिष्क में हमें अक्षय तृतीया, गुड़ी पड़वा, तीज, वरमहालक्ष्मी और दुर्गा पूजा के मौके पर अच्छी मांग देखने को मिली. हम दिवाली सीजन में भी मांग बेहतर रहने की उम्मीद कर रहे हैं.

5-7% की हो सकती है बढ़ोत्तरी: कल्याण ज्वैलर्स

कल्याण ज्वेलर्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक टी एस कल्याणरमन ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस धनतेरस हम मात्रा के हिसाब से पांच से सात फीसदी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ग्राहक अब समझने लगा है कि संगठित क्षेत्र से खरीदारी करने पर उन्हें आभूषणों को दोबारा बेचने पर बेहतर मूल्य मिलेगा.

 

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