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  1. ईरान पर बैन से ग्वार गम की कीमतों में उछाल, एक्सप्लोसिव से लेकर खाने में होता है इस्तेमाल

ईरान पर बैन से ग्वार गम की कीमतों में उछाल, एक्सप्लोसिव से लेकर खाने में होता है इस्तेमाल

कुछ दिनों पहले ही ग्वार गम की कीमतों में आंशिक गिरावट आई थी लेकिन भारी निर्यात मांग के कारण इसकी कीमतें फिर बढ़ीं और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसकी कीमतें फिर बढ़ गई हैं.

April 24, 2019 7:40 AM
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ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत समेत आठ देशों को आंशिक छूट खत्म होने के बाद ग्वार गम की कीमतों में एक बार फिर से उछाल आ गया है. कुछ दिनों पहले ही ग्वार गम की कीमतों में आंशिक गिरावट आई थी लेकिन भारी निर्यात मांग के कारण इसकी कीमतें फिर बढ़ीं और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसकी कीमतें फिर बढ़ गई हैं. अब सवाल यह है कि ग्वार गम की कीमतों में उछाल का ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से क्या संबंध है, ग्वार गम का क्रूड ऑयल एक्सप्लोरेशन से क्या लेना-देना है और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

अमेरिकी क्रूड उत्पादन बढ़ने से ग्वार गम की मांग बढ़ी

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि अमेरिका अब क्रूड इंपोर्टर से क्रू़ड एक्सपोर्टर बन चुका है और अब वह हर दिन करीब 1.22 करोड़ बैरल का रिकॉर्ड क्रूड ऑयल का उत्पादन करता है. अमेरिका क्रूड ऑयल के उत्पादन के लिए ग्वार गम का प्रयोग करता है. ईरान पर प्रतिबंध के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति के लिए ईरान से तेल खरीद रहे देश अब अमेरिका से कच्चा तेल खरीदेंगे. ऐसे में अमेरिका ग्वार गम की खरीद बढ़ाएगा और इसकी मांग बढ़ेगी जिसके कारण ग्वार गम की कीमतें बढ़ रही हैं. अमेरिका के लिए यह विदेशी राजस्व का जरिया भी हो गया है.

अमेरिकी उत्पादन घटने की संभावना बहुत कम

पिछले साल अमेरिकी सरकार ने क्रूड ऑयल का उत्पादन बढ़ाया था. इसकी वजह से अमेरिका में रोजगार बढ़ा था. अब अमेरिका में क्रूड ऑयल प्रोडक्शन रोजगार के लिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि वहां रोजगार का मुद्दा बहुत प्रभावी है. ऐसे में अजय केडिया के मुताबिक अमेरिकी सरकार के लिए क्रूड ऑयल का उत्पादन घटाने की संभावना बहुत ही कम है.

उन्होंने बताया कि अमेरिका क्रूड ऑयल का उत्पादन स्थायी तौर पर बढ़ा रहा है और इसका सबसे बड़ा संकेत यह है कि वह ड्रिलिंग पॉइंट से डिलीवरी सेंटर तक पाइपलाइन बिछा रहा है. अगर अमेरिका अपना उत्पादन अस्थायी तौर पर बढ़ाया होता तो वह पाइपलाइन की बजाय टैंकरों का इस्तेमाल करता. अमेरिका में क्रूड ऑयल उत्पादन के लिए ग्वार गम का इस्तेमाल होता है जिसके कारण इसकी मांग अब लगातार बनी रहेगी.

चीन की कोशिश रही नाकाम

ऐसा नहीं है कि क्रूड ऑयल के उत्पादन में सिर्फ ग्वार गम का ही इस्तेमाल होता हो. चीन ने इसके विकल्प के तौर पर स्लिक वॉटर का इस्तेमाल शुरू किया. हालांकि यह इकोफ्रेंडली नहीं है, इसलिए यह ग्वार गम का विकल्प नहीं बन पाया.

भारत ग्वार गम का सबसे बड़ा उत्पादक

दुनिया में सबसे अधिक करीब 80 फीसदी ग्वार गम भारत और पाकिस्तान में होता है. इसमें भी सबसे अधिक भारत के राजस्थान में होता है. हालांकि इस बार ग्वार गम का उत्पादन बहुत अधिक नहीं रहा जिसके कारण इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है.

कमजोर मानसून की संभावना भी बढ़ा रही कीमतें

भारतीय मौसम विभाग ने अलनीनो की किसी भी संभावना से इनकार किया है लेकिन स्काईमेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून सामान्य से कम रहेगा और अलनीनो का असर देखने को मिल सकता है. इसकी वजह से ग्वार गम का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है. इस कारण भी इसकी कीमतें उछाल मार रही हैं.

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ग्वार गम की मांग फूड प्रोसेसिंग में भी

क्रूड ऑयल एक्सप्लोरेशन के अलावा ग्वार गम की मांग फूड प्रोसेसिंग में भी है. अमेरिका के अलावा यूरोप से भी इसकी मांग अधिक है. इसका इस्तेमाल पशुओं को खिलाने के लिए भी किया जाता है और कैडबरी जैसे प्रॉडक्ट में भी किया जाता है. विस्फोटक पदार्थों में भी इसका प्रयोग होता है.

ग्वार गम की मांग की तुलना में इसकी आपूर्ति बहुत कम है जिसके कारण इसकी कीमतें बढ़ रही हैं. कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स के मुताबिक फरवरी से लेकर अब तक ग्वार गम की कीमतें करीब 500 रुपये प्रति 100 किग्रा तक बढ़ चुकी हैं.

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