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  1. इंफ्रा बांड जारी कर 95 हजार करोड़ जुटा सकती है सरकार, अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने दिया सुझाव

इंफ्रा बांड जारी कर 95 हजार करोड़ जुटा सकती है सरकार, अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने दिया सुझाव

बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच के अर्थशास्त्रियों ने इस रिपोर्ट में कहा है कि इस प्रकार के बांड जारी करने से सरकार का कर्ज बढ़ेगा लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल नहीं होगी.

June 26, 2019 9:03 PM
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केंद्र सरकार आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के बांड जारी कर 95,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. ये बांड विशेष उद्देशीय निकाय (SPV) के जरिये जारी किये जा सकते हैं. एक ब्रोकरेज कंपनी की रिपोर्ट में यह कहा गया है. बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच के अर्थशास्त्रियों ने इस रिपोर्ट में कहा है कि बेशक इस प्रकार के बांड जारी करने से सरकार का कर्ज बढ़ेगा लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल नहीं होगी क्योंकि इस प्रकार जुटाया गया धन खास जरूरत को पूरा करने के लिये होगा.

बांड से बैंकों की जमा या कर्ज पर कोई असर नहीं

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘पब्लिक कैपिटल एक्सपेंसेज को पूरा करने के लिये एक एसपीवी द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर बांड जारी किये जा सकते हैं. इससे निजी निवेश के लिये जरूरी फाइनेंस में समस्या खड़ी किये बिना आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.’’ अर्थशास्त्रियों ने नोट में कहा है कि वित्त मंत्री इस तरह के बांड जारी कर आराम से 95,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं. उन्होंने कहा है कि इस प्रकार जो राशि जुटाई जायेगी वह सावधि जमाओं से निकलकर बांड जारी करने वाले एसपीवी में जायेगी और इस प्रकार बैंक जमा या कर्ज वृद्धि पर कोई असर नहीं होगा.

बांड के जरिए धन जुटाने से निवेश को बढ़ावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यदि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड के जरिये धन जुटाने की घोषणा करती है तो इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और पूंजी लागत कम होगी. कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि पर भी इसका बड़ा वित्तीय असर नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2018- 19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घट कर पांच साल के निम्न् स्तर 5.8 प्रतिशत पर आ गयी और पूरे साल की जीडीपी वृद्धि भी 6.8 प्रतिशत पर नीचे ही रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4 प्रतिशत के पिछले स्तर पर ही सीमित रखने का लक्ष्य रख सकती है लेकिन वह 0.3 प्रतिशत तक अतिरिक्त सार्वजनिक व्यय का प्रस्ताव कर सकती हैं.

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