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इक्विटी Vs गोल्डः सोने की और बढ़ेगी चमक! कोरोना संकट में क्यों शेयर बाजार से बेहतर विकल्प?

कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी लगातार बढ़ रहे हैं. ये कब तक रुकेंगे, इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है.

Updated: Jul 20, 2020 8:44 AM
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कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी लगातार बढ़ रहे हैं. ये कब तक रुकेंगे, इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इक्विटी निवेशकों के मन में भी अनिश्चितता बनी हुई है. फिलहाल इक्विटी मार्केट में निवेश के विकल्प सीमित हो गए हैं. दूसरी ओर इसी अनिश्चितता की वजह से सोने की मांग जमकर बढ़ी है और इस साल अच्छा खासा रिटर्न मिला है. इससे सोने का भाव भी आसमान पर पहुंच गया है. ऐसे में निवेशकों के मन में दुविधा है कि वे सुरक्षित विकल्प के रूप में कहां पैसा लगाएं. पिछले 10 साल में दोनों बाजारों की ग्रोथ ट्रैजेक्टरी हमें यह बता सकती है कि अनिश्चितता के वर्तमान समय में बेहतर विकल्प क्या है.

इक्विटी और गोल्ड मार्केट के ट्रेंड

पिछले 10 साल में, भारतीय शेयर बाजार इंडेक्स जैसे सेंसेक्स (बीएसई 30) और बीएसई-500 ने 9.05 फीसदी और 8.5 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न दर्ज किया है. 2010 और 2015 के बीच की अवधि में 2012 की आर्थिक मंदी के बावजूद एक क्रमिक ग्रोथ देखी गई. बाद में फरवरी 2016 से जनवरी 2020 तक ग्रोथ देखने को मिली. वहीं, इस दौरान की बात करें तो दिसंबर, 2019 तक सेंसेक्स की ग्रोथ लगभग 17,500 अंकों से बढ़कर 40,000 अंक तक पहुंच गई. जो पूरे सेक्टर में इक्विटी से आए कैपिटल को दर्शाता है. हालांकि इस बीच वैश्विक रुझानों के कारण उतार-चढ़ाव भी हुआ.

लेकिन कोविड-19 महामारी बढ़ने के साथ वैश्विक बाजारों में बड़ी गिरावट आई. ज्यादातर देशों में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियां मंद पड़ गईं, इसके परिणामस्वरूप अप्रैल-2020 की शुरुआत तक भारतीय बाजार बुरी तरह से ढह गए. हालांकि, अप्रैल के बाद से रिकवरी काफी महत्वपूर्ण रही.

दूसरी ओर, इस दौरान सोने में शानदार तेजी देखने को मिली. भारत में आर्थिक विकास की गति धीमी होने के परिणामस्वरूप पिछले 1 साल के अंदर ही सोने की कीमतों में 35,000 से लेकर 50,900 तक की ग्रोथ दिखी. सिर्फ अप्रैल में सोने में निवेश ने 11 फीसदी रिटर्न दिया. मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में भी इसमें अच्छी खासी तेजी का अनुमान है. असल में उथल-पुथल के समय में सोना और संबंधित एसेट क्लास लंबे समय से सुरक्षित विकल्प रहे हैं.

इन वजहों से सोना बेहतर विकल्प

a) 2008 की मंदी में प्रमुख बैंकों और दुनियाभर के बाजारों के टूटने के बाद यूएस फेड और अन्य सेंट्रल बैंकों ने बड़े प्रोत्साहन पैकेजों से वैश्विक वित्तीय प्रणाली में रिकवरी लाई थी. बाद के वर्षों में कई बाजारों पर उसका प्रभाव जारी रहा. ग्रीस जैसे छोटे यूरोपीय देश कर्ज में डूब गए और यूरोपीय यूनियन के एकल बाजार को मजबूत करने के लिए यूरोपीय सेंट्रल बैंक को प्रोत्साहन देना पड़ा. आज की बात करें तो महामारी के बाद के उपायों के संबंध में वैश्विक बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को कम किया है. आगे इसमें और कमी आ सकती है. यह सोने के लिए पॉजिटिव है.

b) कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 2020 के लिए 4.9 फीसदी रेंज में रखा. यह जो अप्रैल के फोरकास्ट से 1.9 फीसदी कम है. इसके अलावा आईएमएफ की अप्रैल-2020 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में 3 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया गया था, जो कि 2008 के वित्तीय संकट के दौरान बनी स्थिति से भी बदतर है. कंसल्टिंग फर्म डेलोइट के आउटलुक के अनुसार इस मंदी के चलते बाजारों और बैंकों पर बुरा असर हो सकता है. इसमें बॉन्ड यील्ड, क्रूड की कीमतें और ब्याज दरों में और कमी का अनुमान जताया गया है. ऐसा होने पर सेफ हैवन के रूप में सोने में खरीददारी और बढ़ेगी.

c) कोविड-19 के लांग टर्म रिस्क हैं, हालांकि इसका आंकलन ठीक ठीक नहीं किया जा सकता है. लेकिन यह साफ है कि संकट अब भी खत्म होता नहीं दिख रहा है. लिक्विडिटी और सीमित गतिविधि के अधिक स्तर के साथ, अनिश्चित भविष्य के लिए सोने में निवेश का ट्रेंड कायम रहने की संभावना है. हालांकि, सोने की कई निवेश संभावनाओं पर ध्यान देना आवश्यक है, जो मुद्रास्फीति के ट्रेंड से मुकाबला कर सकती हैं.

d) वैश्विक स्तर पर, केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक अनिश्चितता को ध्यान में रखकर सोने में खरीददारी बढ़ाई है. यह संकेत है कि आगे गोल्ड मार्केट में और तेजी आ सकती है. ऐसे में फिलहाल तो इक्विटी की बजाए सोना एक बेहतर निवेश विकल्प लग रहा है.

लेखक: अनुज गुप्ता, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंड (कमोडिटी एंड करंसी), एंजेल ब्रोकिंग

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