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सोने की अभी और बढ़ेगी चमक, मुनाफा कमाने के लिए इन 4 तरीकों से करें निवेश

Gold Investment: गोल्ड में कई तरह से निवेश कर भविष्य में मुनाफा कमाया जा सकता है.

June 25, 2019 1:58 PM
with gold price hike know best options to invest in gold like gold bond etf sipगोल्ड ईटीएफ में जहां 2.5 फीसदी सालाना शुल्क हैं.

दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नरम रुख से सोने की कीमतों में तेजी आई है. अमेरिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंकों ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए मौद्रिक रुख को नरम करने का संकेत दिया है. वहीं, आर्थिक मोर्चे पर अनिश्चितता और ट्रेड वार की चिंता में 2019 में अबतक सोना 10 फीसदी तक चढ़ चुका है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि सोने में तेजी आगे भी जारी रहेगी, ऐसे में आपके पास इसमें निवेश का शानदार मौका है. सोने में निवेश के लिए सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही विकल्प नहीं है. इसके अलावा भी आप कई तरह से इसमें निवेश कर भविष्य में मुनाफा कमा सकते हैं.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (कमोडिटी एंड करंसी), अनुज गुप्ता का कहना है कि यूएस फेड से भविष्य में ब्याज दरें घटाए जाने के संकेत मिले हैं. संकेत मिलने के बाद से ही सोने को लेकर सेंटीमेंट बेहतर हो गए और ट्रेडर्स ने निवेश बढ़ाया है. आगे यूएस सेंट्रल बैंक रेट्स में कटौती करता है तो निवेशक इक्विटी या बॉन्ड से पैसे निकालकर गोल्ड जैसे एसेट क्लास में निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे कीमतों में तेजी बनेगी. एमसीएक्स पर सोना दिवाली तक 35 हजार का भाव क्रॉस कर सकता है.  सर्राफा बाजार की बात करें तो सोने के भाव 36,000 तक चढ़ने की उम्मीद है.

 

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गोल्ड में निवेश करने के तरीके

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF)

गोल्ड ETF के तौर पर मिनिमम 1 ग्राम सोने में निवेश किया जा सकता है. लेकिन गोल्ड ETF में कोई अपर लिमिट नहीं है. गोल्ड ETF में कोई लॉक इन पीरियड नहीं है. इसमें 3 साल का होल्डिंग पीरियड पूरा करने के बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगता है. वहीं 3 साल से पहले बेचने पर एप्लीकेबल स्लैब रेट से टैक्स लगता है. यहां कभी भी खरीद-बिक्री की जा सकती है. यह बहुत ज्यादा लिक्विड होता है. गोल्ड ETF की कमी यह है कि डीमैट चार्ज देना कंपल्सरी है और कभी-कभी इसका वॉल्यूम लो रहता है.
गोल्ड ETF पर कोई ब्याज नहीं मिलता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने पर 1 व्यक्ति सिर्फ 1 ग्राम से लेकर 4 किलो तक ही सोना खरीद सकता है. वहीं हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली यानी HUF के लिए यह क्वांटिटी मैक्सिमम 4 किलो और ट्रस्ट्स के लिए 20 किलो है. गोल्ड बॉन्ड में 5 साल का लॉक-इन पीरियड है. गोल्ड खरीदने के 3 साल बाद बेचने पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी LTCG टैक्स लगेगा और 3 साल से पहले इसे बेचा जाता है तो एप्लीकेबल स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगेगा. हालांकि गोल्ड बॉन्ड को 5 साल बाद बेचने पर LTCG टैक्स नहीं लगेगा.  गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन और इंटरेस्ट बैनिफिट्स मिलते हैं. साथ ही इस पर सॉवरेन गारंटी भी मिलती है. गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसे सेकंडरी मार्केट में बेचने पर लिक्विडिटी का इश्यू आता है.

गोल्ड SIP

म्यूचुअल फंड की तरह गोल्ड में भी SIP शुरू की जा सकती है. इससे 500 रुपये की रकम से भी सोने में लंबे समय के लिए निवेश किया जा सकता है. SIP की रकम खुदबखुद बैंक खाते से कट जाती है. गोल्ड SIP में निवेश करने के लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती है. इसमें कई कंपनियों ने गोल्ड फंड ऑफ फंड्स जारी करती हैं, जिनमें आप एसआईपी के जरिये भी निवेश कर सकते हैं.

गोल्ड सेविंग स्कीम

गोल्ड या जूलरी सेविंग स्कीम दो तरीके की होती हैं. इस स्कीम के जरिए ग्राहकों को एक निश्चित अवधि के लिए हर महीने फिक्स्ड अमाउंट डिपॉजिट करनी होती है. मैच्योरिटी पर जितना पैसा इकट्ठा होता है, उतना सोना खरीदा जा सकता है. यहां बोनस का फायदा मिलता है. जूलर ग्राहकों को लुभाने के लिए आखिरी महीने की किस्त खुद से ऑफर करते हैं. यानी एक साल की अवधि की स्कीम है तो ग्राहकों को 11 किस्त जमा करनी होंगी. वहीं 12वीं किस्त का भुगतान खुद रिटेलर द्वारा किया जाता है.

 

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