विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाले 14 हजार करोड़, बॉन्ड में निवेश का भी घटा आकर्षण

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने जून में अब तक 14 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है.

FPIs pull out thousands crore from Indian equities in June on global domestic concerns
एफपीआई द्वारा बिकवाली का सिलसिला नियर टर्म में जारी रह सकता है लेकिन शॉर्ट और मीडियम टर्म में इसमें गिरावट आ सकती है. (Image- Pixabay)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPO) का भारतीय शेयर बाजारों से निकासी का सिलसिला जारी है. घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर घटनाक्रमों से चिंतित विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं और इस महीने जून में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों से 13888 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 1.81 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं. पिछले साल अक्टूबर 2021 से ही एफपीआई लगातार भारतीय शेयरों से पैसे निकाल रहे हैं. भारत के अलावा एफपीआई ने इस महीने जून में अब तक ताइवान, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और फिलीपींस जैसे उभरते बाजारों से भी निकासी की है.

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बिकवाली की प्रमुख वजह

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक अभी एफपीआई की बिकवाली की प्रमुख फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति है. ट्रेडस्मार्ट के चेयरमैन विजय सिंघानिया के मुताबिकअमेरिका में चार दशक के हाई स्तर 8.6 फीसदी पर इंफ्लेशन पहुंचने और चीन में फिर से लॉकडाउन लगाए जाने के चलते वैश्विक स्तर पर बिकवाली का दौर चल रहा है. आरबीआई ने भी रेपो रेट में बढ़ोतरी की और इंफ्लेशन के अपने अनुमान में बढ़ोतरी की है जिससे एफपीआई की बिकवाली को प्रोत्साहन मिला.

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अब आगे क्या स्थिति है मार्केट की

नायर के मुताबिक बिकवाली का यह सिलसिला नियर टर्म में जारी रह सकता है लेकिन शॉर्ट और मीडियम टर्म में इसमें गिरावट आ सकती है. नायर ने कहा कि इसकी वजह ये है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती, सख्त मौद्रिक रुख, सप्लाई की दिक्कतों और हाई इंफ्लेशन को बाजार पहले ही स्वीकार कर चुका है. लांग टर्म में केंद्रीय बैंकों का आक्रामक मौद्रिक रुख तभी जारी रहेगा जबकि इंफ्लेशन हाई हो.

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बॉन्ड मार्केट से भी निकासी

इक्विटी के अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने डेट मार्केट से भी इस महीने निकासी है. एफपीआई ने इस महीने अब तक बॉन्ड मार्केट से 600 करोड़ रुपये की निकासी की है और वे इस साल फरवरी से बॉन्ड से पैसे वापस खींच रहे हैं. मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक रिस्क रिवार्ड और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों के हिसाब से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बांड बाजार निवेश का आकर्षक विकल्प नहीं रह गया है.

(Input: PTI)

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