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RBI के इस एलान से कमजोर हुआ रुपया, तीन महीने तक निवेश के बाद अप्रैल में विदेशी निवेशकों ने निकाले अब तक 929 करोड़

अप्रैल में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 929 करोड़ की निकासी की है जबकि ताइवान व दक्षिण कोरिया में FPIs का रुझान बढ़ रहा है.

April 11, 2021 2:22 PM
FPIs pull out Rs 929 cr from Indian markets so far this month as corona cases increase and rupee depreciation because of rbi announcement in monetary policy meeting

कोरोना केसेज के बढ़ते मामलों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. इस महीने अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से 929 करोड़ रुपये की निकासी की है. पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही जनवरी-मार्च 2021 में विदेशी निवेशकों का रुझान इसके ठीक उल्टा था और उन्होंने भारतीय बाजार में निवेश किया था. इससे पहले एफपीआईज ने जनवरी में 14,649 करोड़ रुपये, फरवरी में 23,663 करोड़ रुपये और मार्च में 17304 करोड़ रुपये का निवेश किया था. इस प्रकार चालू वर्ष 2020 के शुरुआती तीन महीने निवेश के बाद कोरोना संकट के चलते विदेशी निवेशकों का रुख अब तक बदला हुआ दिख रहा है और उन्होंने अप्रैल 2021 में अब तक 929 करोड़ रुपये की निकासी की है.
डिपॉजिटरीज डेटा के मुताबिक ओवरसीज इंवेस्टर्स ने 740 करोड़ रुपये इक्विटीज से और 189 करोड़ रुपये डेट सेग्मेंट से निकाले हैं और 1 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच कुल 929 करोड़ की निकासी हुई है. आरबीआई द्वारा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज खरीदने के सरप्राइज एनाउंसमेंट से रुपया कमजोर हुआ जिसके चलते एफपीआईज ने निकासी की है.

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आरबीआई के सरप्राइज एलान से कमजोर हुआ रुपया

कोटक सिक्योरिटीज के एग्जेक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और फंडामेंटल रिसर्च के एग्जेक्यूटिव प्रमुख रुस्मिक ओझा के मुताबिक अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते एफपीआई भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं. ओझा के मुताबिक आरबीआई की मौद्रिक नीतियों की बैठक में चालू वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में आरबीआई द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीदारी का सरप्राइज एनाउंसमेंट किया गया था. इसके चलते रुपये में कमजोरी आई और डॉलर की तुलना में इसके भाव 74.8 रुपये से गिरकर 72.4 रुपये तक गिर गए.

कोरोना की दूसरी लहर पर निर्भर करेगी FPIs का मूड

ओझा के मुताबिक एफपीआई का निवेश अन्य उभरती बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इस महीने अब तक दक्षिण कोरिया और ताइवान में विदेशी निवेशकों का निवेश धीरे-धीरे बढ़ा है. जियोजित फाइनेंसियल सर्विसेज के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार के जब तक कोरोना की दूसरी लहर को लेकतर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती है, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों रूझान निवेश को लेकर बेहतर नहीं होगा. हालांकि उनका मानना है कि फार्मा और आईटी सेक्टर में आने वाले दिनों में अधिक निवेश आकर्षित होगा.

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