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रुपया पहली बार 71.75 के निचले स्तर पर बंद, RBI के दखल के बाद रिकॉर्ड गिरावट से 20 पैसे सुधरा

बुधवार को रुपये में रिकवरी दिखी है. डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 71.40 के स्तर पर खुला. मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया मंगलवार को अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 71.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

September 5, 2018 6:44 PM
forex market, rupee, dollar, trade war, global tension, cude, रुपया, डॉलर, US Fed, यूएस फेडबुधवार को रुपये में रिकवरी दिखी है. डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 71.40 के स्तर पर खुला. मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया मंगलवार को अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 71.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. (Reuters)

रुपये में बुधवार को लगातार छठे दिन गिरावट बनी रही और डॉलर के मुकाबले 18 पैसे की गिरावट के साथ 71.75 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान रुपया 40 पैसे टूटकर 71.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया था. हालांकि, भारतीय रुपया कारोबार के आखिरी घंटों में इस गिरावट से उबरने में कामयाब रही और करीब 20 पैसे की रिकवरी आई. इससे पहले, रुपये की शुरुआत मंगलवार के स्तर से 18 पैसे मजबूती के साथ 71.40 प्रति डॉलर हुई. मंगलवार को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 71.58 पर बंद हुआ था. ट्रेड वार, ग्लोबल टेंशनए यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत और डॉलर की मजबूत डिमांड के चलते रुपये पर दबाव जारी है.

एनॉलिस्ट का कहना है कि रिजर्व बैंक के दखल के चलते रुपये में रिकवरी देखने को मिली. इक्विटी99 के सीनियर रिसर्च एनॉलिस्ट राहुल शर्मा ने FE Online को बताया कि महंगाई, मजबूत डॉलर, क्रूड की बढ़ती कीमतें जैसी कई वजहों से रुपया लगाता कमजोर हो रहा है. रुपये का एक निश्चित सीमा तक गिरना बेहतर है लेकिन एक स्तर के बाद गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है. आज की रिकवरी की मुख्य वजह रिजर्व बैंक का दखल रहा.

पिछले दिनों रुपये की चाल

मंगलवार को रुपया 71.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
सोमवार को रुपया 22 पैसे की भारी गिरावट के साथ 71.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
पिछले हफ्ते शुक्रवार को रुपया 70.99 के स्तर पर बंद हुआ था.
गुरूवार को रुपया 15 पैसे की गिरावट के साथ 70.74 के स्तर पर बंद हुआ.
बुधवार को रुपया 49 पैसे कमजोर होकर 70.59 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. मंगलवार को रुपया 6 पैसे मजबूती के साथ 70.10 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

इस साल 12% कमजोर हुआ रुपया

इस साल रुपये में लगातार कमजोरी देखी गई है. रुपया इस साल अबतक करीब 11 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है. पिछले साल रुपए में करीब 6 फीसदी की तेजी आई थी, लेकिन इस बार कई फैक्टर रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है.

रुपए में क्यों आई कमजोरी

इस साल रुपये में कमजोरी की कई बड़ी वजह रही है. क्रूड की कीमतें लगातार हाई बनी रहने की वजह से डॉलर की डिमांड इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ी है, वहीं, यूएस और चीन के बीच ट्रेड वार का भी असर फॉरेक्स मार्केट पर दिखा है. तुर्की में आर्थिक संकट ने भी रुपये पर दबाव डाला है. वहीं, दुनियाभर में कई प्रमुख करंसी में कमजोरी देखी गई है. इन सभी वजहों से रुपये पर दबाव बढ़ा है. इसके अलावा यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के संकेत ने भी रुपये को कमजोर किया है.

73 प्रति डॉलर तक जा सकता है भाव

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि क्रूड की कीमतें हाई बनी हुई हैं. जिससे क्रूड की खरीदारी के लिए इंटरनेशनल स्तर पर डॉलर की डिमांड तेज है. घरेलू स्तर पर रेवेन्यू कलेक्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं है, वहीं राजनैतिक अस्थिरता का माहौल है. ऐसे में रुपये को सपोर्ट मिलता नहीं दिख रहा है. आने वाले कुछ हफ्तों में रुपया 73 प्रति डॉलर का स्तर भी छू सकता है.

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