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RBI ने नहीं बढ़ाई ब्याज दरें, रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 74 प्रति डॉलर के पार

शुक्रवार को करंसी मार्केट में रुपये की शुरूआत 7 पैसे कमजोरी के साथ हुई. रुपया डॉलर के मुकाबले 73.65 प्रति डॉलर के भाव पर खुला.

October 5, 2018 3:02 PM
forex market, currency, rupee fall, dollar, crude, रुपया, डॉलर, bond yield, us economyशुक्रवार को करंसी मार्केट में रुपये की शुरूआत 7 पैसे कमजोरी के साथ हुई. रुपया डॉलर के मुकाबले 73.65 प्रति डॉलर के भाव पर खुला.

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी ने ब्श्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 6.50 फीस दी और रिवर्स रेपोे रेट को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के इस फैसले के बाद से रुपया अबतक के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 74 प्रति डॉलर के स्तर के नीचे आ गया. रुपये ने 74.025 का स्तर टच किया. बता दें कि माना जा रहा था कि रुपये में कमजोरी को रोकने के लिए आरबीआई ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है.

एक्सपर्ट्स का मानना था कि डॉलर के मुकाबले लगातार ​गिरते रुपये को संभालने के लिए RBI रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर सकता है. पिछले दिनों रुपये में गिरावट को थामने की आरबीआई की कोशिश कुछ खास सफल नहीं हुई. इस वजह से ना सिर्फ इंपोर्ट महंगा हुआ है, बल्कि चालू खाता घाटा सीएडी और बढ़ने का डर बन गया है.

दरें बढ़ने की थी उम्मीद

पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व CGM जीएस बिंद्रा के अनुसार जो हालात बन रहे हैं, उन्हें देखकर उम्मीद थी कि RBI दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी करेगा. बिंद्रा ने कहा कि इस वक्त महंगाई काफी नियंत्रण में है. दरें बढ़ने से महंगाई के तय उच्च स्तर के दयारे में रहने की उम्मीद थी.
बता दें कि अगस्त महीने में महंगाई दर 3.69 फीसदी रही जो RBI के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से कम है.

HDFC बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अभीक बरुआ के मुताबिक, इस वक्त सबसे बड़ी और प्रमुख जरूरत गिरते रुपये को संभालना है. इसे देखते हुए RBI द्वारा कारगर कदम उठाया जाना जरूरी लग रहा है.

ब्याज दर, रुपये में गिरावट और महंगे क्रूड का क्या है कनेक्शन?

दरअसल जब रुपये में गिरावट आती है तो विदेशी व्यापार में डॉलर के मुकाबले रुपये में ज्यादा मूल्य देना पड़ता है. इसके चलते देश से करेंसी बाहर ज्यादा जाती है और बदले में विदेशी करेंसी की प्राप्ति कम रहती है. इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और इकोनॉमी कमजोर होती है. ऐसे ही जब क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं तो क्रूड के आयात के लिए ज्यादा मूल्य चुकाना होता है. इससे भी देश से करेंसी ज्यादा मात्रा में बाहर जाती है. साथ ही महंगा क्रूड खरीदने के चलते आॅयल कंपनियां देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाती हैं और इससे ट्रांसपोर्टेशन और हर उस काम की लागत बढ़ जाती है, जिसमें पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल होता है. लिहाजा महंगाई भी बढ़ती है.

अगर RBI द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की जाती है तो बैंकों को RBI से महंगा लोन मिलता है. इसके चलते वे भी कंज्यूमर को दिए जाने वाले लोन महंगे कर देते हैं, जिससे प्रोडक्शन और खरीद-फरोख्त घटती है. लिहाजा रुपये का लेन-देन भी घटता है.

इस साल रुपये में करीब 15 फीसदी गिरावट आ चुकी है. एनालिस्ट का मानना है कि क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच डॉलर की डिमांड तेज हुई है. वहीं, यूएस ट्रीजरी यील्ड में तेजी ने भी डॉलर को ग्लोबल करंसी के मुकाबले 1 महीने के हाई पर पहुंचा दिया है. आगे रुपया 74 प्रति डॉलर का स्तर छू सकता है.

 

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