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Forex Market Live: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, 23 पैसे गिरकर 73.57 पर हुआ बंद

गुरूवार को रुपया शुरू में डॉलर के मुकाबले 26 पैसे कमजोर होकर 73.60 के भाव पर खुला. कुछ देर में ही रुपये में 73.76 प्रति डॉलर तक कमजोरी गहरा गई.

Updated: Oct 04, 2018 7:10 PM
rupee, dollar, crude, bond yield, रुपया, डॉलर, forex market live updateगुरूवार को रुपया शुरू में डॉलर के मुकाबले 26 पैसे कमजोर होकर 73.60 के भाव पर खुला. कुछ देर में ही रुपये में 73.76 प्रति डॉलर तक कमजोरी गहरा गई.

गुरुवार को भी रुपये में गिरावट का दौर जारी रहा. शाम को कारोबार बंद होने पर रुपया 23 पैसे गिरकर 73.57 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. इसके पहले बुधवार को रुपया 73.34 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

दिन की शुरुआत पर रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे कमजोर होकर 73.60 के भाव पर खुला. कुछ देर में ही रुपये में 73.76 प्रति डॉलर तक कमजोरी गहरा गई. पूरे दिन के कारोबार में रुपये ने गिरकर 73.82 प्रति डॉलर के स्तर को भी छुआ, हालांकि बाद में यह रिकवर होकर 73.48 के स्तर पर आ गया.

इस साल रुपये में करीब 15 फीसदी गिरावट आ चुकी है. एनालिस्ट का मानना है कि क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच डॉलर की डिमांड तेज हुई है. वहीं, यूएस ट्रीजरी यील्ड में तेजी ने भी डॉलर को ग्लोबल करंसी के मुकाबले 1 महीने के हाई पर पहुंचा दिया है.

पिछले 10 दिन में रुपये की चाल

— बुधवार को रुपया 73.24 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
— सोमवार को रुपया 43 पैसे कमजोरी के साथ 72.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
— शुक्रवार को रुपया 72.48 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
— गुरूवार को रुपया 72.59 के स्तर पर बंद हुआ था.
— बुधवार को रुपया 72.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
— मंगलवार को रुपया 72.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
— सोमवार को रुपया 43 पैसे की गिरावट के साथ 72.63 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ.
— शुक्रवार के कारोबार में रुपया 72.20 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
— बुधवार को रुपया 72.37 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
— मंगलवार को रुपया 47 पैसे टूटकर 72.98 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ.

क्यों गिर रहा है रुपया?

1. डॉलर की मांग और आपूर्ति बढ़ी

दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए आमतौर पर डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर स्थानीय करंसी कमजोर होती है. एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है. वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है.”

2. निर्यात घटना भी बड़ी वजह

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाता घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है. जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा. दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया.

3. राजनीतिक अस्थिरता

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है. आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि घरेलू करंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है. जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं.”

4. अमेरिका की मजबूती से लग रहा है झटका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.

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