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Forex Market Live: रुपया 19 पैसे मजबूत होकर 72.42/डॉलर पर, इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने से सपोर्ट

गुरूवार को रुपया 19 पैसे मजबूत होकर 72.42 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. सरकार द्वारा 19 आइटम्स पर इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद से रुपये को सपोर्ट मिला.

September 27, 2018 9:41 AM
rupee, dollar, import tarrif, hike, रुपया, डॉलरगुरूवार को रुपया 19 पैसे मजबूत होकर 72.42 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. सरकार द्वारा 19 आइटम्स पर इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद से रुपये को सपोर्ट मिला.

गुरूवार को रुपया 19 पैसे मजबूत होकर 72.42 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. बुधवार को रुपया 72.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. सरकार द्वारा 19 आइटम्स पर इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद से रुपये को सपोर्ट मिला. क्रूड की कीमतें बढ़ने, ट्रेड वार, कैड बढ़ने की आशंका, डॉलर में मजबूती, घरेलू स्तर पर निर्यात घटने और राजनैतिक अस्थिरता जैसे फैक्टर्स की वजह से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.

इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की घोषणा

सरकार ने 19 नॉन इसेंशियल आइटम्स पर इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की है, जिसके बाद से रुपये में मजबूती दिख रही है. पिछले फिस्कल में इन 19 आइटम्स के इंपोर्ट पर कुल 1184 करोड़ डॉलर खर्च हुआ था.

पिछले 10 दिन में रुपये की चाल

— बुधवार को रुपया 72.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
— मंगलवार को रुपया 72.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
— सोमवार को रुपया 43 पैसे की गिरावट के साथ 72.63 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ.
— शुक्रवार के कारोबार में रुपया 72.20 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
— बुधवार को रुपया 72.37 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
— मंगलवार को रुपया 47 पैसे टूटकर 72.98 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ.
— सोमवार को रुपया 70.51 के भाव पर बंद हुआ था.
— शुक्रवार को रुपया 71.85 के भाव पर बंद हुआ.
— बुधवार को रुपया 72.91 का लो और 71.91 का हाई छूने के बाद 72.19 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
— मंगलवार को रुपया 72.69 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ था.

क्यों गिर रहा है रुपया?

1. डॉलर की मांग और आपूर्ति बढ़ी

दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए आमतौर पर डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर स्थानीय करंसी कमजोर होती है. एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है. वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है.”

2. निर्यात घटना भी बड़ी वजह

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाता घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है. जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा. दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया.

3. राजनीतिक अस्थिरता भी बिगाड़ रही रुपये का बाजार

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है. आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि घरेलू करंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है. जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं.”

4. अमेरिका की मजबूती से लग रहा है झटका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.

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