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Forex Market: रुपया पहली बार 74 के पार बंद, 1 डॉलर का भाव हुआ 74.06 रुपये

रुपये में गिरावट सोमवार को भी जारी है. कारोबार के शुरू में रुपया 18 पैसे कमजोर होकर 73.95 प्रति डॉलर पर खुला. शुक्रवार को रुपया 73.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

October 8, 2018 5:50 PM
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रुपये में गिरावट सोमवार को भी जारी है. डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 74 रुपये के पार बंद हुआ. सोमवार को एक डॉलर की कीमत 74.06 रुपये हो गई. कारोबार के शुरू में रुपया 18 पैसे कमजोर होकर 73.95 प्रति डॉलर पर खुला. वहीं, कारोबार के दौरान इसने फिर 74 प्रति डॉलर का स्तर पार किया. इसके पहले शुक्रवार को आरबीआई द्वारा ब्याज दरें न बढ़ाए जाने के फैसले से रुपये ने 74 का स्तर पार किया था. शुक्रवार को रुपया 73.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

बता दें कि आरबीआई की मॉनेटरी पालिसी मीटिंग में ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया था. जानकारों के मुताबिक करंसी मार्केट को उम्मीद थी कि रुपये में गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि क्रूड की कीमतें बढ़ने से रुपये में और गिरावट आ सकती है.

एक्सपर्ट्स का मानना था कि डॉलर के मुकाबले लगातार ​गिरते रुपये को संभालने के लिए RBI रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर सकता है. पिछले दिनों रुपये में गिरावट को थामने की आरबीआई की कोशिश कुछ खास सफल नहीं हुई. इस वजह से ना सिर्फ इंपोर्ट महंगा हुआ है, बल्कि चालू खाता घाटा (CAD) और बढ़ने का डर बन गया है.

ब्याज दर, रुपये और क्रूड का कनेक्शन

जब रुपये में गिरावट आती है तो विदेशी व्यापार में डॉलर के मुकाबले रुपये में ज्यादा मूल्य देना पड़ता है. इसके चलते देश से करेंसी बाहर ज्यादा जाती है और बदले में विदेशी करेंसी की प्राप्ति कम रहती है. इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और इकोनॉमी कमजोर होती है. जब क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं तो क्रूड के आयात के लिए ज्यादा मूल्य चुकाना होता है. इससे भी देश से करेंसी ज्यादा मात्रा में बाहर जाती है. साथ ही महंगा क्रूड खरीदने के चलते आॅयल कंपनियां देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाती हैं और इससे ट्रांसपोर्टेशन और हर उस काम की लागत बढ़ जाती है, जिसमें पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल होता है. लिहाजा महंगाई भी बढ़ती है.

अगर RBI द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की जाती है तो बैंकों को RBI से महंगा लोन मिलता है. इसके चलते वे भी कंज्यूमर को दिए जाने वाले लोन महंगे कर देते हैं, जिससे प्रोडक्शन और खरीद-फरोख्त घटती है. लिहाजा रुपये का लेन-देन भी घटता है.

पिछले 10 दिन में रुपये की चाल

– शुक्रवार को रुपया 73.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
– गुरूवार को रुपया 73.57 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
– बुधवार को रुपया 73.24 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
– सोमवार को रुपया 43 पैसे कमजोरी के साथ 72.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
– शुक्रवार को रुपया 72.48 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.
– गुरूवार को रुपया 72.59 के स्तर पर बंद हुआ था.
– बुधवार को रुपया 72.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
– मंगलवार को रुपया 72.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
– सोमवार को रुपया 43 पैसे की गिरावट के साथ 72.63 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ.
– शुक्रवार के कारोबार में रुपया 72.20 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था.

क्यों गिर रहा है रुपया?

1. डॉलर की मांग और आपूर्ति बढ़ी

दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए आमतौर पर डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर स्थानीय करंसी कमजोर होती है. एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है. वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है.”

2. निर्यात घटना भी बड़ी वजह

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाता घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है. जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा. दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया.

3. राजनीतिक अस्थिरता

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है. आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि घरेलू करंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है. जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं.”

4. अमेरिका की मजबूती से लग रहा है झटका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.

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