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फ्लिपकार्ट-आदित्य बिरला फैशन की प्रस्तावित डील पर CAIT ने उठाए सवाल, कहा- FDI पॉलिसी का उल्लंघन

आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल की योजना फ्लिपकार्ट को 7.8 फीसदी हिस्सेदारी करीब 1500 करोड़ रुपये में बेचने की है.

October 28, 2020 1:39 PM
Flipkart-Aditya Birla Fashion dealकोरोना महामारी ने भी रिटेल कारोबार को तगड़ा झटका दिया है. (Image: Bloomberg)

ट्रेडर्स बॉडी कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल और वॉलमार्ट (Walmart) के स्वामित्व वाले फ्लिपकार्ट ग्रुप (Flipkart) की प्रस्तावित डील पर सवाल उठाए हैं. कैट ने कहा है यह डील सरकार की FDI पॉलिसी का उल्लंघन है. आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल की योजना फ्लिपकार्ट को 7.8 फीसदी हिस्सेदारी करीब 1500 करोड़ रुपये में बेचने की है. कैट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र भेजकर इस सौदे को अनुमति न देने की मांग की है और कहा है की सरकार इस सौदे की शर्तों को पहले समझे और किस प्रकार से एफडीआई पालिसी का उल्लंघन हो रहा है, उसको दूर करके ही कोई इजाजत दे.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार, स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में आदित्य बिरला फैशन रिटेल ने बताया है कि वालमार्ट के स्वामित्व वाली कंपनी फ्लिपकार्ट उसकी कंपनी में 7.8 फीसदी हिस्सा खरीद रही है. इस सौदे के बाद फ्लिपकार्ट ईकॉमर्स प्लेटफार्म पर आदित्य बिरला फैशन रिटेल एक प्रेफर्ड सैलर के रूप में काम करेगा. यह सीधे तौर पर एफडीआई पालिसी के प्रेस नोट न. 2 /2018 के पैरा 5 .2.15.2 .4(v) का उल्लंघन है.

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रिटेल ट्रेडिंग में नहीं है अनुमति!

मौजूदा एफडीआई पॉलिसी किसी भी विदेशी कंपनी को ऐसी किसी भी कंपनी में जिसमें उसका निवेश हो , को ई-कामर्स सहित मल्टी ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग में किसी भी प्रकार के समझौते की अनुमति नही देती है. फिर वो ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से जुड़ा हो या बिजनेस टू बिजनेस के तहत ईकॉमर्स पर सामान बेचना हो.

इस प्रावधान के मुताबिक, फ्लिपकार्ट का निवेश करने के बाद आदित्य बिरला फैशन रिटेल फ्लिपकार्ट या उससे संबंधित किसी भी ई-कॉमर्स पोर्टल पर अपना सामान बेचने के लिए प्रतिबंधित हो जाता है. जबकि ठीक इससे उलट आदित्य बिरला कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए अपने घोषणा वक्तव्य में फ्लिपकार्ट के पोर्टल पर अपना सामान बेचने की बात कही है.

कोरोना से भी छोटे व्यापारियों को बड़ा नुकसान

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया का कहना है कि सरकार ने इस मुद्दे को पहले ही समझते हुए एफडीआई पालिसी में इस संभावना को प्रतिबंधित कर दिया था. इससे देश में ई कॉमर्स के माध्यम से व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ देश के छोटे व्यापारियों को भी नुकसान न हो. कैट का कहना है कि यह विदेशी निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब विदेशी ईकॉमर्स कंपनियों ने पहले ही हमारे देश के रिटेल व्यापार को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है. बाद में कोरोना महामारी ने भी रिटेल कारोबार को तगड़ा झटका दिया है.

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