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निवेशकों को डेट म्यूचुअल फंड में क्यों लगाना चाहिए पैसा? इन वजहों से आगे होगा फायदा

Fixed Income: साल 2020 जहां निवेशकों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है, यह एसेट मार्केट के लिए अच्छा रहा है.

December 12, 2020 7:27 AM
Debt Mutual FundDebt Mutual Fund: साल 2020 जहां निवेशकों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है.

साल 2020 जहां निवेशकों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है, यह एसेट मार्केट के लिए अच्छा रहा है. अर्थव्यवस्था या स्ट्रक्चरल इश्यू से जो चुनौतियां बनी थीं, उसकी भरपाई केंद्रीय बैंकों ने तरलता बढ़ाकर और राहत पैकेज के जरिए की है. पिछले दिनों बाजार में जो तेजी आई है, उसपर फंडामेंटल वैल्युएशन और लिक्विडटी से बढ़ने वाली रैली को लेकर बहस छिड़ी है. लेकिन बॉन्ड मार्केट में यह थोड़ा अलग है.

पिछले दिनों क्या हुआ

  • मार्च 2020 में, बॉन्ड मार्केट फ्रीज में चला गया. यहां तक ​​कि लिक्विड फंड्स ने कुछ दिनों के लिए नकारात्मक रिटर्न दिया.
  • वर्क फ्रॉम ​होम के इनिशिएल फेज में ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम हो गया. लोगों के पास घर पर इंटरनेट जरूर होता है, लेकिन विशेष ट्रेडिंग सिस्टम आफिस में ही होते हैं. VPN आदि के जरिए इन चीजों को धीरे-धीरे सुलझाया गया, लेकिन इसमें कुछ समय लगा.
  • बैंक अनिश्चितता और साल के अंत के करीब होने की पजह से बॉन्ड पोजिशन पर विचार नहीं कर रहे थे. वे केवल रिवर्स रेपो में आरबीआई के साथ सरप्लस लिक्विडिटी पार्क कर रहे थे.
  • FIIs /FPIs मार्च में भारी बिकवाली कर रहे थे.
  • लोग RBI के उपायों का इंतजार कर रहे थे. आरबीआई द्वारा कुछ (OMO, LTRO) किया जा रहा था, लेकिन मार्केट पार्टीसिपेंट को अधिक उम्मीद थी. इस दौरान उन्होंने खरीददारी नहीं की.
  • सेंटीमेंट्स नेगेटिव होने के कारण म्यूचुअल फंड्स को रिडेम्पशन प्रेशर का सामना करना पड़ा. म्यूचुअल फंड से भी लोगों ने पैसे निकाले. बाजार पर बिकवाली का अधिक दबाव था, जिससे ये दिक्कत आई. लिक्विड फंड्स में मार्च एडवांस-टैक्स से संबंधित आउटफ्लो देखा गया.
  • ओवरनाइट फंड को सुरक्षित माना जाता है, जिससे बहुत से लोगों ने उनमें निवेश किया. ओवरनाइट फंड या TREPS मार्केट में बहुत ज्यादा मांग की वजह से दरों में भारी कमी आई, लेकिन फिर भी पॉजिटिव थे. इस दौरान भी ओवरनाइट फंड ने निगेटिव रिटर्न नहीं दिया.

काम आए RBI के उपाय

धीरे-धीरे आरबीआई ने कुछ उपाय किए, जिससे चीजें बेहतर हुई हैं. RBI पॉलिसी रिव्यू 27 मार्च को रोक दी गई थी. आरबीआई ने ​इस साल रेपो रेट में कमी की गई. कॉरपोरेट बांड खरीदने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का टारगेटेड लांग टर्म रेपो आपरेशंस (TLTRO) का प्रावधान किया गया. इसका उपयोग गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के लिए नहीं किया जा सकता था. इससे कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को सपोर्ट मिला. आरबीआई से मिली मदद से बैंकों ने खरीददारी की. TLTRO कॉर्पोरेट बॉन्ड बैंकों के लिए मार्क-टू-मार्केट वोलैटिलिटी से फ्री थे. अब तक की खरीदारी बेहतर क्वालिटी वाले बॉन्ड (PSU, AAA) में थी. लेकिन अन्य सेग्मेंट (less than AAA / NBFC) को सपोर्ट नहीं मिल रहा था. इसलिए 17 अप्रैल को 50,000 करोड़ रुपये के TLTRO 2 का अगला एलान NBFC और MFI को ध्यान में रखकर किया गया.

पूरे साल के दौरान RBI ने रेट कट (फरवरी 2020 के बाद से रेपो रेट में 1.15% की कटौती) के माध्यम से सपोर्ट सिस्टम को चालू रखा. वहीं अन्य उपायों मसलन रिवर्स रेपो को 3.35% तक आगे कम कर दिया, तरलता के उपाय किए गए. गवर्नमेंट सिक्योरिटीज उधार कार्यक्रम के लिए ओएमओ खरीद, स्टेट डेवलपमेंट लोन पर ओएमओ जैसे उपाय किए. वहीं, आरबीआई ने आगे भी दरों पर अकोमोडेटिव रुख बरकरार रखा और बाजार को सपोर्ट करने की बात कही.

आगे क्या

2020 में यील्ड का स्तर लिक्विडिटी से समर्थित रहा; 10-साल के G-Sec की यील्ड अभी 6 फीसदी है और 3 महीने के ट्रेजरी बिल रिवर्स रेपो रेट से कम को 3.35 फीसदी पर है. 2021 में गवर्नमेंट बॉरोइंग बहुत बड़ा होने जा रहा है. जब तक आरबीआई का समर्थन रहेगा, बाजार वहीं रहेगा जहां वह है. हालांकि, भविष्य में कहीं भी, 2021 में या उसके बाद RBI को अत्यधिक लिक्विडिट से बाहर निकलने के बारे में सोचना होगा. यह बॉन्ड मार्केट में यील्ड लेवल के लिए टर्निंग प्वॉइंट होगा. डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए, रिटर्न अधिक रियलिस्टिक होगा क्योंकि 2020 में कैरी यील्ड (पोर्टफोलियो YTM) में कमी आई है.

 

(By Joydeep Sen, corporate trainer, debt markets)

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