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ISA स्टील कॉन्क्लेव: इनोवेशन के जरिए क्वालिटी स्टील उत्पादन पर फोकस करें कंपनियां- इस्पात मंत्री

इस्पात क्षेत्र के विकास और कच्चे स्टील उत्पादन की क्षमता पर जोर देने के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल 6% ज्यादा उत्पादन

Updated: Oct 26, 2018 7:35 AM
first international isa steel conclave steel minister chaudhary birendra singh says its time to focus on innovationकॉन्क्लेव का आयोजन इंडियन स्टील एसोसिएशन आईएसए और मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया ने किया है. 

केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय स्टील उद्योग का लक्ष्य 2030 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 30 करोड़ टन पर लाना है. साथ ही उन्होंने स्टील कंपनियों से इनोवेशन पर फोकस बढ़ाने की भी अपील की. गुरुवार को पहले आईएसए स्टील कॉन्क्लेव के मौके पर इस्पात मंत्री ने यह बात कही. कॉन्क्लेव का आयोजन इंडियन स्टील एसोसिएशन आईएसए और मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया ने किया है.

बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 इस्पात उद्योग के लिए नई शुरुआत का वर्ष रहा है, क्योंकि इस्पात क्षेत्र के विकास और कच्चे स्टील उत्पादन की क्षमता पर जोर देने के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल 6 फीसदी ज्यादा उत्पादन दर्ज किया गया. पहली तिमाही में हमने जापान को पीछे छोड़ दुनिया में स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनने की बाधाओं को पार कर लिया. हमने 5.2 करोड़ टन कच्चे स्टील के उत्पादन के लक्ष्य को भी हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में 6 फीसदी अधिक है. ऐसे में अब स्टील उद्योग को वैश्विक अवसरों और उपभोक्ताओं को आकर्षित करने वाली गुणवत्ता इनोवेशन को शुरू करने की दिशा में अधिक सक्रिय होना होगा.

इनोवेशन अभी भी बड़ी चुनौती

इस्पात मंत्री ने कहा कि अच्छे इंजीनियरों और साइंटिस्ट होने के बावजूद भारत स्टील टेक्नोलॉजी में इनोवेशन के मामले में अग्रणी नहीं है. टेक्नोलॉजी को अपडेट कर देना इनोवेशन नहीं होता. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि विश्व के शीर्ष इस्पात निर्माता भारत के इस्पात उद्योग को प्रभावित करने, उन्हें चुनौती देने और बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं.

 

स्टील इंडस्ट्री को आॅटो सेक्टर से सीखने की जरूरत: टाटा स्टील

टाटा स्टील लिमिटेड के ग्लोबल सीईओ और प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन ने कहा कि सभी विकसित देशों के पास मजबूत उपकरण एवं निर्माण सेट-अप है, जिसे भारत में बनाने की भी आवश्यकता है. स्टील उद्योग को ऑटो सेक्टर से सीखने की भी जरूरत है जिसने पिछले 25 वर्षों में जबरदस्त पैमाने पर उत्पादकता हासिल की है. हमें उन क्षमताओं को बनाने या विकसित करने की जरूरत है, जो पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ हों. इन चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता है, जिसके दम पर हम समावेशी विकास कर सकते हैं.

जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कहा कि वर्ष 2030 के लिए इस्पात उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए श्रम और लौह अयस्क के माध्यम से भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता की ताकत को कमजोर नहीं होने देना चाहिए.

इस्पात इंडस्ट्री के 150 से अधिक प्रतिनिधि हुए शामिल

इस पहले इंटरनेशनल स्टील कॉन्क्लेव के पहले दिन जेएसडब्ल्यू समूह, टाटा स्टील, जेएसपीएल, एस्सार ग्रुप, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, इस्पात निगम लिमिटेड के अलावा इस्पात इंडस्ट्री के 150 से अधिक दिग्गजों सहित अन्य प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए. कॉन्क्लेव में इस्पात मंत्रालय, व्यापार जगत और एसोसिएशंस की ओर से दो सौ से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.

कॉन्क्लेव में टाटा स्टील लिमिटेड के वैश्विक सीईओ और प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अध्यक्ष नवीन जिंदल, इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड के अध्यक्ष अनिल चौधरी, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं इस्पात प्रबंधन के निदेशक पीके रथ और इस्पात मंत्रालय में विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार सरस्वती प्रसाद शामिल थे.

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