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  1. Air India की बिक्री की नए सिरे से चल रही तैयारी, पिछले साल नहीं मिला था खरीदार

Air India की बिक्री की नए सिरे से चल रही तैयारी, पिछले साल नहीं मिला था खरीदार

नए प्रस्ताव में कच्चे तेल की कीमतों एवं विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसे मुद्दों को शामिल किए जाने की संभावना है.

June 19, 2019 8:42 PM
Finance Ministry to prepare fresh proposal for Air India saleImage: Reuters

वित्त मंत्रालय सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया (Air India) की बिक्री को लेकर नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर रहा है. नए प्रस्ताव में कच्चे तेल की कीमतों एवं विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसे मुद्दों को शामिल किए जाने की संभावना है. सलाहकार कंपनी ईवाई ने पिछले साल इन्हें संभावित कारणों में गिना था, जिसकी वजह से एयर इंडिया को कोई खरीदार नहीं मिला था.

मंत्रालय के प्रस्ताव को एअर इंडिया विशिष्ट वैकल्पिक तंत्र (AISAM) के पास भेजा जाएगा. इसमें मंत्रालय एअर इंडिया में सरकार की 100 प्रतिशत या 76 प्रतिशत की हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रख सकता है. AISAM मुख्य रूप से मंत्रियों का समूह है. अरुण जेटली एवं सुरेश प्रभु के नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने के कारण इसका पुनर्गठन करना होगा. इन दोनों के स्थान पर अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं हरदीप हरदीप सिंह पुरी को शामिल किया जाएगा. समिति के पुनर्गठन के समय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को फिर से शामिल किए जाने की संभावना है.

इन वजहों से विफल रही बिक्री प्रक्रिया

सरकार ने पिछले साल एअर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं लेकिन किसी ने बोली नहीं लगाई. इसके बाद विलय एवं अधिग्रहण को लेकर परामर्श देने वाली कंपनी ईवाई ने एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें बिक्री प्रक्रिया के विफल रहने के कारणों का उल्लेख किया गया था. इन कारणों में सरकार की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी, अत्यधिक कर्ज, कच्चे तेल की कीमतों एवं विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वृहत माहौल में बदलाव एवं अन्य कारणों को गिनाया गया था.

EY की रिपोर्ट पर जून 2018 में हुई थी चर्चा

एक अधिकारी ने बताया कि ईवाई की रिपोर्ट पर पिछले साल जून में एआईएसएएम की बैठक में चर्चा हुई थी. इसके बाद एअर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया को टाल दिया गया था. अधिकारी ने कहा, ‘हम एअर इंडिया की बिक्री को लेकर एक नया प्रस्ताव एआईएसएएम के समक्ष रखेंगे. पिछले साल एअर इंडिया के विनिवेश के विफल रहने के बाद उठाए गए मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा. एआईएसएएम को यह तय करना होगा कि सरकार 100 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री करेगी या 76 प्रतिशत की.’

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