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GST राजस्व बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है वित्त मंत्रालय

आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये GST कलेक्शन का लक्ष्य रखा है.

September 9, 2018 5:54 PM
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माल और सेवाकर (GST) व्यवस्था के तहत राज्यों को राजस्व नुकसान के बदले दिए जाने वाले मुआवजे में चार गुना बढ़ोत्तरी होने से चिंतित वित्त मंत्रालय GST संग्रहण बढ़ाने को लेकर रणनीति बना रहा है. इसके लिए वह राज्यों के साथ मिलकर उन मुद्दों की पहचान कर रहा है जो उनके जीएसटी संग्रहण में बाधक हैं.

वित्त सचिव हसमुख अधिया ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों के जीएसटी अधिकारियों के साथ बैठक शुरू की है. बता दें कि दो माह में एक बार केंद्र द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले GST मुआवजे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जून और जुलाई में केंद्र ने राज्यों को मुआवजे के तौर पर 14,930 करोड़ रुपये दिए जो अप्रैल-जून में इस दौरान दिए गए 3,899 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग चार गुना अधिक है.

एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘GST राजस्व बढ़ाने के लिए एक रणनीति बनायी जा रही है. हर राज्य को मुआवजे के तौर पर दी जाने वाली राशि हर माह अलग होती है. इसकी कोई स्थापित व्यवस्था नहीं है.’’ अधिकारी ने बताया कि जीएसटी संग्रहण बढ़ाए जाने की रणनीति पर पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पुडुच्चेरी और जम्मू-कश्मीर के साथ पहले ही बातचीत हो चुकी है. इस महीने के अंत तक बिहार और उत्तराखंड के साथ इस बारे में बाचचीत की जाएगी.

आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये GST कलेक्शन का लक्ष्य रखा है. अप्रैल को यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच गया था पर बाकी महीनों में यह 94,000 करोड़ रुपये से लगभग 96,500 करोड़ रपए के दायरे में रहा है.

जीएसटी कानून के तहत केंद्र पांच साल तक राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई करने को प्रतिबद्ध है. इसके लिए वर्ष 2015-15 के उनके राजस्व को आधार बना कर सालाना 14 फीसदी से कम की राजस्व बढ़ोतरी को हानि मान का उसकी भरपाई किए जाने की व्यवस्था है. वर्ष 2017-18 में राज्यों को इस मद में कुल 41,147 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था. इस क्षतिपूर्ति के लिए विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर उपकर का प्रावधान किया गया है.

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