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इक्विटी Vs म्यूचुअल फंड Vs गोल्ड: निवेश के लिए ऐसे बनाएं स्ट्रैटेजी, मंदी के जोखिम से मिलेगी सुरक्षा

ग्लोबल मंदी और घरेलू बाजारों पर इसके असर से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.

Published: August 29, 2019 7:53 AM
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ग्लोबल मंदी और घरेलू बाजारों पर इसके असर से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. इक्विटी मार्केट हो या म्यूचुअल फंड दोनों ही सेग्मेंट में निवेशकों को पिछले कुछ महीनों से निगेटिव रिटर्न मिल रहा है. सेंसेक्स अपने हाई से 2800 अंक और निफ्टी करीब 1000 अंक टूट चुका है. वहीं, म्यूचुअल फंड की भी ज्यादातर कटेगिरी में निवेशकों को निगेटिव रिटर्न मिल रहा है. ऐसे में निवेशक पुराने निवेश पर नुकसान को लेकर जहां चिंतित हैं, वहीं नया निवेश करने से भी डर रहे हैं. हालांकि इस पर एक्सपर्ट की राय अलग है. उनका कहना है कि मंदी का यह दौर आगे मुनाफा कमाने का बेहतर मौका है. बस पोर्टफोलियो को समझदारी से तैयार करने की जरूरत है.

एक्सपर्ट का कहना है कि बहुत से निवेशक डरे हुए हैं. वे ऐसी सलाह मांग रहे हैं कि क्या उन्हें अपना पूरा निवेश इक्विटी या म्यूचुअल फंड से निकाल लेना चाहिए. या एसआईपी बंद कर देनी चाहिए. क्या इसकी बजाए बुलियन या सेविंग्स के दूसरे विकल्पों मसलन बैंक या डाक घर के सेविंग्स स्कीम में पैसा लगाना चाहिए. उनका कहना है कि यह मंदी स्थाई नहीं है, आगे घरेलू और ग्लोबल सेंटीमेंट सुधरने पर एक बार फिर बाजार में तेजी आएगी. वैसे भी भले ही बीते 6 महीनों में रिटर्न निगेटिव रहा हो पिछले 3 से 5 साल का रिकॉर्ड देखें तो अच्छे शेयर और फंड दोनों में रिटर्न बेहतर रहा है.

इक्विटी मार्केट (Stock Market)

मंदी के दौर में सेंसेक्स अपने हाई से 7 फीसदी और निफ्टी 8.5 फीसदी तक टूट चुका है. मिडकैप और स्मालकैप शेयरों में और ज्यादा गिरावट रही. ब्रॉडर मार्केट में 60 फीसदी से ज्यादा शेयरों का रिटर्न पिछले 3 माह में निगेटिव रहे हैं.

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि हर एक साइकिल के बाद बाजारों में स्लोडाउन आता है. लेकिन यह बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगा. सरकार का फोकस लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों पर हैं. हाल ही में वित्त मंत्री ने स्लोडाउन को देखते हुए कुछ एलान किए हैं और आगे भी आर्थिक उपायों के संकेत दिए हैं. उम्मीद है कि आगे मैक्रो कंडीशन बेहतर होंगे.

ऐसे में यह दौर अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने का है. कई अच्छी कंपनियों के शेयर मंदी के दौर में 40 से 50 फीसदी तक या इससे भी ज्यादा सस्ते हो गए हैं. निवेशक अगर यहां से 2 से 3 साल का नजरिया बनाकर 50 फीसदी तक डिस्काउंट पर मिल रहे बेहतर शेयरों में निवेश करें तो आने वाले दिनों में उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है. वहीं, जो पहले से निवेश किए हुए हैं और नुकसान में हैं, उन्हें निवेश में बने रहना चाहिए. बाजार में रिकवरी लौटने का इंतजार करना चाहिए.

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)

म्यूचुअल फंड की बात करें तो पिछले 1 साल के दौरान खासतौर से इक्विटी फंड की सभी कअेगिरी में निगेटिव रिटर्न मिला है. लॉर्जकैप सेग्मेंट में 5.51 फीसदी, लॉर्ज एंड मिडकैप में 9.35 फीसदी, मल्टीकैप फंड में 7.82 फीसदी गिरावट रही तो मिडकैप सेग्मेंट में करीब 14 फीसदी और स्मालकैप में 16.77 फीसदी गिरावट रही. वैल्यू ओरिएंटेड और ईएलएसएस में भी 12.58 फीसदी और 8.53 फीसदी गिरावट रही.

फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि 3 महीने या 1 साल की अवधि में भले ही दबाव रहा है, अगर 3 से 5 साल की अवधि की बात करें तो इन सभी सेग्मेंट ने 8.21 फीसदी से 9.44 फीसदी तक रिटर्न दिया है. ऐसे में जिन निवेशकों ने पैसा लगाया है, उन्हें एसआईपी को बंद करने की बजाए जारी रखना चाहिए. गिरावट का फायदा यह है कि ज्यादातर फंड में करेक्शन है, ऐसे में निवेशकों को ज्यादा यूनिट का फायदा मिल जाएगा.

नए निवेशकों के लिए सलाह है कि अगर कम से कम 5 साल के लिए निवेश का लक्ष्य है तो इक्विटी म्यूचुअल फंड की बेहतर स्कीम चुनें. वहीं, 2 से 3 साल का लक्ष्य है तो डेट फंडामें पैसा लगा सकते हैं. निवेशक अगर छोटी अवधि में म्यूचुअल फंड से पैसा कमाना चाहते हैं तो उनके लिए अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड इस समय बेहतर विकल्प है. ब्याज दरें कम बने रहने का फायदा उन्हें मिल सकता है.

गोल्ड (Gold)

इक्विटी और म्यूचुअल फंड में जहां इस साल भले ही गिरावट रही, गोल्ड और सिल्वर ने जमकर रिटर्न दिया है. इस साल की बात करें तो सोने में 24 फीसदी तेजी आ चुकी है. आगे भी ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता, यूएस और चीन के बीच ट्रेड वार और दुनियाभर की करंसी पर दबाव के अलावा यूएस फेड की नरम नीतियों से सोने में तेजी जारी रहेगी.

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि सोने में पहले ही बहुत ज्यादा तेजी आ चुकी है, ऐसे में निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 15 फीसदी अलोकेशन गोल्ड में कर सकते हैं. फिजिकल गोल्ड की बजाए गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेहतर विकल्प हैं. यहां प्योरिटी की गारंटी और सुरक्षा के साथ कई फायदे हैं.

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