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इक्विटी Vs म्यूचुअल फंड Vs गोल्ड: 2019 में कहां करें निवेश?

2019 में बेहतर रिटर्न के लिए कहां लगाएं पैसा

January 2, 2019 8:47 AM
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साल 2019 की शुरूआत हो चुकी है. बीता साल कैपिटल मार्केट के लिए आसान नहीं रहा है. पूरे साल इक्विटी मार्केट हो या म्यूचुअल फंड निवेशकों को ठंडा रिटर्न ही मिल पाया है. दूसरी ओर कई इश्यू रहे हैं, जिससे गोल्ड पर भी पूरे साल दबाव रहा. हो सकता है कि बहुत से निवेशकों को 2018 में निगेटिव रिटर्न मिलने से नुकसान हुआ हो. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 2019 में कहां निवेश करें, जिससे 2018 के नुकसान की भरपाई हो सके और बेहतर रिटर्न मिले. पढ़ें पूरी रिपोर्ट…..

Mutual Fund

2018 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री: 2017 में म्यूचुअल फंड की ज्यादातर कटेगिरी में निगेटिव रिटर्न रहा है. इसके बाद भी एसेट बेस बढ़ रहा है. Amfi के अनुसार साल 2018 में नवंबर महीने तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 13 फीसदी बढ़कर 24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. क्वांटम एसेट अंडर मैनेजमेंट कंपनी के सीईओ जिमी पटेल का कहना है कि पिछले साल बाजार में कई फैक्टर हावी रहे, मसलन क्रूड की कीमतें, रुपये में कमजोरी और शेयर बाजार में वोलेटिलिटी. इसके बाद भी SIP में कमी नहीं आई.

इन फैक्टर ने किया प्रभावित: 2018 में 2017 की तुलना में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ कुछ कमजोर रही है. IL&FS डिफॉल्ट, NBFC में लिक्विडिटी क्राइसिस, डेट फंड में कमजोरी और वोलेटाइल मार्केट की वजह से इंडस्ट्री की ग्रोथ प्रभावित रही है.

2019 में आउटलुक: एसेट म्यूचुअल फंड के CIO विराल बेरावाला का कहना है कि इंडस्ट्री में SIP के जरिए निवेश लगातार बढ़ रहा है. रिटेल इन्वेस्टर्स की संख्या बढ़ी है. जियोग्रॉफिकल पेनीट्रेशन और तकनीकी की बढ़ते रोल से इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़ रही है. BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि साल 2019 में पहले फेज में आम चुनाव होंगे. दूसरा फेज सरकार बनने के बाद का है. पहले फेज में बाजार में हाई वोलेटिलिटी दिख सकती है. दूसरे फेज में बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है. फिलहाल पूरे साल म्यूचुअल फंड से स्टेबल रिटर्न की ही उम्मीद है.

गोल तय कर ही करें निवेश: एक्सपर्ट का कहना है कि 2019 में निवेशकों को आपना गोल सेट करने के बाद ही म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए. गोल तय कर लें कि उन्हें कितने साल के लिए निवेश करना है, उसके बाद सही फंड का चुनाव करें. तय समय से पहले रिटर्न के घटने की ओर ध्यान न देकर संयम बनाए रखें. अगर निवेशकों का लक्ष्य शॉर्ट टाइम का है तो इक्विटी फंड की बजाए डेट फंड का चुनाव करें.

Equity Market

2018 में इक्विटी बाजार: 2018 शेयर बाजार के लिए उतार चढ़ाव भरा रहा है. अगस्त में आॅल टाइम हाई बनाने के बाद बाजार में बड़ी गिरावट रही. पूरे साल सेंसेक्स में 7 फीसदी और निफ्टी में 3 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिल पाया. लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स, एनबीएफसी लिक्विडिटी क्राइसिस, बैंक सेक्टर पर दबाव, क्रूड की ज्यादा कीमतें और रुपये में कमजोरी के अलावा ट्रेड वार और जियो पॉलिटिकल टेंशन जैसे फैक्टर की वजह से बाजार का प्रदर्शन प्रभावित हुआ.

2019 में बाजार का आउटलुक: एक्सपर्ट मान रहे हैं कि 2019 के पहले बाजार के लिए राहत की बात यह है कि मैक्रो लेवल पर कई निगेटिव फैक्टर डिस्काउंट हो चुके हैं या हो रहे हैं. मसलन क्रूड की कीमतों में 1 साल में 20 फीसदी गिरावट, रुपये में पिछले कुछ दिनों में 8 फीसदी मजबूती आ चुकी है. ये दोनों ही फैक्टर इकोनॉमी के लिए बेहद मजबूत हैं. इससे जहां कैड घटने की उम्मीद है, वहीं महंगाई भी कंट्रोल रहेगी. हालांकि 2019 के आम चुनाव और ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर अनिश्चितता बाजार के लिए अभी भी चिंता की बात है.

एपिक रिसर्च के सीईओ नदीम मुस्तफा का कहना है कि 2019 की दूसरी छमाही में ही बाजार को स्टेबल होने का मौका मिलेगा. दूसरी छमाही तक बाजार में जो भी करेक्शन आएगा, उससे खरीददारी का मौका बनेगा. एक बार बाजार स्टेबल होने के बाद सालाना आधार पर डबल डिजिट में रिटर्न दे सकता है. निफ्टी 12000 का स्तर पार कर सकता है.

निवेशकों के लिए सलाह: एक्सपर्ट का कहना है कि बाजार अभी भी वोलेटिलिटी के दौर में है जो 2019 के पहले कुछ महीनों में जारी रहेगी. साल के अंत तक बाजार स्टेबल दिख सकता है. इस वजह से निवेशक शॉर्ट टर्म या मिड टर्म के लिहाज से निवेश से बचें. अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों की पहचान कर लंबी अवधि के लिए निवेश का विकल्प चुनें.

Gold

Gold 2018: साल 2018 में सोना ने इक्विटी बाजार के मुकाबले बेहतर रिटर्न मिला है. 2018 में सोने ने करीब 8 फीसदी रिटर्न दिया है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि सोने में यह तेजी जारी रहेगी और 2019 में यह 10 फीसदी रिटर्न दे सकता है. सोने ने ग्लोबल स्तर पर भी 1240 डॉलर प्रति औंस का अहम स्तर तोड़ दिया है. मौजूदा हालात को देखकर अनुमान है कि 2019 के पहली छमाही में यह 1338 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है.

Gold Outlook 2019: इन वजहों से मिलेगा सपोर्ट

1. यूएस इकोनॉमी का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर दिख रही है.
2. यूएस में इंटरेस्ट रेट की रफ्तार थमी है. यूएस फेड ने पहले 3 बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाए जाने के संकेत दिए थे, हालांकि फेड ने बाद में कहा है कि अगले साल 2 बार रेट बढ़ाए जा सकते हैं.
3. डॉलर इंडेक्स में तेजी थमी
4. सेंट्रल बैंकों द्वारा बॉइंग
4. दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर

कोट: अजय केडिया, केडिया कमोडिटी

2019 में 10% मिल सकता है रिटर्न

एंजेल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च अनुज गुप्ता का कहना है कि ग्लोबल अनसर्टेनिटी की वजह से गोल्ड में तेजी जारी रहेगी. पिछले 3 साल की बात करें तो गोल्ड ने 24.5 फीसदी (CAGR) रिटर्न दिया है. ग्लोबल अनसर्टेनिटी और क्रूड में बड़ी गिरावट से तो दुनियाभर की इकोनॉमी मंदी की ओर जाती दिख रही है. इससे निवेशक सेफ हैवन माने जाने वाले गोल्ड का रुख करेंगे. 2019 की बात करें तो गोल्ड में 10 से 15 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है.

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