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कोरोना संकट में मुनाफे की स्ट्रैटेजी; इक्विटी फंड Vs डेट फंड, कहां और किस स्कीम में लगाएं पैसे?

Equity Fund Vs Debt Fund: कोरोना संकट में एक बार फिर निवेशक इक्विटी की बजाए डेट फंड में शिफ्ट होने लगे हैं.

Updated: May 17, 2021 12:10 PM
Equity Vs Debt FundEquity Vs Debt Fund: कोविड 19 के बढ़ रहे मामलों के बीच निवेशक एक बार फिर सुरक्षित निवेश का विकल्प खोज रहे हैं.

Equity Fund Vs Debt Fund: कोरोना संकट में एक बार फिर निवेशक इक्विटी की बजाए डेट फंड में शिफ्ट होने लगे हैं. एसेासिएशन आफ म्यूचुअल फंड्स आफ इंडिया Amfi के डाटा के मुताबिक अप्रैल के महीने में म्यूचुअल फंड की डेट कटेगिरी में नेट इनफ्लो 100903.48 करोड़ रुपये रहा है. जबकि मार्च में यह करीब आधा 52,528.07 करोड़ रुपये था. माना जा रहा है कि कोविड 19 के बढ़ रहे मामलों के बीच निवेशक एक बार फिर सुरक्षित निवेश का विकल्प खोज रहे हैं. ऐसे में उनका झुकाव एक बार फिर इक्विटी की बजाए सुरक्षित माने जाने वाले डेट फंड की ओर बढ़ा है. अप्रैल में इक्विटी ओरिएंटेड फंडों में नेट इनफ्लो 3,437.37 करोड़ रुपये रहा है.

किस कटेगिरी में कितना आया निवेश

डेट फंडों की बात करें तो इस सेग्मेंट में लिक्विड फंड में अप्रैल में 41,507 करोड़ का नेट इनफ्लो, मनी मार्केट फंड और ओवरनाइट फंड में 20,287 करोड़ और 18,492 करोड़ का नेट इनफ्लो, लो ड्यूरेशन फंड में 9,322 करोड़, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में 1,246.52 करोड़ और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में 8919 करोड़ का नेट इनफ्लो आया है. जबकि फ्लोटर फंड में 3,352 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ है. वहीं इस दौरान बैंकिंग एंड PSU फंड में 150.91 करोड़ का आउटफ्लो हुआ है. डायनमिक बांड फंड में सबसे ज्यादा 2,103.01 करोड़ का आउटफ्लो हुआ है.

सुरक्षित रिटर्न की तलाश

मॉर्निंगस्टार इंडिया के मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि डाटा देखें तो अन्य फंडों की तुलना में शॉर्ट ड्यूरेशन वाले फंडों को बेहतरीन रिस्पांस मिला है. इससे यह साफ है कि मौजूदा कोविड संकट में एक तो निवेशक सुरक्षित रिटर्न ​की तलाश में हैं और वहीं वे अपना पैसा ज्यादा लंबा बाजार में नहीं फंसाना चाहते हैं. मनी मार्केट और शॉर्ट ड्यूरेशन फंड उनकी पसंद बने हैं.

BPN फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि निवेशकों को डर है कि कोरोना संकट बढ़ता है तो इक्विटी मार्केट में गिरावट बढ़ सकती है. पिछले साल लॉकडाउन के समय बाजार जिस तरह से गिरा था, वह भी निवेशकों के ध्यान में है. इस वजह से वे ऐसे निवेश की तलाश में हैं, जहां परंपरागत स्माल सेविंग्स स्कीम से बेहतर रिटर्न पा सकें और निवेश में रिस्क भी कम हो. इसी वजह से डेट सेग्मेंट की शॉर्ट ड्यूरेशन वाली कटेगिरी में निवेश बढ़ा है.

क्या करना चाहिए

निगम का कहना है कि अभी की बात करें तो निवेशकों को आगे के लिए छोटी अवधि के विकल्पों पर ही फोकस करना चाहिए. इसमें ओवरनाइट फंड, मनी मार्केट, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड आते हैं. लंबी अवधि के लिए बांड फंड बेहतर विकल्प हैं. आरबीआई जिस तरह से उपाय कर रही है, आगे बांड मार्केट में तेजी आएगी. कॉरपोरेट बांड और डायनमिक बांड कटेगिरी बेहतर विकल्प है. वहीं अगर इक्विटी सेग्मेंट की बात करें तो 2 कटेगिरी ही अभी चुनने की सलाह है. इनमें लॉर्ज एंड मिडकैप और मल्टीकैप शामिल हैं. लॉर्जकैपख्, मिडकैप और स्मालकैप में अभी बाजार सुधरने का इंतजार करें.

(Disclaimer: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने स्तर पर पड़ताल कर लें या अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श कर लें. फाइनेंशियल एक्सप्रेस किसी भी फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है.)

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