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5 महीने बाद रोजगार में आई गिरावट, फेस्टिव सीजन और खरीफ कटाई भी नहीं बढ़ा पाए जॉब; CMIE के डेटा से खुलासा

पांच महीने बाद अक्टूबर में पहली बार रोजगार में गिरावट आई है.

Updated: Nov 05, 2020 5:46 PM
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पांच महीने बाद अक्टूबर में पहली बार रोजगार में गिरावट आई है. कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में मार्च में लॉकडाउन लगाया गया था. उसके बाद मई से रिकवरी होने के बाद पहली बार अक्टूबर में रोजगार में गिरावट हुई. पिछले महीने कामकाजी लोगों की संख्या में 5.5 लाख की गिरावट हुई. यह खुलासा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी आंकड़ों से हुई है.

त्यौहारी महीने के बावजूद बुरी तस्वीर

लेबर मार्केट के तीन प्रमुख रेशियो लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलपीआर), बेरोजगारी दर और रोजगार दर में अक्टूबर के तीसरे हफ्ते के अंत तक बुरा ट्रेंड दिखा. हालांकि अक्टूबर त्यौहारी महीना है, यह खरीफ फसलों की कटाई का महीना है और कुछ राज्यों में चुनाव है, इसके बावजूद ये फैक्टर्स रोजगार को लेकर अच्छी तस्वीर पेश नहीं कर पाए.

मई से लेकर सितंबर तक बढ़ोतरी

अक्टूबर के पहले मई से लेकर सितंबर तक रोजगार में बढ़ोतरी हुई. मई में रोजगार 3.16 करोड़, जून में 6.32 करोड़, जुलाई में 1.53 करोड़ बढ़ा. यह बढ़ोतरी सितंबर तक रही. इसके बाद अक्टूबर में इसमें गिरावट आई. हालांकि रोजगार में गिरावट बहुत कम है लेकिन यह मायने रखता है क्योंकि यह ऐसे समय हुआ है जब रोजगार की मांग ने बाजार को आश्चर्यचकित किया है. अक्टूबर में ऐसे बेरोजगारों की संख्या करीब 1.2 करोड़ बढ़ी है जिन्हें काम चाहिए.

लॉकडाउन से पहले की तुलना में 2% कम है भागीदारी

अप्रैल में लेबर पार्टिसिपेशन रेट (श्रमिक भागीदारी दर) 7.8 फीसदी गिर गया. इसके बाद यह मई और जुलाई के बीच 5.04 फीसदी रिकवर हुआ. जुलाई के बाद अगले तीन महीनों में इसमें खास रिकवरी नहीं दिखी. लॉकडाउन लगाए जाने के पूर्व से तुलना करें तो इस समय करीब दो फीसदी का लेबर पार्टिसिपेशन रेट कम है.
अक्टूबर में एलपीआर 40.66 फीसदी रहा. सितंबर में भी यह इतना ही था लेकिन अक्टूबर में बेरोजगारी दर सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में 6.7 फीसदी बढ़ गया. अक्टूबर में बेरोजगारी दर 7 फीसदी की दर से बढ़ी. रोजगार दर भी अक्टूबर में चिंताजनक रहा. यह सितंबर में 38 फीसदी की तुलना में गिरकर 37.8 फीसदी पहुंच गया. सीएमआईई ने इसकी व्याख्या किया है कि यह निष्क्रिय एलपीआर और बेरोजगारी दर के बढ़ने से मिलकर उपजी स्थिति है.

अक्टूबर के चौथे हफ्ते में दिखा सुधार

अक्टूबर के चौथे सप्ताह में स्थिति में कुछ सुधार दिखा और एलपीआर में बढ़त दिखी. इसके अलावा 1 नवंबर को खत्म होने वाले सप्ताह में रोजगार दर बेहतर रहा. सेवा और निर्माण क्षेत्र को लेकर आईएचएस मार्किट द्वारा जारी पीएमआई रिपोर्ट से भी यह संकेत मिलता है कि अक्टूबर में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के बावजूद रोजगार कम हुआ है.

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