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  1. खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट, इन वजहों से आगे भी बनी रह सकती है नरमी

खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट, इन वजहों से आगे भी बनी रह सकती है नरमी

पिछले दो महीनों में खाने वाले तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई.

April 10, 2019 6:57 AM
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पिछले दो महीनों में खाद्य तेलों (Edible Oil) की कीमतों में गिरावट देखी गई. खाद्य तेलों में गिरावट की मुख्य वजह मांग की तुलना में अधिक आवक है. बीते दो महीने के बात करें तो सोयाबीन, सरसों, सोया ऑयल और क्रूड पाम ऑयल की कीमतें घटी हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि पर्याप्त स्टॉक और रुपये की मजबूती के चलते आने वाले दिनों में भी कीमतों में गिरावट बन रह सकती हैं.

ब्रोकरेज फर्म एंजेल ब्रोकिंग में कमोडिटीज एंड करेंसीज रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने फाइनेंसियल एक्सप्रेस ऑनलाइन को बताया कि Edible Oil की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह मांग की तुलना में अधिक आवक है. पिछले दो महीनों में सोयाबीन 3.69 फीसदी, सरसों 5.83 फीसदी, सोया ऑयल 6.16 फीसदी और क्रूड पॉम ऑयल 8.3 फीसदी सस्ता हुआ है. बंदरगाहों पर स्टॉक जमा है और टैरिफ कम होने व रुपये की मजबूती के कारण अभी यह गिरावट बनी रह सकती है. मलेशिया और इंडोनेशिया में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और उसकी तुलना में खपत नहीं बढ़ा है जिसके कारण कीमतों में गिरावट हो रही है.

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सोयाबीन की आवक बढ़ी

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू फसल वर्ष में अक्टूबर-फरवरी में सोयाबीन की आवक 73 लाख टन है. यह पिछले फसल वर्ष की समान अवधि की तुलना में 24.9 फीसदी अधिक है. सोपा का अनुमान है कि क्रशिंग, डायरेक्ट यूज और एक्सपोर्ट के लिए पिछले साल में 86 लाख टन की तुलना में 2018-19 में करीब 102 लाख टन सोयाबीन उपलब्ध रहेगा. सोपा देश में सोयाबीन प्रोसेसर्स, एक्सपोर्ट्स, ट्रेड इंटरमीडियरीज, फैसिलिटेटर्स और किसानों की सबसे बड़ी बॉडी है.

अधिक आयात और मजबूत रुपये से सस्ता हुआ Edible Oil

अधिक आयात और मजबूत रुपये के कारण सोया तेल की कीमतें पिछले दो महीने में 6.16 फीसदी तक कम हुई हैं. सोया तेल इस समय 12 महीने के न्यूनतम स्तर पर ट्रेड कर रहा है. अनुज गुप्ता के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह बंदरगाहों पर इसका अधिक स्टॉक, टैरिफ कम होने के कारण अधिक आयात की संभावना और मजबूत रुपया है. अप्रैल के पहले हाफ के लिए केंद्र सरकार ने क्रूड सोया ऑयल के लिए टैरिफ 1250 रुपया (18 डॉलर) घटाकर 49300 रुपये (711 डॉलर) प्रति टन कर दिया है. एसईए की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में पिछले साल की तुलना में 64.7 फीसदी अधिक सोया तेल का आयात हुआ है.

उत्पादन अधिक होने से सस्ता हुआ सरसों का तेल

अनुज गुप्ता ने बताया कि सिर्फ सोयाबीन ही नहीं, सरसों की कीमतों में भी गिरावट आई है क्योंकि इस सत्र में बेहतर मौसम और अधिक रकबे के कारण 19 फीसदी सरसों का उत्पादन अधिक होने का अनुमान है. उत्पादन अधिक होने के बावजूद निर्यात की धीमी गति के कारण सरसों की कीमतें पिछले दो महीने में 5.83 फीसदी तक गिरी हैं. सॉल्वेट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएसन ऑफ इंडिया (एसईए) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में 41728 टन कनौला (सरसों की एक प्रजाति) का निर्यात हुआ था जबकि उसके पिछले साल यह आंकड़ा 52071 टन कनौला का निर्यात हुआ था.

पाम ऑयल की बढ़ेगी खपतः अमेरिकी रिपोर्ट

वैश्विक स्तर पर अधिक उत्पादन, कम टैरिफ और भारत में अधिक आयात के कारण पिछले दो महीने में क्रूड पॉम ऑयल की कीमतें भी 8.3 फीसदी तक कम हुई हैं. एक अनुमान के मुताबिक 2018-19 में इसका आयात 10 फीसदी तक बढ़ सकता है. अप्रैल के पहले हाफ के लिए क्रूड पाम ऑयल पर टैरिफ करीब 1660 रुपये (24 डॉलर) घटाकर 36680 रुपये (529 डॉलर) प्रति टन और आरबीडी पाोमिलिन के लिए टैरिफ 477 रुपये (4 डॉलर) घटाकर 39316 रुपये (567 डॉलर) प्रति टन कर दिया गया है. अमेरिका के कृषि विभाग की फरवरी में प्रकाशित मासिक रिपोर्ट में भारत में पाम ऑयल की खपत सालाना आधार पर 16.7 फीसदी अधिक 10.6 टन का अनुमान है.

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