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खाने के तेल के बढ़ते भाव को थामने में सरकारी कोशिश नहीं आई काम, आयात शुल्क में कटौती का आम लोगों को नहीं मिला फायदा

खाने के तेल की महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में कटौती की थी लेकिन फिर भी खाने के तेल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही.

September 14, 2021 9:35 AM
Edible oil import duty relief not fully passed on to consumersफूड मिनिस्ट्री ने उम्मीद जताई थी कि 4600 करोड़ रुपये की ड्यूटी कटौती का फायदा आम लोगों को पहुंचाया जाएगा.

खाने के तेल की महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने आयात शुल्क (Import Duty) में कटौती की थी लेकिन फिर भी खाने के तेल (Edible Oil) की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही यानी कि इंपोर्ट ड्यूटी में राहत का पूरा फायदा आम लोगों को नहीं मिला. यह स्थिति तब है जब सरकार ने दावा किया है कि वित्त वर्ष 2022 में आयात शुल्क में कटौती के चलते रेवेन्यू में करीब 4600 करोड़ रुपये की गिरावट हो सकती है.

खाद्य मंत्रालय ने 11 सितंबर को अपने बयान में जानकारी दी थी कि 10 सितंबर तक 3500 करोड़ की ड्यूटी कम की गई और इसके बाद 1100 करोड़ रुपये की ड्यूटी माफ की गई है. इस प्रकार फूड मिनिस्ट्री ने उम्मीद जताई थी कि 4600 करोड़ रुपये की इस राहत का फायदा आम लोगों को पहुंचाया जाएगा.

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ड्यूटी में कटौती के बावजूद महंगा हुआ तेल

  • क्रूड पॉम ऑयल पर एग्री सेस और सोशल वेलफेयर सेस समेत प्रभावी ड्यूटी में 30 जून से 10 सितंबर तक के लिए 5.5 फीसदी की कटौती की गई थी. इस दौरान क्रूड पाम ऑयल पर 30.5 फीसदी की प्रभावी ड्यूटी रही. 10 सितंबर के बाद इसमें और कटौती हुई. हालांकि इस कटौती के बावजूद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 30 जून से 10 सितंबर के बीच देश भर में पॉम ऑल के औसत खुदरा भाव 3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 133.77 प्रति किग्रा तक पहुंच गए.
  • इसी प्रकार 20 अगस्त से 10 सितंबर के बीच क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लॉवर ऑयल पर प्रभावी ड्यूटी 8.5 फीसदी की कटौती के साथ 30.5 फीसदी रही. हालांकि इसके बावजूद इस अवधि में सोयाबीन तेल और सूर्यमुखी तेल के भाव में बढ़ोतरी हुई.

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  • ऑयल वर्ष 2020-21 (नवंबर-अक्टूबर) में 31 जुलाई तक 93.7 करोड़ टन एडिबल ऑयल का आयात किया गया जिसमें 99.5 फीसदी क्रूड वैरायटी और शेष 0.5 फीसदी रिफाइंड ऑयल की रही.
  • यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि जब तेल महंगा हो रहा था तो आयात होने वाले क्रूड पाम ऑयल के भाव में उछाल रही यानी कि ड्यूटी कटौती का फायदा क्रूड पाम तेल के बढ़ते भाव से न्यूट्रलाइज हो गया. खाद्य तेलों के आयात में पाम तेलों की हिस्सेदारी 60 फीसदी से अधिक है और इसे मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात किया जाता है.
  • इंडस्ट्री आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में 30 जून को क्रूड पाम तेल की कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट (CIF) 1030 डॉलर (75790 रुपये) प्रति टन थी जो 9 सितंबर को 20 फीसदी बढ़कर 1240 डॉलर (91242 रुपये) प्रति टन हो गई. वहीं दूसरी तरफ आयातित क्रूड सोयाबीन तेल के लिए सीआईएफ 20 अगस्त को 1390 डॉलर (1.02 लाख रुपये) प्रति टन और सूर्यमुखी तेल के लिए 1380 डॉलर (1.02 लाख रुपये) प्रति टन था जो 9 सितंबर को 1-2 फीसदी घटकर 1365 डॉलर (1 लाख रुपये) प्रति टन रह गया.

60 फीसदी आयात होता है खाने का तेल

खुदरा बाजार में एडिबल ऑयल के भाव सालाना आधार पर 20-48 फीसदी तक महंगे हुए हैं. इसके चलते पिछले हफ्ते केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को मिलर्स व बल्क ट्रेडर्स द्वारा अपने स्टॉक का खुलासा करने से जुड़े नियमों को लागू करने को कहा था ताकि खाने वाले तेल की जमाखोरी को रोका जा सके. बता दें कि देश में खाने वाले तेल का बड़ा हिस्सा करीब 60 फीसदी आयात किया जाता है. इसका सालाना बिल करीब 75 हजार करोड़ रुपये का आता है. वित्त वर्ष 2021 में खाले वाले तेल का उत्पादन 12.47 मीट्रिक टन रहा जबकि विदेशों से 13.35 मीट्रिक टन का आयात हुआ. आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कैबिनेट ने पिछले महीने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स ऑयल पाम (NMEO-OP) को मंजूरी दी. इस कार्यक्रम के तहत 11040 करोड़ रुपये में अगले पांच साल में पाम तेल के उत्पादन क्षेत्र को 3.75 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर किए जाने का लक्ष्य है.
(Article: Pradbhudatta Mishra)

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