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GST चोरी रोकने के लिए FASTag को हथियार बनाएगी सरकार, ट्रांसपोर्टर्स का हर मूवमेंट होगा ट्रैक

यह इंटीग्रेटेड सिस्टम पूरे देश में अप्रैल से लागू हो जाएगा. अभी कर्नाटक इस सिस्टम का पायलट बेसिस पर परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है.

January 15, 2019 4:58 PM
FASTag, E-way bill, NHAI's FASTag to track GST evasion, Integration of E-way bill with FASTag, जीएसटी चोरी, ईज ऑफ डूइंग बिजनस, Ease of Doing Businessफास्टैग और ई-वे बिल के इंटीग्रेशन से यह पता लग जाएगा कि गाड़ियां किस रास्ते से जा रही हैं.

E-Way Bill : सामानों की आवाजाही (गुड्स मूवमेंट) को ट्रैक करने और GST चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल को फास्टैग से जोड़ने की तैयारी चल रही है. यह नियम अप्रैल से लागू हो जाएगा. ट्रांसपोर्टर्स से बातचीत कर राजस्व विभाग ने ई-वे बिल, फास्टैग और डीएमआईसी के लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक को जोड़ने के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह इंटीग्रेटेड सिस्टम पूरे देश में अप्रैल से लागू हो जाएगा. अभी कर्नाटक इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू कर रहा है.

एक अधिकारी ने बताया कि कुछ ट्रांसपोर्टर एक ही ई-बिल पर कई बार सामानों की आवाजाही कर रहे हैं. ई-वे बिल को फास्टैग से जोड़ने पर गाड़ियों की लोकेशन पता चल सकेगी और यह भी पता चल सकेगा कि उसने नेशनल हाईवे पर स्थित टोल प्लाजा को कितनी बार पार किया है. फास्टैग सिस्टम के जरिए नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इलेक्ट्रॉनिकली टोल कलेक्शन करती है. इसे ई-वे बिल से जोड़ने पर रेवेन्यू अथॉरिटीज गाड़ियों की लोकेशन ट्रैक कर यह पता कर सकेगी कि यह उसी रास्ते पर जा रहा है जिसे ई-वे बिल जेनेरेट करते समय बताया गया था.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर भी पड़ेगा प्रभाव

इस इंटीग्रेशन से देश भर में लॉजिस्टिक्स की ऑपरेशन एफिशिएंसी बढ़ेगी. इसके अलावा विभिन्न एजेंसियों के बीच जानकारियां साझा करने से देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का माहौल बनेगा. यह ई-वे बिल के जरिए जीएसटी नियमों में खामियों को दूर करेगा.

2018-19 के 9 माह में 15,278.18 करोड़ की GST चोरी

चालू वित्त वर्ष 2018-19 के शुरुआती 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के बीच सेंट्रल टैक्स ऑफिसर्स ने 15,278.18 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के 3626 मामलों की पहचान की. केंद्र सरकार ने हर महीने 1 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का टारगेट निर्धारित किया हुआ है लेकिन चालू वित्त वर्ष में अभी तक यह औसतन 96,800 करोड़ रुपये है.

50 हजार रुपये से अधिक के सामान के ट्रांसपोर्ट पर ई-वे बिल जरूरी

GST नियमों के अनुसार, 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य का सामान भेजने पर ई-वे बिल जेनरेट करना जरूरी है. एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसपोर्टेशन के लिए यह नियम 1 अप्रैल 2018 और राज्य के भीतर ट्रांसपोर्टेशन के लिए 15 अप्रैल से 2018 से लागू हुआ था.

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