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  1. क्या रुपये में गिरावट से शेयर बाजार में बढ़ेगा जोखिम? 5 प्वॉइंट में समझें मार्केट एक्सपर्ट की राय

क्या रुपये में गिरावट से शेयर बाजार में बढ़ेगा जोखिम? 5 प्वॉइंट में समझें मार्केट एक्सपर्ट की राय

मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि रुपये और मार्केट के मूवमेंट के पीछे अलग-अलग फैक्टर हैं. यह नहीं कहा जा सकता है कि रुपये में कमजोरी के चलते नियर टर्म में मार्केट में बड़ी गिरावट आएगी.

September 11, 2018 8:21 AM
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सोमवार को रुपया 75.68 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. वहीं, सेंसेक्स 443 अंक तक टूटकर 38000 के नीचे चला गया, निफ्टी भी 154 अंक टूटकर 11450 के नीचे फिसल गया. आमतौर पर धारणा बनी है कि रुपये में कमजोरी से बाजार में गिरावट और बढ़ने का डर है. लेकिन मार्केट एक्सपर्ट ऐसा नहीं मान रहे हैं. उनका कहना है कि रुपये और मार्केट के मूवमेंट के पीछे अलग-अलग कई फैक्टर हैं. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि रुपये में कमजोरी के चलते नियरटर्म में मार्केट में बड़ी गिरावट आएगी.

इस साल: रुपया कमजोर, मार्केट में तेजी

इस साल की बात करें तो 9 सितंबर यानी शुक्रवार तक रुपये में करीब 12 फीसदी की गिरावट रही है. रुपया 61 से 71.73 प्रति डॉलर के भाव तक आ गया. वहीं, इस दौरान 30 प्रमुख शेयरों वाले इंडेक्स सेंसेक्स ने 12 फीसदी रिटर्न दिया. सेंसेक्स 1 जनवरी को 33812 के स्तर पर था जो शुक्रवार 7 सितंबर को 38242 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, 28 अगस्त 2018 तक निफ्टी ने भी 2.7 फीसदी रिटर्न दिया.

पिछले 3 माह में बाजार से 8.4% रिटर्न

पिछले 3 महीने की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने लगातर घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली की है. लेकिन इस दौरान बाजार ने 8.4 फीसदी रिटर्न दिया है. विदेशी निवेशकों ने अगस्त में 2228 करोड़ रुपये, जुलाई में 2768 करोड़ रुपये और जून में 10249 करोड़ रुपये का निवेश घटा दिया. सितंबर में अबतक विदेशी निवेशकों ने 789 करोड़ रुपये की बिकवाली की है.

घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार

एपिक रिसर्च के सीईओ नदीम मुस्तफा का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने निवेश घटाए हैं, लेकिन घरेलू निवेशकों ने बाजार में पैसे डालकर इसे बैलेंस कर दिया. यहां तक लॉर्जकैप में भी घरूले निवेश बढ़ा है. इस वजह से मार्केट में लिक्विडिटी को लेकर परेशानी नहीं है. जहां तक विदेशी निवेशकों की बात है, अभी उनमें सतर्क रुख दिखेगा. आने वाले दिनों में स्टेट इलेक्शन के अलावा 2019 में आम चुनाव होने हैं. जिससे राजनैतिक अस्थिरता का सेंटीमेंट उन पर बना रहेगा. वहीं, यूएस में बॉन्ड यील्ड में तेजी है, जिस वजह से वे अपना पैसा इक़्विटी से निकालकर वहां लगाना चाहेंगे.

बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एपिक रिसर्च के सीईओ नदीम मुस्तफा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों की बात करें तो यूएस और चीन के अलावा ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वार बढ़ा है. एशिया के प्रमुख बाजारों में कमजोरी रही है. क्रूड की कीमतें हाई बनी हुई हैं, रुपये और कुछ अन्य इमर्जिंग इकोनॉमी की करंसी में कमजोरी रही है, इसके बाद भी शेयर बाजार का प्रदर्शन इस साल बेहतर रहा और बाजार नए हाई तक पहुंचा. ऐसे में साफ है कि रुपये और मार्केट की चाल के पीछे अलग—अलग फैक्टर काम कर रहे हैं. यह नहीं कहा जा सकता है कि रुपये में कमजोरी से माके्रट में बड़ी गिरावट की आशंका है.

गिरावट पर बने खरीदारी के मौके

इडेलवाइस इन्वेस्टमेंट रिसर्च के सहायक निदेशक संदीप रैना का कहना है कि दूसरे बाजारों की तुलना में घरेलू बाजार का प्रदर्शन बेहतर है. मौजूदा फाइनेंशियल की पहली तिमाही में अन्रिंग बेहतर रहने का लाभ बाजार को मिला है. शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट निवेश के नए मौके लाया है. कई अच्छे शेयर हैं, जिनमें अर्निंग आ रही है. डीआईआई के स्तर पर कोई चिंता नहीं है. घरेलू निवेशक बाजार में पैसे लगा रहे हैं. यह ट्रेंड जारी रहेगा और आने वाले दिनों में निफ्टी 12 हजार का स्तर छू सकता है.

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