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डिजिटाइजेशन से शेयर खरीदना-बेचना हुआ आसान, इंट्रा डे ट्रेडर्स को सबसे ज्यादा फायदा

दलाल स्ट्रीट में पहला टेक्नोलॉजिकल बदलाव 1995 में एनएसई के लॉन्च होने के एक साल बाद इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम के रूप में आया.

March 3, 2020 4:07 PM
digitisation makes stock treading easy and faster here how technology changed marketयह बदलाव अच्छे हैं व समय के साथ और बेहतर होते चले जाएंगे. (Representational Image)

डिजिटाइजेशन ने हमारे आस-पास सबकुछ बदल दिया है. एंटरटेनमेंट से लेकर रोजमर्रा की पेमेंट, खाना ऑर्डर करने से लेकर ट्रैवल टिकट बुक करने तक सभी मूल चीजें डिजिटल हो रही हैं. हांलाकि इसका अनुभव भी बेहतर रहा है. डिजिटाइजेशन के विस्तार का फायदा ट्रेडिंग इंडस्ट्री में भी देखने को मिल रहा है. लेकिन यह ट्रेडर को किस प्रकार फायदा पहुंचाएगा? आइए इसे समझते हैं.

डिजिटाइजेशन ने क्या बदलाव?

यदि आपने हाल के वर्षों में ट्रेडिंग शुरू की है, तो आपको पहले होने वाली समस्याओं को नहीं झेलना पड़ा है. पहले सबकुछ काफी परेशान करने वाला होता था. एक्सचेंज ट्रेडर द्वारा फोन पर प्राइस बुकिंग की चीखों से गूंजते रहते थे. स्टॉक लिमिटेड होते थे और यहां तक कि कुछ स्टॉक सीमित ब्रोकर्स के पास ही उपलब्ध होते थे. वह भी तब जब आप एक ट्रेडर के तौर पर रजिस्टर्ड हों और दलाल स्ट्रीट में आपकी पहुंच हो. यह भी अपने आप में एक काम की तरह था.

आमतौर पर इसे करवाने में काफी दिन लग जाते थे, जिसमें ट्रेडिंग और डीमेट अकाउंट भी शामिल था. यह वह दौर भी था, जब चीनी अफवाहों से कारण आपको अपने स्टॉक बेचने पड़ जाते थे, जिन्हें आपने होल्ड किया होता था.

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दलाल स्ट्रीट (बीएसई) में पहला टेक्नोलॉजिकल बदलाव 1995 में एनएसई के लॉन्च होने के एक साल बाद इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम के रूप में आया. इस बदलाव के कारण बीएसई को प्रतिदिन में 80 लाख ऑर्डर मिलने लगे. एनएसई में शुरुआत से ही पूरी तरह से ऑटोमेटिक
स्क्रीन बेस्ड इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम था. इसने ट्रेडिंग में लगने वाले समय को काफी हद तक कम कर दिया. वहीं, इसकी वजह से ट्रेडिंग में होने वाली मानवीय गलतियों में कमी आई.

ऑनलाइन ट्रेडिंग को नए युग की शुरुआत के रूप में देखा गया. इससे शुरुआती फायदे हुए. इसका सबसे ज्यादा फायदा इंट्रा डे ट्रेडिंग करने वालों को हुआ, जिन्हें अब अपने ब्रोकर को फोन करने की जरूरत नहीं थी. तब से लेकर आज तक इंट्रा डे ट्रेडर की संख्या लगातार बढ़ी है.
वर्तमान में रोजाना कैश वॉल्यूम में इंट्रा डे ट्रेडर की 65 फीसदी हिस्सेदारी है. ऑनलाइन ट्रेडिंग ने स्टॉक मार्केट को देश के शहरी घरों तक पहुंचाया. इससे बाजार तेजी से बढ़ा और सभी ट्रेडर को फायदा हुआ.

तकनीक कैसे ला रही है बड़े बदलाव

इंटरनेट ने न सिर्फ स्टॉक की खरीदी में फायदा पहुंचाया है, बल्कि इससे रिसर्च में भी फायदा हुआ है. अब निवेशक स्टॉक के बारे में सर्च कर सकते हैं, इसके पिछले ट्रेंड देख सकते हैं और इन-डेप्थ एनालिसिस कर सकते हैं. इसके अलावा इंटरनेट ने इंडस्ट्री के वरिष्ठ लोगों की सलाह
लेना भी आसान कर दिया. लेकिन इंडस्ट्री का असली गेम चेंजर अभी आना बाकी था.

डेटा, जो कि आज के दौर में सोने और तेल जितना कीमती माना जाता है. हालांकि, स्टॉक ब्रोकर हमेशा से यह बात जानते थे. रिग्रेशन मॉडल द्वारा एनालिटिक्स पहले भी उपयोग की जाती थी. हालांकि इसका तरीका धीरे-धीरे डिजिटल होता गया. अब डेटा एनालाटिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और नई टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है.

इंडस्ट्री की अग्रणी रोबो-एडवाइजरीज कोई एडवाइस देने से पहले 1 अरब डाटा प्वाइंट को एनालाइज करती हैं. बेहतर समझ के लिए मान लें कि यदि कोई व्यक्ति 1 सेकंड में एक डेटा प्वाइंट को एनालाइज करता है (जिसकी संभावना बहुत कम है), तो उसे इतने डेटा पॉइंट
एनालाइज करने में 31 वर्ष का समय लगेगा और यह सिर्फ एक ट्रेड के लिए है. ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ने नोबेल प्राइज विनिंग ‘मॉर्डन पोर्टफोलियो थ्योरी’ पर आधारित रूल बेस्ड इनवेस्टमेंट इंजन लॉन्च किए हैं.

निवेशकों को हो रहा भारी मुनाफा

इसका निवेशकों को भारी मुनाफा हो रहा है. स्टॉक के आधार पर बात करें तो बीएसई 100 के मुकाबले यह अंतर 25 फीसदी से ज्यादा है. वहीं, म्युचुअल फंड में बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले यह 1 से 2 फीसदी है. यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि डिजिटल बदलावों ने रिटेल निवेशकों को कई बाधाएं पार करने में मदद की है, जिसमें बाजार के बारे में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है. इसीलिए अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के भी निवेशक इससे जुड़ रहे हैं. यह बदलाव अच्छे हैं व समय के साथ और बेहतर होते चले जाएंगे.

By: प्रभाकर तिवारी, CMO, एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड

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