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Interview: भारत को आर्थिक विकास के नए दौर में ले जाएगा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन- आलोक अग्रवाल

कोविड-19 ने कंपनियों को टेक्नोलॉजी के एक अहम मोड़ पर ला खड़ा किया है. इसने बिजनेस को हमेशा के लिए बदल दिया है. इसने टेक्नोलॉजी को अपनाने की गति कई साल आगे कर दी है.

Updated: Jan 03, 2021 1:08 PM
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साल 2021 की शुरुआत हो चुकी है. यह साल काफी उम्मीदों भरा है. कोविड-19 वैक्सीन ग्लोबल अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में मददगार साबित होगी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भारत को आर्थिक विकास के नए दौर में ले जाएगा. ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कॉरपोरेट, आलोक अग्रवाल ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी (ऑनलाइन) से एक ईमेल साक्षात्कार में यह बातें कहीं. अग्रवाल का कहना है कि कोविड-19 ने कंपनियों को टेक्नोलॉजी के एक अहम मोड़ पर ला खड़ा किया है. इसने बिजनेस को हमेशा के लिए बदल दिया है. इसने टेक्नोलॉजी को अपनाने की गति कई साल आगे कर दी है. पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल: दुनिया भर की नजरें कोरोना वैक्सीन और आर्थिक रिकवरी की रफ्तार पर टिकी है. ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योग के बारे में आपका क्या आकलन है?

कोविड-19 शायद इतिहास की सबसे विध्वंसकारी घटना है. जीवन का कोई पहलू इससे अछूता नहीं रहा है. इस वैश्विक महामारी ने ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार पूरी तरह रोक दी है. इसके साथ यह घटना यह भी बता रही है कि इस तरह की घटनाएं और इनका असर भविष्य में और बढ़ेगा. इंश्योरेंस सेक्टर ने तो ऐसे भयंकर संकट की कल्पना भी नहीं की थी. कोविड-19 ने अब तक की प्राकृतिक आपदाओं और 2008 के वित्तीय संकट की भयावहता को भी पीछे छोड़ दिया. कोरोनावायरस ने हमें कैसे प्रभावित किया है, उसके बारे में हमने कई इंडस्ट्री लीडर्स के नजरिये को जाना है. मेरे नजरिये में इस वैश्विक महामारी ने बड़े आर्थिक और सामाजिक असर छोड़ा है.

सप्लाई चेन की डी-रिस्किंग: दरसअसल, चीन पर लॉजिस्टिक के मामले में निर्भरता काफी बढ़ गई थी. इसके साथ ही अलग-अलग देशों की ओर से जिस तरह से लॉकडाउन लगाया गया है उसने भी सप्लाई चेन को लेकर भारी जोखिम पैदा किया. अब इन जोखिमों को कम करने की दिशा में दुनिया कदम बढ़ा रही है.

डिजिटल बदलाव में तेजी: लॉकडाउन ने लोगों का घरों से निकलना बंद कर दिया. इससे लोगों ने खुद को डिजिटल दुनिया के लिए बड़ी तेजी से तैयार किया, जिससे कि घर से काम किया जा सके. डिजिटल टूल्स के जरिए कंज्यूमर के व्यवहार में काफी बदलाव आया. इससे कुछ इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में भी बदलाव आए. जैसे, एजुकेशन और हेल्थकेयर सेक्टर में इसने बड़ा बदलाव किया.

कॉरपोरेटाइजेशन को बढ़ावा: मौजूदा अनिश्चतताओं की वजह से लोगों ने छोटी कंपनियों की तुलना में कॉरपोरेट कंपनियों को तवज्जो देना शुरू किया है. इससे कॉरपोरेटाइजेशन बढ़ा और मजबूत हुआ है. यानी, अब SME और MSME को सरकार से और ज्यादा सहायता की जरूरत पड़ेगी ताकि वे हमारी अर्थव्यवस्था में अपना अहम रोल अनाए रखें.

रिमोर्ट वर्किंग बिजनेस मॉडल का हिस्सा: रिमोट वर्किंग यानी दफ्तर से दूर बैठ कर काम करना कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं रह गई है. बिजनेस और दूसरे संगठनों ने पाया कि कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिहाज से रिमोट वर्किंग फायदे की चीज है. कई संगठनों ने रिमोट वर्किंग को अब बिजनेस मॉडल का हिस्सा समझना शुरू कर दिया है. कई बड़ी कंपनियों जैसेकि टीसीएस, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड आदि ने भी इसे बिजनेस मॉडल का हिस्सा समझना शुरू कर दिया है. वैसे तो जलवायु परिवर्तन या क्लाइमेट चेंज का मुद्दा हमेशा अहम रहा है लेकिन इधर बढ़ी जागरुकता ने कंपनियों को समाज के ऊपर बढ़ते इसके असर पर फिर से सोचने को विवश किया है.

सवाल: इस चुनौतीपूर्ण समय में टेक्नोलॉजी ने आम आदमी की मदद कैसे की है. नौकरियों से लेकर ट्रांजेक्शन तक में आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं?

कोविड-19 ने कंपनियों को टेक्नोलॉजी के एक अहम मोड़ पर ला खड़ा किया है. इसने बिजनेस को हमेशा के लिए बदल दिया है. इसने टेक्नोलॉजी को अपनाने की गति कई साल आगे कर दी है. कोविड-19 ने न केवल संस्थानों के कंज्यूमर से जुड़ी सेवाओं में बड़े बदलाव किए हैं बल्कि उनके कोर इंटरनल ऑपरेशन (जैसेकि बैक ऑफिस, प्रोडक्शन और आरएंडी प्रक्रिया) पर भी असर डाला है. इसने सप्लाई चेन में एकदूसरे से जुड़ी गतिविधियों पर भी असर हुआ है. संकट के इस दौर में हुए कई बदलाव लंबे समय तक बरकरार रहेंगे. जैसेकि, रिमोट वर्किंग में हुआ इजाफा, डेटा सिक्योरिटी पर बढ़ा हुआ खर्चा, एसेट्स का क्लाउड की ओर जाना, ग्राहकों की ओर से ऑनलाइन प्रोडक्ट और सर्विस की बढ़ी मांग, फैसले लेने और बेहतर तरीके से ऑपरेशन चलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल आदि.

बड़ी कंपनियों (कॉरपोरेट कंपनियों) को इन तरह के हालातों को संभालने के लिए सक्रियता दिखानी होगी. कोविड के इस दौर में तमाम कंपनियों ने टेक्नोलॉजी को अपनाने में बड़ी फुर्ती दिखाई. यह काम बड़े पैमाने पर हुआ. इससे ये कंपनियां प्रतिस्पर्धा के लिए पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हुई हैं. मसलन, कुछ कंपनियों ने रिमोट वर्किंग को अपनाया. मूवी प्रोडक्शन कंपनियां ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गईं. आईपीएल ने दर्शकों के लिए डिजिटल एक्सपीरियंस पैदा किया. फार्मा कंपनियों ने वैक्सीन की जरूरत के लिए ग्लोबल समझौते किए. आईटी कंपनियों जैसेकि टीसीएस ने सिक्योर्ड टेक्नोलॉजी अपनाई. डीटीडीसी जैसी कई कूरियर कंपनियों ने घरों से पैकेट उठाने शुरू किए और जीरो कॉन्टेक्ट डिलीवरी की. एडुटेक सेक्टर की बड़ी कंपनियां BYJU , Vedantu और Unacademy ने बड़ी तादाद में छात्र-छात्राओं को आकर्षित किया. इनके बिजनेस में भारी इजाफा हुआ.

सवाल: पिछले कुछ साल से इंडस्ट्री में कॉरपोरेट वेलनेस प्रोग्राम पर काफी चर्चा हो रही है. अब पूरी दुनिया नई चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन नई संभावनाएं भी हैं. आप क्या समझते हैं कि इस प्रोग्राम को नए सिरे से शुरू किया जाए या फिर इसे ज्यादा इम्प्लॉयर ओरिएंटेड बनाया जाए?

कोविड-19 ने रिमोट वर्किंग को मान्यता दिला दी है. बड़ी तादाद में लोग घर से काम कर रहे हैं. दफ्तरों से दूर किसी लोकेशन से काम कर रहे हैं. हमारी जिंदगी का यह नया तरीका बन गया है. इस बदलाव की वजह से लोग काम और पर्सनल लाइफ में अंतर नहीं कर पाते. बड़ी तादाद में बर्नआउट के मामले आ रहे हैं. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी काफी बढ़ी हैं. मेरा मानना है कि प्रोग्रेसिव कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस बदलाव में मदद करने के लिए आगे आएंगी. उनके लिए समग्र वेलनेस सॉल्यूशन मुहैया कराएंगी. कंपनियां ऐसे माहौल में पहले से ही इंटिग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर्स तलाश रही हैं. जो टेक्नोलॉजी आधारित सॉल्यूशन का प्रबंधन कर सकें.

सवाल: 2021 को लेकर आपका क्या आउटलुक है?

2021 में ग्लोबल आउटलुक को लेकर काफी उम्मीदें हैं. कोविड वैक्सीन ग्लोबल अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में मददगार साबित होगी. कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया है कि ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ 6.4 फीसदी तक जा सकती है. इस तरह की ग्रोथ की अगुआई भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था करेगा.

भारत में सरकार का पूरा जोर रोजगार बढ़ाने वाले सेक्टरों पर खर्च करने में है. सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना चाहती है. इसके अलावा डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन भारत को आर्थिक विकास के नए दौर में ले जाएगा. हमारा ग्रोथ आउटलुक कहता है कि अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक सेक्टर में रिकवरी थोड़ी कमजोर रहेगी. सूक्ष्म और लघु (micro and small enterprises) उद्योग को काफी घाटा हो सकता है. जहां तक इंश्योरेंस सेक्टर का सवाल है तो हमारा मानना है कि देश में स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरुकता बढ़ने से मेडिकल इंश्योरेंस का मार्केट काफी बढ़ेगा.

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