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लांग टर्म पोर्टफोलियो में क्यों शामिल करें डेट फंड? स्थिरता, टैक्स लाभ के साथ इमरजेंसी में आएगा काम

Debt Fund: इक्विटी के साथ-साथ पोर्टफोलियो में डेट फंड शामिल करना नए निवेशकों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है.

Updated: Jan 24, 2021 4:09 PM
debt mutual fundDebt Fund: इक्विटी के साथ-साथ पोर्टफोलियो में डेट फंड शामिल करना नए निवेशकों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है.

Debt Mutual Fund: ज्यादातर निवेशकों को लगता है लंबी अवधि के निवेश के लिए इक्विटी सबसे अच्छा विकल्प है. लेकिन वे यह महसूस नहीं करते हैं कि फिक्‍स्‍ड इनकम साधनों के उलट, इक्विटी में कभी भी लीनियर फैशन में ग्रोथ नहीं होती है. यह समय के साथ कई उतार-चढ़ाव से गुजरता है. अगर निवेशक कुशल है और उसे अच्छा खासा अनुभव है तो वह इन उतार-चढ़ाव को अपने स्ट्राइड के रूप में लेते हैं, लेकिन नए इससे चिंतित हो सकते हैं. ऐसे में इक्विटी के साथ-साथ पोर्टफोलियो में डेट फंड शामिल करना नए निवेशकों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि ध्यान रहे कि यह निवेश लंबी अवधि के लिए होना चाहिए. जानते हैं कि लंबी अवधि में किसी निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में डेट फंडों को क्योंन शामिल करना चाहिए.

1. डेट फंड से पोर्टफोलियो में आती है स्टेबिलिटी

अमूमन बहुत से निवेशक पैसा लगाते समय रिस्क का आंकलन किए बिना उस फंड के पिछले प्रदर्शन को देखते हैं. वे किसी फंड में अच्छा रिटर्न देखकर उसके प्रति आकर्षित होते हैं. लेकिन एक बार अगर यह बात उन पर हावी हो जाए कि इक्विटी में वोलैटिलिटी ज्याकदा है और उनमें निगेटिव रिटर्न भी मिल सकता है तो वे डर जाते हैं और नुकसान से बाहर निकल जाते हैं. इसलिए, ऐसे निवेशकों के लिए, हमेशा उनके जोखिम प्रोफाइल को जानना जरूरी है. उसके बाद उन्हें अपने फंड का चुनाव करना चाहिए. किसी को अपने पोर्टफोलियो में डेट शामिल करना न केवल स्थिरता प्रदान करेगा, बल्कि नुकसान में इक्विटी या इक्विटी फंड बेचने जैसे जल्दनबाजी वाले फैसले लेने से भी बचाएगा.

2. डेट फंड इमरजेंसी फंड के रूप में भी करता है काम

बीते साल मार्च, 2020 में कोरोना वायरस महामारी के चलते बाजार क्रैश हो गया था और इक्विटी सेग्में ट करीब 40 फीसदी तक गिर गया. उसी अवधि के दौरान, कई लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी. ऐसी स्थिति के दौरान, अगर किसी के पास 100 फीसदी अलोकेशन इक्विटी में था, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. ऐसे में किसी के पोर्टफोलियो में डेट की उपलब्धता, जो एक अनुमानित मूल्य पर इनकैश्डा हो सकती है, एक निवेशक को इक्विटी से होने वाले नुकसान से बचा सकती है. यानी यह एक इमरजेंसी फंड के रूप में भी काम करता है.

3. कई बार इक्विटी की तुलना में आउटपरफॉर्म

कई बार इक्विटी की तुलना में डेट ने ज्या दा बेहतर प्रदर्शन भी किया है. नीचे दिए गए चार्ट में हमने पिछले 10 सालों से विभिन्न श्रेणियों के प्रदर्शन को दिखाते हुए इक्विटी म्यूचुअल फंड और डेट म्यूचुअल फंड पर विचार किया है. ये एनुअल रिटर्न हैं और इसका उद्देश्य अस्थिरता को दिखाना है. इसमें यह देखा जा सकता है कि अस्थिरता की वजह से कई बार इक्विटी फंडों ने डेट फंडों की तुलना में कम रिटर्न दिया है. इसलिए, जो निवेशक इस तरह की अस्थिरता नहीं चाहते हैं, उन्हें इक्विटी फंड के साथ अपने पोर्टफोलियो में डेट फंड भी शामिल करना चाहिए.

क्या फिक्स्ड डिपॉजिट हैं बेहतर विकल्प

फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादातर भारतीयों के लिए निवेया का पसंदीदा विकल्पन रहा है. कई निवेशक सोच सकते हैं कि चूंकि उनके पोर्टफोलियो में फिक्स्ड डिपॉजिट हैं, इसलिए उन्हें डेट फंड्स में भी निवेश करने की जरूरत नहीं है. लेकिन कुछ ऐसे प्वॉ इंट हैं जिन पर हर निवेशक को ध्याचन देना चाहिए. क्योंकि नियमित फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश की तुलना में डेट फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

1. रीइन्वेरस्टिमेंट रिस्क

लगभग 20 साल पहले, फिक्स्ड डिपॉजिट में लगभग 10 फीसदी सालाना रिटर्न मिल रहा था, लेकिन आज फिक्स्ड डिपॉजिट रेट घटकर महज 5 फीसदी के आसपास रह गए हैं. अधिकांश फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशक 3 से 5 साल के लिए निवेश करते हैं और इनके मेच्योार होने पर अपने निवेश को रीन्यू करते हैं. इसलिए, जब निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट को रीन्यू करते हैं, तो वे कम ब्याज दर पर इसे रीइन्वेट करते हैं. साथ ही, फिक्स्ड डिपॉजिट पर लागू मौजूदा ब्याज दरें मौजूदा मुद्रास्फीति दर से कम हैं, जिसका मतलब है कि इन पर वास्तविक दर निगेटिव होगी.

2. लिक्विडिटी की समस्या

अगर किसी इमरजेंसी में फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसे निकालने की आवश्यकता होती है, तो बैंक इसके लिए पेनल्टी वसूलते हैं. लेकिन डेट म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने के लिए कोई जुर्माना नहीं है.

3. टैक्स बेनेफिट

फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ, निवेशकों को अपने इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार ब्याज आय पर टैक्स का भुगतान करना पड़ता है. एक निवेशक जो 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आता है, उसे फिक्स्ड डिपॉजिट से अर्जित ब्याज आय पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा. लेकिन डेट फंड के मामले में, अगर निवेशक 3 साल के भीतर रिडीम करते हैं, तो उन्हें आयकर स्लैब के अनुसार भुगतान करना होगा. जो लोग 3 साल से अधिक रिडीम करते हैं, उन्हें इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20 फीसदी का भुगतान करना होगा.

(लेखक- Juzer Gabajiwala, Director, Ventura Securities)

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