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दो महीने लगातार निकासी के बाद डेट म्यूचुअल फंड में बढ़ा निवेश, निवेशकों का इन विकल्पों पर बढ़ा भरोसा

डेट म्यूचुअल फंड्स का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) सितंबर में 12.87 लाख करोड़ से बढ़कर अक्टूबर में 13.28 लाख करोड़ हो गया.

Updated: Nov 11, 2020 8:16 PM
Debt MFs see inflow in Oct on robust investment in liquid schemes amfi data reveals investors trend for these fundsसबसे अधिक इनफ्लो लिक्विड फंड्स में रहा.

लगातार दो महीने की निकासी के बाद अक्टूबर महीने में डेट आधारित म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश बढ़ा है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर महीने में डेट म्यूचुअल फंड में 1.1 लाख करोड़ का निवेश हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह लिक्विड फंड्, मनी मार्केट और छोटी अवधि की श्रेणी में निवेश बढ़ोतरी है. डेट म्यूचुअल फंड्स का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) सितंबर में 12.87 लाख करोड़ से बढ़कर अक्टूबर में 13.28 लाख करोड़ हो गया.

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अगस्त-सितंबर में 55,869 करोड़ की निकासी

एएमएफआई के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में 3,907 करोड़ और सितंबर में 51,962 करोड़ का आउटफ्लो रहा यानी इन दोनों महीनों में ही 55,869 करोड़ रुपयों की निकासी हुई.

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फिक्स्ड इनकम श्रेणी के निवेशकों का फोकस कम अवधि का निवेश

मार्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक फिक्स्ड इनकम श्रेणी के निवेशकों का मुख्य फोकस इस समय शॉर्टर ड्यूरेशन प्रोफाइल पर रहा है. इस वजह से अल्ट्रा शॉर्ट, कम अवधि वाले मनी मार्केट और शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स में निवेश बढ़ा है. इसके अलावा बैंकिंग और पीएसयू फंड्स, और कॉरपोरेट बांड्स के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है. उनका मानना है कि इस सेग्मेंट में उनका निवेश सुरक्षित है.

सबसे अधिक इनफ्लो लिक्विड फंड्स में रहा

डेट स्कीम में सबसे अधिक निवेश लिक्विड फंड्स श्रेणी में आया है. एएमएफआई के आंकड़ों के मुताबिक लिक्विड फंड में सबसे अधिक 19,583 करोड़ का निवेश आया. उसके बाद मनी मार्केट में 15,445 करोड़ और शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स में 15,156 करोड़ का निवेश आया. कॉरपोरेट बांड् में 15 हजार करोड़, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स में 13,654 करोड़ और बैंकिंग और पीएसयू फंड्स में 5,554 करोड़ से अधिक का निवेश किया.

क्रेडिट रिस्क श्रेणी से जारी रहा आउटफ्लो

निवेशक इस समय रिस्की निवेश से दूरी बरत रहे हैं. इस कारण क्रेडिट रिस्क श्रेणी में लगातार आउटफ्लो हो रहा है, हालांकि अक्टूबर में इसकी गति धीमी हुई है. अक्टूबर में क्रेडिट रिस्क फंड्स से अक्टूबर में 415 करोड़ की निकासी हुई जबकि सितंबर में 539 करोड़, अगस्त में 554 करोड़, जुलाई में 670 करोड़, जून में 1494 करोड़, मई में 5173 करोड़ और अप्रैल में 19,239 करोड़ रुपये की निकासी हुई.

गिल्ट फंड्स में निवेश का बढ़ा आकर्षण

अक्टूबर में गिल्ट फंड्स में इनफ्लो हुआ है. अगस्त में 1121 करोड़ और सितंबर में 483 करोड़ की निकासी के बाद अक्टूबर में गिल्ट फंड्स की श्रेणी में 2,521 करोड़ का निवेश हुआ है. श्रीवास्तव के मुताबिक इस कैटेगरी की सोवरेन स्टेटस और जीरो क्रेडिट रिस्क के कारण निवेशकों के लिए यह आकर्षक रहा.

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