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क्रूड आयल की कीमतों पर ओपेक और रूस सहित नॉन ओपेक देशों के बीच सहमति पर प्राइस वार छिड़ गया है.

March 9, 2020 2:26 PM
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Crude Prices Fall: क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट आ गई है. क्रूड आयल की कीमतों पर ओपेक और रूस सहित नॉन ओपेक देशों के बीच सहमति पर प्राइस वार छिड़ गया है. इसका असर यह हुआ कि ब्रेंट क्रूड 30 फीसदी से ज्यादा टूटकर 31 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया. वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 28 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है. ब्रेंट की बात करें तो इसमें 1 जनवरी के बाद से करीब 50 फीसदी तक गिरावट आ चुकी है. एक्सपर्ट आगे भी यह कमजेारी बने रहने की बात कर रहे हैं. गोल्डमैन सैक्स ने तो यूएस क्रूड में 20 डॉलर तक गिरावट का आउटलुक जारी किया है. हालांकि उनका कहना है कि क्रूड में गिरावट ऐसे समय में है, जब इकोनॉमी भी गिर रही है. इस वजह से सरकार को ट्रेड डेफिसिट की भरपाई करने में एक हद तक ही मदद मिलेगी.

गल्फ वार के बाद सबसे बड़ी गिरावट

सऊदी अरब द्वारा क्रूड का प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना के बाद क्रूड को लेकर प्राइस वार शुरू हो गया है. इससे कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 30 फीसदी से अधिक की गिरावट आई. इससे पहले 1991 में कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट आई थी. आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चे तेल का बेंचमार्क यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 28.50 डॉलर प्रति बैरल रह गया. जबकि ​ब्रेंट भी 28 डॉलर के आस पास आ गया.

क्यों आई क्रूड में गिरावट

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि असल में रूस प्रोडक्शन घटाने के पक्ष में नहीं था, जबकि ओपेक देश प्रोडक्शन घटाने की बात कह रहे थे. यही असहमति प्राइस वार का कारण बन गई. इसी वजह से सऊदी अरब ने रूस के साथ क्रूड को लेकर प्राइस वॉर छेड़ दिया है. उसने क्रूड की कीमतें भी घटा दी हैं. जिसके बाद कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट आई.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट कमोडिटी एंड करंसी, अनुज गुप्ता का कहना है कि रूस गिरती कीमतों को थामने के लिए प्रोडक्शन कट करने को तैयार नहीं था. इसी वजह से सऊदी अरब ने प्राइस वार छेड़ा और क्रूड की कीमतों में भारी कटौती कर दी. वहीं, आगे के लिए प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना का एलान किया.

क्रूड की कीमतों में 20 साल की सबसे बड़ी कटौती

ब्लूमबर्ग के अनुसार OPEC और उसके सहयोगी देशों के बीच तेल का उत्पादन बंद करने को लेकर कोई समझौता नहीं होने के बाद सऊदी अरब ने रविवार को तेल के दामों में पिछले 20 साल में सबसे बड़ी कटौती करने का ऐलान किया था. उसने एशिया के लिए अप्रैल डिलीवरी की कीमत 4-6 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिका के लिए सात अरब डॉलर प्रति बैरल घटा दी. अनुमान जताया जा रहा था कि मुख्य तेल उत्पादकों की बैठक में उत्पादन में भारी कटौती का फैसला किया जाएगा, लेकिन रूस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

अर्थव्यवस्था के लिए कितनी मददगार

केडिया का कहना है कि क्रूड की गिरती कीमतों से भारत को अपना व्यापार घाटा कम करने में कुछ हद तक मदद जरूर मिलेगी. लेकिन गिरती अर्थव्यवस्था के बीच क्रूड की गिरती कीमतें अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बहुत ज्यादा मददगार नहीं होगी. भारत में अभी स्लोडाउन के चलते कंजम्पशन कम है. इसलिए इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा. वैसे भी कच्चे तेल के अधिकांश सौदे भविष्य के आधार पर किए जाते हैं.

किन कंपनियों को होगा फायदा

आयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी), टायर इंडस्ट्री, सिंथेटिक फाइबर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां, पेंट कंपनियों और साबुन और डिटर्जेंट कंपनियों को क्रूड की गरिती कीमतों से लाभ हो सकता है. इसी वजह से आज BPCL, HPCL और इंडियन ऑयल के शेयरों में सुबह तेजी रही.

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