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क्रूड मार्च में ही 75 डॉलर तक होगा महंगा! घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए कितना रिस्क

Crude Impact On Economy: इस साल के शुरू से ही क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है.

March 9, 2021 7:58 AM
Crude Impact On EconomyCrude Impact On Economy: इस साल के शुरू से ही क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है.

Crude Impact On Economy: इस साल के शुरू से ही क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. साल 2021 की बात करें तो अबतक क्रूड में करीब 38 फीसदी की तेजी आ चुकी है. वहीं पिछले 1 साल में क्रूड 42 फीसदी महंगा हो गया है. मिडिल ईस्ट में टेंशन और ओपेक द्वारा अभी प्रोडक्शन कट जारी रखने के फैसले के बीच क्रूड में बड़ा उछाल देखने को मिला है. 8 मार्च को ब्रेंट क्रूड 71 डॉलर के पार चला गया है. वहीं डबल्यूटीआई क्रूड 67 डॉलर के पार है. ज्यादातर एक्सपर्ट का मानना है कि नियर टर्म से मिड टर्म में क्रूड में तेजी जारी रहेगी. फिलहाल क्रूड में तेजी जारी रहती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवसथा के साथ ही मार्केट पर भी असर पड़ सकता है.

2 साल के टॉप पर क्रूड

सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर ईरान समर्थित हाउदी विद्रोहियों ने मिसाइल दागे हैं. इसके बाद से क्रूड की सप्लाई को लेकर आशंका बन गई और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. 8 मार्च को ब्रेंट क्रूड 71 डॉलर के पार चला गया. यह कोरोना महामारी शुरू होने के बाद सबसे महंगा स्तर है. वहीं WTI क्रूड भी 67 डॉलर के पार है जो अक्टूबर 2018 के बाद सबसे महंगा है. एक्सपर्ट जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते क्रूड की कीमतों में अभी और तेजी देख रहे हैं.

75 डॉलर तक महंगा होगा क्रूड

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि फंडामेंटल में सुधार होने के साथ ही क्रूड में इस साल लगातार तेजी बनी रही थी. अब जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने और प्रोडक्शन कट जारी रहने की वजह से इसकी कीमतों को और सपोर्ट मिल सकता है. यूएस में एक और राहत पैकेज, लॉकडाउन खत्म होने के बाद डिमांड ग्रोथ के चलते भी इसमें तेजी आ रही है. उनका कहना है कि अगर प्रोडक्शन इसी लेवल पर रहा तो ब्रेंट क्रूड मार्च में ही 75 डॉलर तक महंगा हो सकता है.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कमोडिटी एंड करंसी, अनुज गुप्ता का भी मानना है कि क्रूड में यह तेजी जारी रहेगी. लॉकडाउन खुलने के साथ ही हर देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है. इससे क्रूड की डिमांड बढ़ रही है. एविएशन इंडस्ट्री से भी मांग बढ़ी है. प्रति दिन इस्तेमाल होने वाली क्रूड की मात्रा अब नॉर्मल होने की राह पर है, जो लॉकडाउन में घट गई थी.

ग्रोथ पर असर, बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतों में तेजी का मतलब है कि क्रूड खरीदने वाले देशों का खर्च बढ़ेगा, जिससे उस देश की बैलेंसशीट बिगड़ेगी. भारत प्रमुख क्रूड आयातक देश है. घरेलू खर्च बढ़ने से महंगाई बढ़ने का भी डर है. अगर क्रूड का भाव उपर बना रहता है तो घरेलू और साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका  असर पड़ेगा. हालांकि, यह डॉलर की मजबूती या कमजोरी पर भी निर्भर करेगा, क्योंकि क्रूड की कीमत डॉलर में तय होती है.

क्रूड महंगा बने रहे तो ग्लोबल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट का लेवल घट सकता है, वहीं, महंगाई बढ़ेगी. RBI के डाटा के अनुसार अगर क्रूड में 10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होता है तो 1250 करोड़ डॉलर का एडिशनल डेफिसिट बढ़ सकता है. यह भारत की जीडीपी का 43 बीपीएस है.

बाजार पर असर

क्रूड की कीमतें बढ़ने का असर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. असल में क्रूड में तेजी या कमजोरी से बहुत सी कंपनियों पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ता है. इससे उनके शेयरों में तेजी या गिरावट आ सकती है. एविएशन, आटोमोबाइल, लॉजिस्टिक, पेंट, टायर और
शिपिंग जैसी क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों का मुनाफा घट सकता है. ऐसे में इनके शेयरों का प्रदर्शन भी निगेटिव रह सकता है. इसके अलावा आयल मार्केटिंग कंपनियों को भी इसका नुकसान होता है. हालांकि एक्सपर्ट का सह भी कहना है कि साल 2014 में क्रूड 100 डॉलर के पार जा चुका है. इसलिए बाजार पर अभी क्रूड के असर को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि मार्केट फंडामेंटल मजबूत हैं.

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