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सस्ती कमोडिटी से कंज्यूमर सेक्टर को मिला सहारा, नतीजों के पहले इन शेयरों पर रखें नजर

Consumer Sector: कंज्यूमर कंपनियों को कमोडिटी की कीमतों में गिरावट या लगातार नरमी का फायदा मिलेगा.

October 8, 2020 7:44 AM
RIL, vedanta, stocks in focusMarkets are closely following global cues and indications are still mixed from that front

Consumer Sector: कंज्यूमर सेक्टर की बात करें तो दूसरी तिमाही में ज्यादातरकी सेल्स और एबिटडा ग्रोथ कमजोर रहने की आशंका है. अनलॉक के बाद भी अभी कंज्यूमर सेंटीमेंट कमजोर हैं. बिजनेस एक्टिविटी अभी पटरी पर आ रही है. अर्बन इलाकों में रिकवरी अभी सुस्त है. हालांकि रूरल सेंटीमेंट बेहतर होने से वहां रिकवरी बेहतर देखी जा रही है. हालांकि इस महौल में कंज्यूमर कंपनियों को जिस बात का सबसे ज्यादा फायदा मिला है, वह है क्रूड सहित कमोडिटी की कीमतों में गिरावट या लगातार नरमी बने रहना. इससे कंपनियों की लागत में कमी आई है. वहीं, कंपनियों ने अपने खर्च को भी कम कर कोविड 19 का असर बैलेंस करने की कोशिश की है.

रूरल रिकवरी तेज

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक कंज्यूमर कंपनियों पर कोविड 19 का असर है, लेकिन दूसरी ओर रूरल रिकवरी तेज हुई है. शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस का डर कम होने, बेहतर मॉनसून और ग्रामीण इलाकों पर सरकार द्वारा खर्च बढ़ाया जाना इसके पीछे प्रमुख कारण हैं. दूसरी ओर कमोडिटी की कीमतें लगातार कम हुई हैं या नरम बनी हुई हैं. इसमें क्रूड भी शामिल है. कंज्यूमर कंपनियों के पक्ष में एक और बात जाती है कि उन्होंने पिछले दिनों अपने खर्चों को सीमित किया है. इसमें विज्ञापनों का खर्च और ब्रांड इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं.

कई कटेगिरी में डबल डिजिट ग्रोथ

ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल के अनुसार दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की तुलना में अच्छी रिकवरी आएगी. अनलॉक में अभी बिजनेस पूरी तरह से पटरी पर नहीं आया है, लेकिन डिमांड तेजी से बढ़ रही है. अगस्त और सितंबर में वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर की सेल अच्छी रही है. ओनम के आस पास भी फेस्टिव सेल में तेजी देखने को मिली है. पंखे, वायर और स्माल अप्लियांसेज में डबल डिजिट ग्रोथ रही. रूरल डिमांड में लगातार तेजी आ रही है. वहीं, सबसे बड़ा फायदा कमोडिटी की कीमतों का नरम बने रहना है.

कमोडिटी की कीमतें

क्रूड प्राइस 40 डॉलर के आस पास बना हुआ है. शुगर इंडेक्स तिमाही और सालाना आधार पर बमजोर हुआ है. मेंथा और कोपरा की कीमतों में गिरावट है. बार्ले की कीमतें भी घटी हैं. हालांकि पाम आयल में तेजी आई है. नॉ एग्री कमोउिटी में भी कमजोरी आई है.

टॉप पिक्स: मोतीलाल ओसवाल

हिंदुस्तान यूनीलिवर: पाम फैटी एसिड और पैकेजिंग की कीमतें बढ़ने से एचयूएल में कुछ ग्रॉस मार्जिन प्रेशर जरूर है लेकिन कंपनी द्वारा साबुन की कीमतें बढ़ाए जाने से यह दबाव कम हुआ है. पिछले दिनों कंपनी ने जिर तरह से खर्च कम करने के उपाय किए हैं, आगे उसका फायदा मिलेगा.

डाबर: क्रूड की कीमतों में नरमी बने रहने का जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, उनमें डाबर भी शामिल है. कंपनी के फंडामेंटल भी मजबूत हैं.

मैरिको: कोपरा की कीमतें शुरू में बढ़ी थीं, लेकिन बाद में इसमें नरमी बनी रही. कंपनी में इस्तेमाल होने वाले दूसरी कमोडिटी की कीमतें भी नरम हैं. ऐसे में ओवरआल मार्जिन ग्रोथ बेहतर दिख रही है.

इसके अलावा भी जि कंपनियों को कमोडिटी की कीमतों में नरमी का फायदा मिलेगा, उनमें एशियन पेंट्स, पिडिलाइट, UBBL और GSKCH शामिल हैं.

टॉप पिक्स: एमके ग्लोबल

क्राूम्पटन ग्रीव्स
डिक्सॉन टेक्नोलॉजी

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