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लॉकडाउन से बैंकिंग-फाइनेंशियल सेक्टर की बिगड़ी गणित, क्वालिटी शेयर के साथ रहें स्टे सेफ

कोरोना वायरस के चलते देश में चल रहे लॉकडाउन की वजह से बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

April 14, 2020 8:44 AM
covid-19 Lockdown impact on BFSI, banking and financial sector, coronavirus impact on banking sector, COVID-19 impact on financial sector, बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर, banking stocks, financial stocksकोरोना वायरस के चलते देश में चल रहे लॉकडाउन की वजह से बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

कोरोना वायरस के चलते देश में चल रहे लॉकडाउन की वजह से बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक तो लॉकडाउन के चलते नया लोन पूरी तरह से बंद है. वहीं 3 महीने के मोरेटोरियम से कलेक्शन भी जीरो हो गया है. रिटेल और एसएमई सेक्टर पर बड़ा असर पड़ रहा है. पिछले दिनों सरकार द्वारा रीकैपिटलाइजेशन से बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक आस जगी थी, लेकिन लॉकडाउन ने इन उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया. लॉकडाउन में आरबीआई द्वारा लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय भी पर्याप्त नजर नहीं आ रहे हैं. ऐसे में बैंकिंग सेक्टर का चौथी तिमाही का प्रदर्शन खराब रहना ही है, वहीं अगली 2 तिमाही भी सेक्टर पर लॉकडाउन का असर रहेगा. ऐसे में क्वालिटी स्टॉक के साथ सुरक्षित रहने की ही रणनीति बेहतर है.

बैंकिंग सेक्टर के साथ-क्या है निगेटिव

  • ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल के अनुसार लॉकडाउन में आरबीआई मोरेटोरियम की वजह से रीपेमेंट में देरी होने और लोन ग्रोथ निचले स्तरों पर आने का खामियाजा फाइनेंशियल सेक्टर को उठाना पड़ रहा है. ओवर आल डिपॉजिट ग्रोथ संतोषजनक है लेकिन यस बैंक के बाद छोटे और मझोले बैंकों से लोगों ने अपना पैसा निकालकर बड़े बैंकों में शिफ्ट किया है.
  • मौजूदा समय में कॉरपोरेट रिजॉल्यूशन में सुस्ती से बैंकों का NPA आगे और बढ़ने की आशंका है. ऐसे में बैंकों की एसेट क्वालिटी पर असर होगा.
  • निजी बैंकों की बात करें तो लॉकडाउन से पहले तक इनका वित्तीय प्रदर्शन मजबूत था. हेल्दी क्रेडिट ग्रोथ, नेट इंटरेस्ट मार्जिन के बढ़ने, मजबूत कसटमर बेस का फायदा बैंकों को मिल रहा था. लेकिन लॉकडाउन से स्थिति बिगड़ गई. कोविड 19 की वजह से जिस तरह से मंदी का डर बढ़ा है, बैंकिंग सेक्टर पर भी उसका असर पड़ रहा है. इसका सही असर मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में होगा. लेकिन मार्च तिमाही के लिए बैंक प्रोविजनिंग बढ़ा सकते हैं.
  • एनबीएफसी में भी पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में रूरल डिमांड बढ़ने और एफिसिएंट कास्ट पर पर्याप्त लिक्विडिटी होने से ग्रोथ लौटती दिख रही थी. लेकिन कोविड 19 की वजह से मामला खराब हुआ.

लिकिव्डिटी बढ़ाने के उपाय कितने कारगर

ब्रोकरेज हाउस प्रभुदास लीलाधर के अनुसार लॉकडाउन के असर को कम करने के लिए पिछले दिनों आरबीआई ने लिक्विडिटी बढ़ाने के मजबूत उपाय किए. सेंट्रल बैंक ने CRR में 100 बेसिस प्वॉइंट कटौती कर इसे 3 फीसदी कर दिया. रेपो रेट में 75 अंकों की कटौती की. टर्म लोन पर 3 महीने के मोरेटोरियम की सुविधा दी. ब्रोकरजे के अनुसार ये उपाय बेहतर हैं लेकिन लोन पर क्रेडिट रिस्क बैंकिंग सेक्टर के लिए चिंता हैं. मोरेटोरियम से बैंकों को प्रोचिजनिंग भी बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी. वहीं लॉकडाउन से उनके मुनाफे पर असर होगा.

किन शेयरों में करें निवेश, किनसे रहें दूर

एमके ग्लोबल ने एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और फेडरल बैंक में निवेश की सलाह दी है. यस बैंक को सेल करने, पीएनबी को सेल करने और बजाज फाइनेंस और बैंक आफ बड़ौदा को होल्ड करने की सलाह दी है. ब्रोकरेज हाउस प्रभुदास लीलाधर ने भी एसबीआई, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक में निवेश की सलाह दी है. जबकि कोटक महिंद्रा को होल्ड करने, बैंक आफ इंडिया और पीएनबी को कम करने की सलाह दी है.

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