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बजाज फाइनेंस: कोरोना, शॉपिंग और EMI सेंटीमेंट ने बिगाड़ा इस शेयर का भाव, 10 साल में बना चुका है करोड़पति

Bajaj Finance: लॉर्जकैप शेयरों में पिछले 10 साल और 15 साल के दौरान रिटर्न देने में बजाज फाइनेंस अव्वल रहा है. लेकिन इस साल कोविड 19 की वजह से कंज्यूमर सेंटीमेंट अभी इसे लेकर नॉर्मल नहीं हो पाए हैं. सितंबर तिमाही के आंकड़े जून तिमाही की तुलना में कुछ बेहतर जरूर हैं, लेकिन अभी प्री […]

Updated: Oct 07, 2020 11:46 AM
Bajaj FinanceBajaj Finance: लॉर्जकैप शेयरों में पिछले 10 साल और 15 साल के दौरान रिटर्न देने में बजाज फाइनेंस अव्वल रहा है.

Bajaj Finance: लॉर्जकैप शेयरों में पिछले 10 साल और 15 साल के दौरान रिटर्न देने में बजाज फाइनेंस अव्वल रहा है. लेकिन इस साल कोविड 19 की वजह से कंज्यूमर सेंटीमेंट अभी इसे लेकर नॉर्मल नहीं हो पाए हैं. सितंबर तिमाही के आंकड़े जून तिमाही की तुलना में कुछ बेहतर जरूर हैं, लेकिन अभी प्री कोविड लेवल से काफी नीचे हैं. असल में कोविड 19 की वजह से अभी आगे अनिश्चितता की स्थिति है, इससे कंज्यूमर्स सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है. कंजम्पशन अभी भी कमजोर है, लोग अतिरिक्त शॉपिंग से बच रहे हैं. फिलहाल इन वजहों से इस करोड़पति बनाने वाले शेयर का फंडामेंटल भी कमजोर हुआ है.

सितंबर तिमाही में नए लोन की संख्या घटी

बजाज फाइनेंस के सितंबर तिमाही के आंकड़ों पर कोरोना वायरस महामारी का साफ असर देखने को मिला है. सितंबर तिमाही में बजाज फाइनेंस ने 36 लाख नए लोन दिए हैं. लेकिन एक साल पहले की समान तिमाही की तुलना में यह आधे से भी कम है. लोन डिस्बर्समेंट और नए कस्टमर्स के टर्म में बिजनेस वॉल्यूम सालाना आधार पर 50–60 फीसदी के ही लेवल पर है. लोन डिस्बर्स सालाना आधार पर 45 फीसदी कम हुआ है. अप्रैल से जून तिमाही के दौरान बजाज फाइनेंस की न्यू लोनबुक 17 लाख ही रही थी.

AUM फ्लैट

वहीं बजाज फाइनेंस का एसेट अंडर मैनेजमेंट इस तिमाही में 1.3 फीसदी ही बढ़ा है. कंज्यूमर B2C और SME लेंडिंग सुस्त है. हालांकि बैलेंस शीट पर लिक्विडिटी में तिमाही आधार पर 9 फीसदी ग्रोथ रही है, वहीं डिपॉजिट बुक तिमाही आधार पर 5 फीसदी बढ़कर 21600 करोड़ रहा है. जून तिमाही में बजाज फाइनेंस की एयूएम ग्रोथ सिर्फ 7 फीसदी रही थी, जो 10 साल की सबसे सुस्त ग्रोथ थी.

निवेशकों के लिए रहा है करोड़पति शेयर

बजाज फाइनेंस की बात करें तो यह लंबे समय से निवेशकों के लिए करोड़पति शेयर साबित हुआ है. इसने 15 साल और 10 साल की अवधि में शेयर धारकों को मालामाल कर दिया है.

15 साल की बात करें तो शेयर ने निवेशकों को 12307 फीसदी रिटर्न दिया है. इस दौरान (अक्टूबर 2005 से अक्टूबर 2020) शेयर का भाव 28 रुपये से बढ़कर 3474 रुपये पहुंच गया. यानी यहां 15 साल में निवेशकों का पैसा 124 गुना बढ़ गया.

वहीं, पिछले 10 साल में शेयर 76 रुपये से बढ़कर 3474 रुपये पहुंच गया. यानी निवेशकों का पैसा 44 गुना बढ़ गया. फीसदी के हिसाब से 4278 फीसदी रिटर्न मिला.

आगे शेयर पर रहेगा दबाव!

ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल ने शेयर में होल्ड की सलाह देते हुए 2950 रुपये का लक्ष्य रखा है. ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने भी शेयर के लिए न्यूट्रल रेटिंग रखी है. सितंबर तिमाही में रिकवरी जरूर है लेकिन ब्रोकरेज का कहना है कि डिस्बर्समेंट वॉल्यूम में गिरावट निराशाजनक है, क्योंकि पियर कंपनियों मसलन एचडीएफसी में हेल्दी ट्रेंड देखने को मिल रहा है. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी पर एक और तिमाही दबाव रह सकता है. FY21/FY22E के लिए ईपीएस एस्टीमेंट 8%/4% घटा दिया है. ब्रोकरेज के अनुसार कंपनी के साथ अगले फिस्कल में ही सबकुछ नॉर्मल होगा.

(Disclaimer: यह जानकारी कंपनी द्वारा दी गई सूचना और शेयर के प्रदर्शन के आधार पर है. हम यहां शेयर में निवेश की सलाह नहीं दे रहे. बाजार के जोखिम को देखते हुए एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही निवेश करें.)

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